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आम आदमी का बजट

दिल्ली की अरविन्द केजरीवाल सरकार ने दूसरी बार सत्ता में आने के बाद दिल्ली का बजट पेश कर दिया है। विपक्ष भाजपा और अन्य दलों ​के विरोध के बावजूद आम आदमी पार्टी अपने शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास के काम के दम पर लोगों का विश्वास जीतने में सफल रही। शानदार विजय हासिल करने के बाद आप पार्टी ने इन्हीं मुद्दों पर फिर से काम करना शुरू कर दिया है, इसका प्रमाण है दिल्ली सरकार का बजट। 

दिल्ली के बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन पर काफी जोर दिया गया। बजट में शिक्षा के लिए बजट का 24.3 प्रतिशत हिस्सा दिया गया। शिक्षा के लिए 15,815 करोड़ का प्रावधान किया गया है। यह धनराशि कुल बजट का एक चौथाई हिस्सा है। दिल्ली सरकार देश की पहली ऐसी सरकार है जिसने शिक्षा पर इतनी अधिक धनराशि का प्रावधान किया है। 

इसमें कोई संदेह नहीं कि आप सरकार ने दिल्ली में शिक्षा आैर स्वास्थ्य के क्षेत्र में काफी काम किया है और यह काम दिखाई भी ​देता है। दिल्ली के सरकारी स्कूलों का न केवल स्वरूप बदला है बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है। यद्यपि इस बार के केन्द्रीय बजट में ​वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने शिक्षा प्रणाली में सुधार की अनेक घोषणाएं करते हुए इस मद में 99 हजार 300 करोड़ का प्रावधान किया था। 

देश में सरकर शिक्षा पर जीडीपी के ढाई फीसदी से थोड़ा ज्यादा ही खर्च कर रही है। दुनिया भर के छोटे-छोटे देश भी ​शिक्षा पर अपनी कुल जीडीपी का 6 फीसदी से अधिक खर्च कर रहे हैं। वर्ष 2019-20 में देश का बजट 27 लाख 86 हजार 349 करोड़ रुपए था जबकि चीन दस महीने में ही शिक्षा पर 29.58 लाख करोड़ खर्च कर चुका था। 

अमेरिका का शिक्षा बजट 64 अरब डालर यानी 4.56 लाख करोड़ रुपए का है। भारत में शिक्षा का व्यवसायीकरण जिस ढंग से हुआ उससे शिक्षा अधिक से अधिक धन कमाने का माध्यम बन गई। प्रतियोगी परीक्षाओं की बाढ़ आ गई। शिक्षा लोगों के शोषण का हथियार बन गई। ऐसे में आम आदमी के लिए अपने बच्चों को महंगे निजी स्कूलों में दाखिला दिलवाना भी दूभर हो गया। 

हर साल बच्चों के दाखिलों के लिए अभिभावकों को संग्राम लड़ना पड़ता है। आप सरकार ने इस दिशा में प्रयास किया  कि सरकारी स्कूलों का स्तर इतना बढ़ा दिया जाए कि निजी स्कूलों से उनका अंतर खत्म हो जाए। अभी इस दिशा में काफी काम किया जाना बाकी है। दिल्ली के बजट में 17 नए स्कूलों का निर्माण किया जाएगा। 

नई कक्षाओं का ​निर्माण कार्य तो चल ही रहा है। सरकारी स्कूलों में डिजिटल कक्षाओं की व्यवस्था की जाएगी। स्कूलों की कमी को काफी हद तक पूरा किया जाएगा। आप सरकार ने स्वास्थ्य के लिए 7,704 करोड़ का आवंटन किया है। 724 करोड़ की लागत से नए अस्पतालों का निर्माण किया जाएगा। 

दिल्ली सरकार ने केन्द्र की आयुष्मान योजना को भी लागू करने का फैसला किया है। कुछ और मोहल्ला क्लीनिक खोलने के लिए 365 करोड़ का आवंटन किया गया है। आप सरकार की मोहल्ला क्लीनिक योजना को दु​निया भर में सराहा गया था। कोरोना वायरस से लड़ने के लिए भी धनराशि का आवंटन किया गया है। अगर हम देश के बुनियादी स्वास्थ्य ढांचे को देखें तो स्थिति असंतोषजनक नहीं है। 

नेशनल हैल्थ सर्वे की ​रिपोर्ट के मुताबिक देश में करीब 1.17 लाख सरकारी डाक्टरों की उपलब्धता है अर्थात दस हजार से ज्यादा लोगों पर एक ही डाक्टर उपलब्ध है। ग्रामीण भारत में यह औसत 26 हजार लोगों पर एक डाक्टर की है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात जैसे बड़े राज्यों में डेढ़ लाख लोगों के लिए एक अस्पताल ही उपलब्ध है। 

आप सरकार पहले आयुष्मान योजना का विरोध कर रही थी लेकिन स्थिति की गम्भीरता को देखते हुए उसने इस योजना को लागू करने का उचित फैसला लिया है। दिल्ली में सबसे बड़ी समस्या सार्वजनिक परिवहन की है। उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री मनीष सिसोदिया ने बुनियादी संरचना परियोजनाओं के लिए और परिवहन सेवाओं के लिए आवंटन में 73 फीसदी की बढ़ौतरी की है। 

चार हजार नई बसों की खरीद की जा रही है। इलैक्ट्रिक वाहन कोष के लिए सौ करोड़ का प्रावधान किया है। अन​धिकृत कालोनियों के विकास कार्यों के ​लिए पर्याप्त धनराशि दी गई है। इसके अलावा राज्य सरकार की महिलाओं की मुफ्त बस यात्रा, बिजली-पानी पर सब्सिडी की योजनाएं जारी रहेगी। 

राष्ट्र के संचालन के लिए राष्ट्रीय नीतियों की जरूरत होती है, उसी तरह राज्य को चलाने के ​िलए राज्य के लोगों की जरूरतों के अनुसार नीतियों और कार्यक्रमों की जरूरत होती है। इस दृष्टि से देखा जाए तो आप सरकार का बजट आम आदमी का बजट महसूस होता है। 

लोक कल्याणकारी राज्य वह होता है जो अपने नागरिकों के लिए व्यापक समाज सेवाओं की व्यवस्था करता है। लोक कल्याणकारी राज्य वह होता है जो अपने नागरिकों के जीने लायक व्यवस्था करता है और आप की यथासम्भव समानता स्थापित करता है। दिल्ली सरकार के बजट से भविष्य में महानगर के लोगों का जीवन सहज होगा, इसकी उम्मीद की जानी चाहिए। लोकतंत्र और लोक कल्याणकारी राज्य एक-दूसरे के अनुकूल और परस्पर पूरक ही है।

-आदित्य नारायण चोपड़ा