डीएसएसएसबी परीक्षा में जातिसूचक शब्द का इस्तेमाल

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डीएसएसएसबी से पूछा है कि संबंधित प्रश्न पत्र में किसी जाति विशेष और समुदाय के लेकर पूछे गए प्रश्न हैं। यदि हां तो इसका क्या तात्पर्य है।

नई दिल्ली : दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड द्वारा प्राइमरी शिक्षक के लिए आयोजित परीक्षा के हिंदी भाषा और बोध अनुभाग के प्रश्न में जातिसूचक शब्द का प्रयोग किया गया है। इस शब्द पर हुए हंगामे को देखते हुए समाज कल्याण विभाग मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने डीएसएसएसबी से जवाब मांगा है। हालांकि उपराज्यपाल कार्यालय व सेवा विभाग ने इस विवाद पर फिलहाल कुछ भी कहने से मना कर दिया है। मंत्री ने कहा कि किसी भी भाषा में शब्द-अपशब्द हो सकते हैं, पर उपयोगकर्ता के शब्दों का चुनाव उसके विचारों को उच्च या नीच बनाते हैं।

उन्होंने डीएसएसएसबी से पूछा है कि संबंधित प्रश्न पत्र में किसी जाति विशेष और समुदाय के लेकर पूछे गए प्रश्न हैं। यदि हां तो इसका क्या तात्पर्य है। प्रश्न में जातिसूचक शब्द का प्रयोग किया गया है। यह काफी गंभीर बात है। उन्होंने कहा कि डीएसएसएसबी को हिंदी की परीक्षा के प्रश्नपत्र में हिंदी साहित्य के वाल्मीकि, तुलसी, सूर, कबीर, रविदास दिनकर, मैथिलीशरण, निराला आदि की हिंदी से प्रश्न पूछना चाहिए था, पर जाति आधारित सवाल पूछकर बोर्ड ने अपनी, भारतीय संविधान की, हिंदी की और देश की संस्कृति की गरिमा को चोट पहुंचाई है।

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उन्होंने कहा कि सेवा विभाग एलजी के पास है उन्हें प्राइमरी टीचर की प्रतियोगिता परीक्षा के प्रश्न संख्या 61 पर पूछे जाने वाले सवाल का क्या मतलब है, यह जानना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसे देखकर लग रहा है देश एक बार फिर से उसी दिशा की ओर जा रहा है जैसा आज से हजारों साल पहले था जहां जातियों में बांटकर जनता को वर्ण व्यवस्था में बांधकर उन्हें प्रताड़ित किया जाता था। ऐसे समाज की स्थापना फिर से होना बेहद ही चिंताजनक स्थिति है देश के लिए और मुझे विश्वास है कि मुख्य सचिव ऐसे कूकृत्यों की भर्त्सना भी करेंगे तथा कड़ी कार्रवाई भी।

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