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भारत में कोरोना के आँकड़े #GharBaithoNaIndiaSource : Ministry of Health and Family Welfare

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सावधान...हर तरफ हैं साइबर गुनहगार...

इसमें कोई संदेह नहीं कि टैक्नोलॉजी में इतनी उन्नति की है कि आज दुनिया को लोग कंप्यूटर की दुनिया कहते हैं। बल्कि मैं इसमें दो शब्द और जोड़कर कहना चाहती हूं कि आज की दुनिया तो मोबाइल की दुनिया है। एक मोबाइल में इतने ज्यादा प्रोग्राम हैं कि आप चलते-फिरते सब कुछ कर सकते हैं। किसी से बातचीत से लेकर घर के एसी या कैमरे तक आप मोबाइल से आपरेट कर सकते हैं और इसी मोबाइल से आप अपने बैंक की गतिविधियों का संचालन कर सकते हैं लेकिन यह भी सच है कि जरूरत से ज्यादा सुविधाएं और ज्यादा सुविधाभोगी होने की आदतें इंसान के लिए मुश्किलें भी बढ़ा देती हैं। जब मोबाइल में आपकी अकाउंट डिटेल कोई निकाल ले या आपके एटीएम की कोई क्लोनिंग करके पासवर्ड को बदलकर आपका पैसा निकाल ले तो इसी का नाम साइबर ठगी है। 

आपके मोबाइल पर आने वाली अवांछनीय कॉल्स आपके बैंक खाते तक से रकम उड़ा सकती है। ये चौंकाने वाले खुलासे साइबर क्राइम एक्सपर्टस ने किये हैं इसलिये आजकल मोबाइल पर बैंक आपरेट और एटीएम से पैसा निकलवाते हुए बहुत ज्यादा सावधानी की जरूरत है। हालांकि हमने सोशल मीडिया के अत्यधिक दुरुपयोग और ग्रुप बनाकर किसी की भी इज्जत से और उसके व्यक्तित्व से छेडछाड़ को लेकर लोगों से सावधान रहने संबंधी अपील अपनी कलम के माध्यम से की थी लेकिन अब तक हालात यह हैं कि मोबाइल का प्रयोग बहुत सावधानी से करना चाहिए। 

अभी पिछले दिनों दिल्ली में सौ से ज्यादा लोगों ने साइबर क्राइम डिपार्टमेंट को शिकायत की कि उनके मोबाइल पर अलग-अलग बैंकों के नाम से अलर्ट रहने के फोन आ रहे हैं। कुछ लोग अपने बैंक से संचालन को लेकर संतुष्ट भी नहीं थे तो उन्होंने गूगल पर बैंक कस्टमर केयर का नंबर खोजा और जो नंबर वहां से लिया गया वह उन ठगों का था जो साइबर क्राइम करते थे। ठगों ने इस कस्टमर केयर नंबर से वापस कस्टमर को यह कहकर फोन किया कि वह बैंक से बोल रहे हैं और अकाउंट की डिटेल ले ली। 

दरअसल ठग स्टेटमेंट चैक करने के बहाने केवाईसी स्टेटमेंट और आईपी लॉग जान लेते हैं और इससे खुद खाता आपरेट करके जब चाहें पैसे निकलवा लेते हैं। साइबर क्राइम एक्सपर्टस का कहना है कि ऐसे अपराधी अलग-अलग बैंकों के नाम पर फोन नंबर हासिल कर लेते हैं और लोगों को अपने साथ जोड़कर अलर्ट रहने की बात कहकर विश्वास जताते हैं कि वे बैंक से बोल रहे हैं। एक शिकायत के अनुसार जो गैंग दिल्ली पुलिस ने पकड़ा है उसके छह सदस्य अभी गिरफ्तार हुए हैं और ये लोग हरियाणा के मेवात क्षेत्र से जुड़े थे जिनका कनैक्शन झारखंड के एक कस्बे जामताड़ा से है। 

जब साइबर एक्सपर्टस ने इन छह लोगों के मोबाइल पर नजर रखी तो सभी के नंबर जामताड़ा से आपरेट हो रहे थे। इन लोगों ने कम से कम एक लाख से ज्यादा लोगों को नंबर डायल करते हुए पांच हजार से ज्यादा लोगों को अपना शिकार बना लिया। चौंकाने वाली बात यह है कि इन सभी से 70 एटीएम कार्ड, तीन लाख से ज्यादा की नकदी और दो हजार से ज्यादा चैकबुक्स स्वाईप मशीनें, फिंगर प्रिंट सेंसर और ब्लैंक  चैक भी बरामद किये गए। ये लोग अपने मोबाइल से नेट बैंकिंग से किसी भी बैंक अकाउंट को ऑन कर सकते थे। 

एक्सपर्टस बताते हैं कि मोबाइल में अगर कोई कॉल आती है और व्यक्ति हैलो कर देता है तो ये लोग लूटने की नई-नई तकनीकों से आपके नंबर से मिली जानकारी के अनुसार आधार कार्ड तक पहुंच जाते हैं  और वहां से डिटेल चुरा लेते हैं। इसके बाद एक ईमेल तैयार करते हैं और किसी भी अकाउंट होल्डर को भेज दी जाती है। अकाउंट होल्डर के रिस्पोंड करते ही इन लोगों के पास डिटेल पहुंच जाती थी। एक्सपर्टस का मानना है कि यह गैंग जामताड़ा से आपरेट हो रहा है और दिल्ली में अभी भी एक्टिव है। इसलिए जरूरी है कि लोग अनवांटेड कॉल से बचें और बैंक के नाम पर आने वाली कॉल्स के मामले में भी जानकारी न दें तो अच्छा है। 

मैं यह हर आम खास व्यक्ति को सावधान करने और उनकी जानकारी के लिए लिख रही हूं ताकि जितनों को मैं अपनी लेखनी से बचा पाऊं तो एक जिन्दगी का पुण्य का काम होगा। हमारा मानना है कि कोई आम आदमी किसी बैंक के नाम पर मोबाइल नंबर कैसे ले सकता है। धड़ाधड़ मोबाइल बेचने वाले लोग जो साइबर कैफे में बैठे हैं या कहीं और  से मोबाइल बेच रहे हैं वे लोग किसी अकेले व्यक्ति को किसी भी बैंक के नाम पर नंबर कैसे अलॉट कर सकते हैं। हालांकि टैक्नोलॉजी बहुत एडवांस हो चुकी है लेकिन साइबर क्रिमिनल्स भी टैक्नोलॉजी में बहुत एडवांस हैं और लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। 

आज भी लोगों को अचानक लॉटरी लगने या जैकपॉट से पैसा मिलने की खुशखबरी ईमेल पर या व्हाटसऐप से देकर अनेक क्रिमिनल सक्रिय हैं और भोलेभाले लोग इनका शिकार हो जाते हैं। मोबाइल नंबर बैंकों के नाम पर अगर कोई व्यक्ति हासिल करता है तो यह नियमों में ढील है या फिर ठगों की चालाकी लेकिन शिकार तो आम आदमी ही होता हैतो इसलिए इस जामताड़ा साइबर गैंग की कमर तोड़ने का वक्त आ गया है और लोगों को इस साइबर क्राइम का शिकार होने से बचाने के लिए दूरसंचार मंत्रालय को पग उठाने चाहिएं। यह हमारी ही नहीं बल्कि इस वक्त पूरे देश और समय की मांग है।