BREAKING NEWS

‘नमामि गंगे’ मिशन के तहत PM मोदी ने उत्तराखंड में 6 बड़ी परियोजनाओं का किया उद्घाटन◾कृषि बिल पर राहुल ने की किसानों से बातचीत, कहा- नए कानून से अन्नदाता बन जाएंगे मजदूर◾हाथरस गैंगरेप पीड़िता की मौत पर विपक्ष का योगी सरकार पर हमला, कानून व्यवस्था पर उठाए सवाल◾देश में एक दिन में कोरोना के 70 हजार नए मामलों की पुष्टि, पॉजिटिव केस 61 लाख के पार◾ विश्व में कोरोना वायरस का कहर तेज, पॉजिटिव केस 3 करोड़ 32 लाख के पार ◾उत्तर प्रदेश : हाथरस में सामूहिक बलात्कार पीड़िता की दिल्ली के अस्पताल में इलाज के दौरान मौत◾TOP 5 NEWS 29 SEPTEMBER : आज की 5 सबसे बड़ी खबरें◾ अमेरिका में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 71 लाख से अधिक, ये प्रांत बुरी तरह प्रभावित ◾J&K के पुंछ में पाकिस्तान ने LOC पर संघर्ष विराम का उल्लंघन किया, सेना ने दिया मुहतोड़ जवाब◾आज का राशिफल (29 सितम्बर 2020)◾MI vs RCB (IPL 2020) : रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर की मुंबई इंडियन्स पर सुपर ओवर में रोमांचक जीत◾सुशांत केस: AIIMS ने सीबीआई को सौंपी रिपोर्ट, जांच की रफ्तार होगी तेज◾पत्नी से मारपीट का वीडियो वायरल : पुलिस अधिकारी पदमुक्त, सरकार ने जारी किया 'कारण बताओ नोटिस'◾कोविड-19 को लेकर बोली दिल्ली सरकार - दिल्ली में शुरू हो चुका है कोरोना का डाउनट्रेंड◾शिरोमणि अकाली दल ने किया ऐलान - दिल्ली में बीजेपी गठबंधन के सभी पद छोड़ेगा अकाली दल◾अमित शाह ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विभिन्न मुद्दों पर स्थिति की समीक्षा की◾महाराष्ट्र में कोरोना का कोहराम बरकरार, बीते 24 घंटे में 11,921 नए केस, संक्रमितों का आंकड़ा 13.51 लाख के पार ◾IPL-13: डिविलियर्स-फिंच का तूफानी अर्धशतक, बेंगलोर ने मुंबई को दिया 202 रनों का लक्ष्य ◾रक्षा मंत्रालय बड़ा फैसला - 2,290 करोड़ रुपये के सैन्य उपकरणों की खरीद को मंजूरी दी ◾प. बंगाल के राज्यपाल की ममता सरकार को चेतावनी - संविधान की रक्षा नहीं हुई तो कार्रवाई होगी◾

भारत में कोरोना के आँकड़े #GharBaithoNaIndiaSource : Ministry of Health and Family Welfare

कोरोना की पुष्टि

इलाज चल रहा है

ठीक हो चुके

मृत लोग

आरुषि हत्याकांड : इंसाफ पर सवाल!

आरुषि और हेमराज की अजीबोगरीब नृशंस हत्या 16 मई, 2008 को हुई थी। अपराध की जांच करने पुलिस भी पहुंची थी। दोनों का गला एक ही तरीके से काटा गया था। पुलिस इस नतीजे पर पहुंची थी कि यह आनर कि​लिंग का मामला है। जैसे-जैसे अपराध का विश्लेषण आगे बढ़ता गया त्यों-त्यों तलवार परिवार के वैवाहिक जीवन चरित्र की बदनाम कहानियां जोर पकड़ती गईं। संवेदनाएं खत्म होती गईं और अफवाहों ने तहकीकात पर प्रभाव डालना शुरू कर दिया। इस दर्दनाक हत्याकांड को लेकर अखबारें, टी.वी. चैनल और इंटरनेट भर गया। जितने मुंह उतनी बातें। हर जगह इसकी चर्चा। हाइप्रोफाइल केस की गुत्थी उलझती चली गई। पुलिस ने आरुषि के पिता राजेश तलवार को आनर कि​लिंग में गिरफ्तार भी किया था लेकिन तत्कालीन मायावती सरकार ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी। सीबीआई की पहली टीम ने आरुषि के पिता को निर्देष बताया, राजेश तलवार के कंपाउडर कृष्णा के अलावा दो अन्य लोगों को गिरफ्तार भी किया था। इसके बाद राजेश तलवार को जमानत पर रिहा भी कर दिया गया, सीबीआई 90 दिन के भीतर चार्जशीट ही नहीं पेश कर पाई। इस मामले की जांच के लिए सीबीआई ने 2010 में दूसरी टीम बनाई, इस टीम ने भी सबूतों के अभाव में क्लोजर रिपोर्ट लगा दी थी जिसे ट्रायल कोर्ट ने नहीं माना। फिर गाजियाबाद स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने 26 नवम्बर, 2013 को राजेश तलवार और नुपुर तलवार को केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर दोहरे हत्याकांड का दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। तलवार दम्पति ने इस फैसले को 2014 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अंततः इलहाबाद हाईकोर्ट ने निचली अदालत का फैसला पलटते हुए दोनों को रिहा कर दिया।

यह भारतीय न्याय प्रणाली और लोकतंत्र के सशक्त स्तम्भ पर कलंक ही है कि उसने दो जिन्दगियों के 9 साल और मृत आरुषि का आत्मसम्मान छीन लिया। अगर पुलिस, सीबीआई या मीडिया जांच और रिपोर्टिंग का रुख कुछ और होता तो हालात ऐसे नहीं होते। आरुषि-हेमराज मर्डर केस का कत्ल तो पहले ही दिन हो गया था। जांच और अनुमानों का सिलसिला चला तो फिर उसने थमने का नाम ही नहीं लिया। मामले को इतना सनसनीखेज बना दिया गया, अवैध संबंधों की कहानी ने पूरे मामले पर काली स्याही पोत दी। न तो पुलिस ने जिम्मेदारीपूर्ण रवैया अपनाया और न ही शीर्ष जांच एजैंसी ने। 14 साल की लड़की के बारे में इतनी घटिया बातें कही गईं कि विश्वास ही नहीं होता था।

कहने को तो सीबीआई देश की सबसे बड़ी जांच एजैंसी की तुलना अमेरिका की एफबीआई से होती है परन्तु कई ऐसे मामले हैं जिनमें सीबीआई या तो गुनाहगार का पता ही नहीं कर पाई या फिर उसकी जांच पर गंभीर सवाल उठे। निठारी कांड को कौन भूल सकता है। इस मामले में भी सीबीआई का लचर रुख सामने आया था। सीबीआई ने इस कांड से जुड़े बहुत सारे मामलों में मोनिंदर सिंह पंढेर को यह कहते हुए छोड़ दिया था कि हत्याओं के वक्त वह मौजूद नहीं था और सिर्फ उसके नौकर सुरिंदर कोली ने हत्याएं की हैं। हालांकि जुलाई 2017 में दोनों को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। आज 9 वर्ष बाद भी सवाल अपनी जगह खड़ा है कि आरुषि-हेमराज को किसने मारा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों और हालात को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट टिप्पणियां भी की हैं। कोर्ट ने कहा है कि संदेह सबूत की जगह नहीं ले सकता।

क्या देश की शीर्ष जांच एजैंसी को आरुषि के कातिलों को ढूंढने के लिए 9 वर्ष और चाहिए। आरुषि को न्याय नहीं मिला। हत्याकांड पर आया फैसला यह भी दिखाता है कि मीडिया ट्रायल हमारे सोचने के तरीके, फैसलों पर कितना असर डालता है। अब सीबीआई के पूर्व निदेशक ए.सी. सिंह का कहना है कि तलवार दम्पति को संदेह का लाभ मिला है न कि क्लीनचिट मिली है। सेवानिवृत्त अधिकारी जो कुछ भी कहे वह तो महज लीपापोती ही है। हाईकोर्ट ने कठोर टिप्पणी की है कि निचली अदालत ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर ही फैसला सुना दिया, हत्या की वजह को लेकर स्थिति स्पष्ट ही नहीं है, ट्रायल जज गणित के टीचर की तरह व्यवहार नहीं कर सकता। उसने एक फिल्म निर्देशक की तरह सोच लिया कि हुआ क्या था। कानून के बुनियादी नियम को जज ने फालो ही नहीं किया। आरुषि मामले में जो फैसला आया उससे यह सवाल तो बनता है कि क्या तलवार दंपति गलत और अनफेयर ट्रायल का शिकार हुआ अगर तलवार दंपति निर्दोष है तो फिर उन्हें जेल में क्यों सड़ना पड़ा? सीबीआई सबूतों के अभाव में हार गई, उसने बहुत दावे किए थे कि उसके पास पुख्ता सबूत हैं, तो फिर सबूत गए कहां? इंसाफ पर समाज सवाल उठा रहा है, उठाता रहेगा लेकिन जवाब कौन देगा?