अमेरिका में हुए मध्यावधि चुनाव के नतीजों पर रूस, चीन, भारत सहित पूरे यूरोप की नजरें लगी हुई थीं और अनुमान के मुताबिक इन चुनावों में यद्यपि सीनेट में डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत बरकरार रहा है लेकिन निचले सदन यानी हाउस आफ रिप्रजेंटेटिव में डैमोक्रेटिक पार्टी को बहुमत मिल चुका है। डैमोक्रेटिक पार्टी के लिए यह चुनाव किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं थे। इससे पूर्व दोनों सदनों में ट्रंप की ​रिपब्लिकन पार्टी का कब्जा था। स्पष्ट है कि संसद के दोनों सदनों में बहुमत होने की वजह से डोनाल्ड ट्रंप का कोई भी फैसला संसद द्वारा रोका नहीं जाता लेकिन मध्यावधि चुनावों के बाद स्थिति बदल चुकी है। यह चुनाव ट्रंप के अब तक के शासनकाल की कारगुजारी पर एक जनादेश माना जा रहा है। अब डोनाल्ड ट्रंप के लिए अपने बचे हुए कार्यकाल में राह आसान नहीं होगी। उनके काम पर जनता ने अपनी राय दे दी है इसलिए रिपब्लिकन पार्टी की हार का ठीकरा भी ट्रंप के सिर पर ही फोड़ा जाएगा। निश्चित रूप से ट्रंप पर दबाव बढ़ेगा। मध्यावधि चुनाव मेें डैमोक्रेटिक पार्टी के पक्ष में लहर पहले ही दिखाई दे रही थी।

2016 के चुनाव में युवा वर्ग बड़ी संख्या में ट्रंप के पक्ष में था वहीं इन चुनावों में युवा वर्ग डैमोक्रेटिक पार्टी के समर्थन में खड़ा दिखाई दिया। युवा वर्ग ट्रंप प्रशासन से निराश हो चुका है। अमेरिका के कई शहरों में एक के बाद गोलीबारी की घटनाएं हुईं जिनमें अनेक लोग मारे गए। युवा वर्ग ट्रंप प्रशासन से बंदूक कल्चर पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहा था। सर्वविदित है कि अमेरिका में बंदूकें खिलौनों की तरह बिकती हैं और इस पर कोई कानूनी प्रतिबंध नहीं। बंदूक रखना वहां आत्मसम्मान का प्रतीक माना जाता है लेकिन कोई न कोई सिरफिरा इन बंदूकों का इस्तेमाल कर लोगों को मौत के घाट उतार देता है। अमेरिका के कई शहरों में छात्र-छात्राओं ने बंदूक संस्कृति पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर रैलियां भी निकाली थीं। उनका कहना था कि अगर बंदूक संस्कृति पर प्रतिबंध नहीं लगाया तो वह डैमोक्रेटिक पार्टी को वोट देंगे। चुनाव नतीजों से स्पष्ट है कि युवा वर्ग का वोट डैमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवारों को मिला है। इन चुनावों की खास बात यह रही कि अधिकांश महिलाएं भी डैमोक्रेटिक पार्टी के पक्ष में नजर आईं।

राष्ट्रपति चुने जाने के बाद एक दर्जन से भी ज्यादा महिलाओं ने डोनाल्ड ट्रंप पर यौन शोषण के आरोप लगाए और ट्रंप अपने वकीलों के माध्यम से उनसे समझौते भी करते रहे हैं। हद तो तब हो गई जब ट्रंप ने यौन उत्पीड़न के आरोपों से घिरे ब्रेट कैबनो को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की शपथ दिलाई जा रही थी तो महिलाएं सुप्रीम कोर्ट के बाहर प्रदर्शन कर रही थीं। महिलाओं ने सामने आकर ट्रंप की पार्टी के खिलाफ माहौल बनाना शुरू कर दिया था। अपने विरोध में माहौल को देखते हुए रिपब्लिकन पार्टी के 37 उम्मीदवारों ने दोबारा चुनाव लड़ने से इन्कार कर दिया था। इस बार काफी महिलाएं भी जीतकर अमेरिकी कांग्रेस में पहुंची हैं। डैमोक्रेटिक पार्टी की अलेक्जेंडरिया कोर्टेज न्यूयार्क से चुनी गई हैं। उनकी आयु केवल 29 वर्ष है। इसका मतलब वह अमेरिकी कांग्रेस में सबसे कम उम्र की प्रतिनिधि होंगी। मध्यावधि चुनाव में पहली बार दो मुस्लिम महिलाएं इल्हान उमर आैर राशिदा तालिब ने जगह बनाई है। कैंसस से डैमोक्रेटिक पार्टी की शाराइस डेल्डिस और न्यू मैक्सिको से डेब्रा हालांद उत्तरी दक्षिणी अमेरिका और कैरेबियाई द्वीप मूल की महिला हैं, भी पहली बार चुनी गई हैं। यद्यपि ट्रंप ने चुनाव नतीजों पर ट्वीट करके कहा है कि 105 वर्षों के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी ने राष्ट्रपति पद पर रहते सीनेट में बहुमत हासिल किया हो।

ट्रंप ने दावा किया कि उनका जादू बरकरार है जबकि पूरा मीडिया उनके खिलाफ था और हर दिन हमला बोलता था। ट्रंप लाख दावे करते रहें लेकिन इन चुनावों के बाद वह कमजोर हुए हैं। हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स की सभी कमेटियों में डैमोक्रेटिक पार्टी का दबदबा होगा जिनका काम ही राष्ट्रपति के फैसलों की समीक्षा करना होता है। ट्रंप को विधेयक पारित कराने में अपनी सियासत का चेहरा बदलना होगा।
माना जा रहा है कि डैमोक्रेटिक पार्टी के बहुमत में आने के बाद प्रतिनिधि सभा 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में रूस के दखल, ट्रंप के कर चुकाने से जुड़े केसों और ट्रंप के वकील द्वारा उनके खिलाफ किए गए रहस्योद्घाटनों की जांच के आदेश दे सकती है। डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ ऐसे कई मामले हैं जिनके आधार पर उनके खिलाफ महाभियोग चलाया जा सकता है क्योंकि सीनेट में डैमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत नहीं है इसलिए ऐसा होना मुश्किल है। अब सनकी डोनाल्ड ट्रंप शायद ही दोबारा राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने की सोचें क्योंकि भले ही उन पर कोई फर्क पड़े या नहीं लेकिन उनकी पार्टी की छवि को जबर्दस्त आघात लग चुका है।