नई दिल्ली : मायापुरी में अवैध तौर पर चल रहे स्क्रैप इंडस्ट्रीज को बंद करने के अपने आदेश के खिलाफ सुनवाई करने से इनकार कर दिया है जो प्रदूषण फैला रहे हैं। सोमवार को एनजीटी चेयरपर्सन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि अथॉरिटीज को एनजीटी के 2015 के ऑर्डर को लागू करने का निर्देश दिया गया है। बेंच ने कहा कि हम नए अपील को नहीं सुनेंगे। हमने विस्तृत ऑर्डर जारी कर रखा हैष हमने नया कुछ भी नहीं कहा।

सिर्फ 14 मई 2015 को दिए गए ऑर्डर के अनुपालन का निर्देश दिया गया जिसमें मायापुरी में अवैध तौर पर चलाए जा रहे स्क्रैप इंडस्ट्रीज (कबाड़ के व्यवसाय) को बंद करना था। ट्रैडर्स की ओर से बीते 11 अप्रैल को दिल्ली सरकार को अवैध स्क्रैप यूनिट्स को बंद करने का निर्देश देने वाले आदेश के खिलाफ तत्काल सुनवाई की मांग की गई थी। जिसे एनजीटी ने खारिज कर दिया है।

इससे पहले एनजीटी ने दिल्ली सरकार की खिंचाई की थी और स्क्रैप यूनिट्स पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। इस मामले में एनजीटी ने दिल्ली सरकार के चीफ सेक्रेटरी विजय देव और डीपीसीसी चेयरमैन चंद्रशेखर भारती को 3 मई को हाजिर होने के लिए कहा था।

जुर्माने को एनजीटी में चुनौती…
वहीं, मायापुरी स्क्रैप यूनिट्स संचालकों की ओर से डीपीसीसी द्वारा लगाए जुर्माने को एनजीटी में चुनौती दी गई है। इस मामले में अगली सुनवाई 26 अप्रैल को होगी। एनजीटी ने 26 अप्रैल यानि अगली सुनवाई तक डीपीसीसी को मायापुरी में चलाए जा रहे स्क्रैप यूनिट्स के खिलाफ किसी भी प्रकार की कड़ी कार्रवार्ई न करने का निर्देश जारी किया है।

साउथ एमसीडी ने जताई असमर्थता…
मायापुरी में सीलिंग के दौरान हुए पथराव के बाद साउथ एमसीडी ने सीलिंग करने में असमर्थता जताते हुए चीफ सेक्रेटरी को पत्र लिखा है। पत्र महापौर नरेंद्र चावला ने लिखा है। महापौर ने दिल्ली सरकार के चीफ सेक्रेटरी से अनुरोध किया है कि प्रदूषक उद्योगों को बंद करने का काम डीपीसीसी या दिल्ली सरकार के उद्योग विभाग को दिया जाए। इस संबंध में उन्होंने दो पत्र लिखे हैं।

चावला ने यह भी कहा है कि साउथ एमसीडी के अधिकांश कर्मचारी चुनाव ड्यूटी पर हंै और आम चुनाव 2019 की तैयारियों में जुटे हैं। लिहाजा कर्मचारियों को उपरोक्त कार्य के लिए उपलब्ध कराना संभव नहीं होगा। उन्होंने चीफ सेक्रेटरी से यह भी अनुरोध किया कि वह तथ्यात्मक स्थिति से संबंधित प्राधिकारियों को कृपया अवगत करा दें।

चावला ने कहा है कि तथ्यात्मक स्थिति यह है कि अस्वीकृत उद्योगों को बंद करने का काम दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति या दिल्ली सरकार के उद्योग विभाग का है।