BREAKING NEWS

Top 20 News - 17 June : आज की 20 सबसे बड़ी ख़बरें ◾बैंकों ने जेट एयरवेज को फिर खड़ा करने की कोशिश छोड़ी, मामला दिवाला कार्रवाई के लिए भेजने का फैसला ◾लोकसभा में साध्वी प्रज्ञा के शपथ लेने के दौरान विपक्ष ने किया हंगामा ◾ममता बनर्जी और डॉक्टरों की बैठक को कवर करने के लिए 2 क्षेत्रीय न्यूज चैनलों को मिली अनुमति◾बिहार : बच्चों की मौत मामले में हर्षवर्धन और मंगल पांडेय के खिलाफ मामला दर्ज◾वायनाड से निर्वाचित हुए राहुल गांधी ने ली लोकसभा सदस्यता की शपथ◾सलमान को झूठा शपथपत्र पेश करने के केस में राहत, कोर्ट ने राज्य सरकार की अर्जी खारिज की◾भागवत ने ममता पर साधा निशाना, कहा-सत्ता के लिए छटपटाहट के कारण हो रही है हिंसा ◾लोकसभा में स्मृति ईरानी के शपथ लेने पर सोनिया गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने किया अभिनंदन ◾डॉक्टरों और ममता बनर्जी के बीच प्रस्तावित बैठक को लेकर संशय◾डॉक्टरों की देशभर में प्रदर्शन, महाराष्ट्र में 40,000 डॉक्टर हड़ताल पर ◾डॉक्टरों की सुरक्षा की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कल : सुप्रीम कोर्ट ◾17वीं लोकसभा का पहला सत्र प्रारंभ, PM मोदी सहित नवनिर्वाचित सांसदों ने ली शपथ ◾संसदीय लोकतंत्र में सक्रिय विपक्ष महत्वपूर्ण, संख्या को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं : PM मोदी ◾वर्ल्ड कप में भारत की पाकिस्तान पर सबसे बड़ी जीत, लगा बधाईयों का तांता, अमित शाह ने बताया एक और स्ट्राइक ◾IMA की हड़ताल में शामिल होंगे दिल्ली के अस्पताल, AIIMS ने किया किनारा ◾ममता आज सचिवालय में जूनियर डॉक्टरों से करेंगी बैठक◾विश्व कप 2019 Ind vs Pak : भारत ने पाकिस्तान को डकवर्थ लुइस नियम के तहत 89 रन से रौंदा◾IMA के आह्वान पर सोमवार को दिल्ली के कई अस्पतालों में नहीं होगा काम ◾सभी वर्गों को भरोसे में लेकर करेंगे सबका विकास : PM मोदी◾

संपादकीय

हदें पार करती हैवानियत!

अलीगढ़ जिला के टप्पल इलाके में ढाई साल की मासूम बालिका की जिस वहशियत से हत्या की गई उससे तो बड़े से बड़े पत्थर दिल वाले लोगों के भी आंसू छलक पड़े। जरा सोचिए मासूम बच्ची की तुतलाती जबान रहम की भीख भी नहीं मांग पाई होगी कि दरिंदों ने हैवानियत की सारी हदें पार करते हुये उसकी हत्या कर दी। उसे तेजाब डालकर जलाया गया और अंग तोड़े गये। इससे पहले कठुआ (जम्मू) में भी इसी तरह मासूम बालिका की हत्या की गई थी। 

पुलिस कह रही है कि बच्ची के साथ दुष्कर्म नहीं किया गया लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट का कहना है कि बच्ची का शव इतना गल चुका है कि इस बात का पता लगाना बहुत मुश्किल होगा कि उसके साथ हैवानों ने दुष्कर्म किया या नहीं। देश सदमे में है, लोगों को आश्चर्य हो रहा है कि कोई चंद हजार रुपये के उधार के लिये मासूम बच्ची के साथ ऐसा कैसे कर सकता है। तो क्या यह मान लिया जाये कि यह हत्या केवल उधार के पैसे को लेकर प्रतिशोध के तौर पर की गई है। पूरे देशभर से ऐसी विकृत मानसिकता वाले हत्यारों को फांसी पर चढ़ाने की मांग उठ रही है। पकड़े गये दो हत्यारों में से एक पर पहले ही अपनी बेटी से दुष्कर्म का मामला चल रहा है। जब भी कोई हैवानियत भरी घटना होती है तो चंद लोग बोलते हैं और कुछ दिनों बाद सब सामान्य हो जाता है। 

दुनिया चलाने के लिये हर समाज में कुछ न कुछ नियम कानून स्थापित किये गये हैं। अगर कोई व्यक्ति इन नियमों और कानूनों का उल्लंघन करता है तो उसे असामाजिक कहा जाता है। मनोविकार की प्रवृतियों की परिभाषा काफी हद तक इस शब्द असामाजिक से ही प्रभावित है। समाज में गुस्साजनित समस्यायें पहले से कहीं अधिक बढ़ रही हैं। यहां राह चलते अंजान लोगों से जरा सी बात पर हिंसा होना, कार टच भी हो जाये तो हत्यायें कर दी जाती हैं। बलात्कार हो रहे हैं, कभी एक तरफा प्रेम में तो कभी प्रेम में असफल रहने पर बदले की भावना से हत्यायें की जा रही हैं। ये सब घटनायें इस ओर इशारा करती हैं कि हम एक बीमार समाज का अंग बन चुके हैं जिसमें कोई सुरक्षित नहीं।

 अलीगढ़ की घटना को साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिशें जारी हैं लेकिन सवाल यही है कि मासूम को इन्साफ कब मिलेगा। हैवानियत की घटनायें केवल उत्तर प्रदेश में ही नहीं हो रहीं, ऐसी घटनायें तो अन्य राज्यों में भी हो रही हैं। जब निर्भया कांड हुआ था तो देशभर में आक्रोश उमड़ पड़ा था। तब भी देश का नेतृत्व कहीं नजर नहीं आया था। लोगों के आक्रोश को शांत करने के लिये नेतृत्व ने सामने न आकर घरों में दुबक कर बैठना ही उचित समझा। पुलिस, न्याय व्यवस्था और सरकार आम लोगों के निशाने पर थीं। अलीगढ़ की शर्मसार और सहमा देने वाली घटना के बाद उपजे जनाक्रोश के बीच भी नेतृत्व कहीं नजर नहीं आया। 

पुलिस तो पूरी तरह असंवेदनशील हो चुकी है। कोई अपनी फरियाद लेकर जाये तो सुनती कहां है। अगर उसने बच्ची के लापता होने की सूचना मिलते ही कार्रवाई की होती तो संभवतः बच्ची की जान बच सकती थी। अफसोस! उत्तर प्रदेश की पुलिस ने समय रहते कार्रवाई नहीं की। मामला उछला तो 5 पुलिसकर्मी निलंबित कर दिये गये हैं। पुलिस अब बदनामी के डर से फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। जब नेतृत्व कहीं दिखाई न दे और पुलिस असंवेदनशील हो जाये तो फिर अपराधियों को कानून का खौफ कहां रहेगा। सामाजिक जनांदोलन के बावजूद निर्भया के हत्यारों को आज तक फांसी नहीं हुई है तो फिर हम कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि अपराधियों के मन में कोई खौफ पैदा होगा। उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था बड़ा मुद्दा है। 

सत्ता में योगी आदित्यनाथ सरकार के आने के बाद अपराधी तत्वों पर लगाम लगाने के लिये मुठभेड़ें भी हुईं लेकिन आम जनता के प्रति पुलिस के व्यवहार में जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं आया। बदलाव आये भी कैसे जब भाजपा सांसद साक्षी महाराज सीतापुर की जिला जेल में बंद बलात्कार के आरोपी बांगरमऊ सीट से भाजपा विधायक कुलदीप सेंगर से मिलने जेल जाएं और चुनाव के बाद उनका धन्यवाद करें। साल भर पहले उन्नाव रेप कांड ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं। हैरानी हुई कि साक्षी महाराज उसका किस बात के लिये धन्यवाद करने गये थे।

 उलटा इस मुलाकात को साक्षी महाराज निजी मामला बता रहे हैं। उनके समर्थक भी इसे यह कहकर नजरदांज कर रहे हैं कि कुलदीप सेंगर अभी आरोपी हैं, दोषी नहीं। जब जनप्रतिनिधि ही बलात्कार के आरोपियों से मिलने जेल में जायेंगे तो अपराधियों के हौसले बुलंद होंगे ही। इसका संदेश बहुत विपरीत गया है। दरअसल इस तरह की घटनाओं की जड़ में जाने की जरूरत है। पुलिस सड़कों व सार्वजनिक स्थानों पर और सतर्कता बरत सकती है लेकिन आखिर इन घटनाओं के लिये कौन जवाबदेह है जिसमें छोटी-छोटी बच्चियों से परिचित अथवा रिश्तेदार ही दुष्कर्म करते हैं। आखिर इस मानसिकता में बदलाव कौन लायेगा क्योंकि सामाजिक ताने-बाने में कहीं किसी बड़ी कमजोरी ने घर कर लिया है और उसे दूर करने का प्रयास कोई नहीं कर रहा। दुष्कर्म की घटनाओं पर आक्रोश की अभिव्यक्ति उचित है लेकिन यदि समाज की सोच बदलने का काम नहीं किया जाता और पुलिस और न्याय व्यवस्था संवेदनशील नहीं बनती तो स्थितियों में कोई सुधार नहीं होगा।