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‘दुर्गा पूजा’ और ‘शेख हसीना’

भारत-बांग्लादेश के मधुर सम्बन्ध भारतीय उपमहाद्वीप में उसी प्रकार रहे हैं जिस प्रकार भारत- नेपाल के हैं परन्तु बांग्लादेश में सक्रिय कुछ कट्टरपंथी तत्वों को यह सहन नहीं होता है और वे शेख मुजीबुर्रहमान के इस धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र की जनता के बीच धर्म के नाम पर नफरत फैलाने का काम करते रहते हैं। इस ‘बंग संस्कृति’ के प्रवाहक देश में पाकिस्तान की शह पर कुछ ऐसे कट्टर इस्लामी संगठन हमेशा इस फिराक में रहते हैं कि किसी प्रकार महान बांग्ला संस्कृति के धागे से बंधे इसके लोगों के बीच आपस में वैमनस्य पैदा हो सके। बांग्लादेश में 10 प्रतिशत से अधिक हिन्दू आबादी आज भी रहती है जिसे  इस देश के संविधान के अनुसार बराबर के नागरिक व राजनीतिक अधिकार प्राप्त हैं। मगर इस देश का विवादास्पद ‘जमात-ए-इस्लामी’ संगठन प्रारम्भ से ही हिन्दू विरोधी कार्रवाई संलग्न रह कर साम्प्रदायिकता को बढ़ावा देता रहा है जिसका विरोध आम बांग्लादेशी नागरिक करते रहे हैं परन्तु यह संगठन अपनी हरकतों से बाज नहीं आता हालांकि इस संगठन को प्रतिबन्धित करने की कानूनी कार्रवाई भी इस देश में होती रही है। 

हाल ही में विगत वीरवार को ढाका से 100 कि.मी. दूर कोमिल्ला शहर में कट्टरपंथियों ने दुर्गा पूजा पंडालों के बाहर साम्प्रदायिक दंगे भड़काने की कोशिश की जिसे बांग्लादेश पुलिस ने पूरी ताकत से दबाया मगर इसमें चार नागरिक हताहत हो गये और कई जख्मी भी हुए जिनमें कई पुलिस कर्मी भी शामिल हैं। दंगाइयों ने कुछ हिन्दू मन्दिरों को भी निशाना बनाने की कोशिश की थी जिसे पुलिस बल ने नाकाम किया और शान्ति स्थापित की। इस घटना को लेकर भारत के विदेश मन्त्रालय ने बांग्लादेश की सरकार से चिन्ता प्रकट की थी जिसके जबाव में इस देश की प्रधानमन्त्री श्रीमती शेख हसीना वाजेद ने भारत से आग्रह किया है कि वह अपने देश में इसकी प्रतिक्रिया होने से रोकने के इन्तजाम करें जिससे दोनों देशों के बीच मधुरता कम न हो। शेख हसीना ने कोमिल्ला की घटना के समर्थन में कट्टरपंथियों द्वारा अगले दिन शुक्रवार को ढाका में किये गये प्रदर्शन को भी असफल बना दिया और प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज व आंसू गैस के गोले भी छोड़े। इस प्रदर्शन में शामिल लोग शेख हसीना के खिलाफ ‘भारत के निकट’ होने के नारे भी लगा रहे थे। इसी से अन्दाजा लगाया जा सकता है कि कट्टरपंथियों की भारत विरोध में झुंझलाहट किस कदर है। मगर बांग्लादेश की ‘बंग संस्कृति’ की उपासक श्रीमती शेख हसीना ने विगत वीरवार को ही दुर्गा पूजा के अवसर पर ढाका स्थित ऐतिहासिक ढाकेश्वरी मन्दिर में उपस्थित श्रद्धालुओं को अपने राष्ट्रीय वीडियो सन्देश में कहा कि हम अपेक्षा करते हैं कि भारत में ऐसा कुछ नहीं होगा जिसका असर बांग्लादेश की हिन्दू जनता पर पड़े। कोमिल्ला व अन्य स्थानों पर घटी हिंसक घटनाओं की सख्ती के साथ जांच हो रही है और किसी को भी बख्सा नहीं जायेगा। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि अपराधी किस धर्म का है। सभी अपराधियों को ढूंढ-ढूंढ कर कानून के हवाले किया जायेगा और सजा दिलाई जायेगी। क्योंकि मेरी सरकार अपराधियों को घेरने से कभी पीछे नहीं हटी है, चाहे उनका धर्म कोई भी हो। हम ऐसे अपराधियों को पकड़ेंगे। मेरी सरकार ने पूर्व में भी ऐसा ही किया है और भविष्य में भी ऐसा करने से पीछे नहीं हटेंगे। हम अपराधियों को एेसी सजा देंगे कि भविष्य में कोई भी धार्मिक उन्माद के नाम पर हिंसा फैलाने की जुर्रत न कर सके।

 शेख हसीना ने अपने सम्बोधन में आम लोगों से भी सावधान रहने की अपील की और कहा कि अगर हम सब एकजुट होकर विध्वंसकारी तत्वों का मुकाबला करें तो वे हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकते। शेख हसीना ने अपने देश के हिन्दू समुदाय के प्रतिनिधियों को भी आश्वस्त किया कि सरकार हर प्रकार की सावधानी बरत रही है और दुर्गा विसर्जन के दौरान कोई अप्रिय घटना नहीं होने देगी क्योंकि हर मोर्चे पर पुलिस व सुरक्षा बलों का इंतजाम चाक-चौबन्द कर दिया गया है। उन्होंने अपने देश के हिन्दू नागरिकों को निर्भय करते हुए कहा कि वे स्वयं को अल्पसंख्यक न समझें और अपने धार्मिक कृत्य उसी प्रकार करें जिस प्रकार अन्य धर्मों को मानने वाले लोग करते हैं। बांग्लादेश की 88 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है। बांग्लादेश की हिन्दू जनता ने भी इस देश की 1971 की स्वतन्त्रता की लड़ाई में बढ़-चढ़ कर भागीदारी की है। सभी धर्मों के लोगों को अपने-अपने धर्म को मानने की इस देश में खुली स्वतन्त्रता है। 

भारतवासियों के लिए शेख हसीना के ये उद्गार बांग्लादेश के पूर्णरूपेण सभ्य व धर्मनिरपेक्ष देश होने का प्रमाण है। इसके साथ शेख हसीना ने पूजा पंडाल दंगों के मामलों में जमात-ए- इस्लाम की भूमिका की जांच कराने की बात भी कही। इससे स्पष्ट है कि पाकिस्तान परस्त यह संगठन किस प्रकार भारत के विरुद्ध जहर उगलने के मौके तलाशता रहता है और दो दोस्त देशों के बीच में सन्देह की लकीर खींचना चाहता है। यह सनद रहनी चाहिए कि आम बांग्लादेश भारत को अपना सच्चा मित्र मानता है और अपने बंगाली होने पर गर्व का अनुभव करता है। यही वजह है कि इस देश के राष्ट्रीय तीज त्यौहार बांग्ला संस्कृति की मान्यताओं के अनुसार ही तय होते हैं। कट्टरपंथी यह बंगाल की संस्कृति की यह उदारता और महानता स्वीकार नहीं कर पाते हैं और झुंझलाहट व खिसियाहट में इस देश की सामाजिक एकता को तोड़ने की साजिश करते रहते हैं और हिन्दुओं व भारत के खिलाफ विष उगलते रहते हैं।