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संपादकीय

किसान और मोदी सरकार-2

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूसरी बार बनी सरकार ने मंत्रिमंडल की पहली बैठक में देश के किसानों को बड़ा तोहफा दिया है। पीएम किसान योजना का लाभ अब सभी किसानों को मिलेगा। केन्द्र सरकार ने 6 हजार रुपए सभी किसानों को देने का वादा पूरा कर दिया है। इसके तहत 14.5 करोड़ किसान परिवारों को फायदा होगा। भारतीय जनता पार्टी ने संकल्प पत्र में किसान सम्मान निधि योजना का दायरा बढ़ाने का वादा किया था। इसके अलावा किसानों, छोटे दुकानदारों के लिए 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर पैंशन योजना की शुरूआत करने का फैसला किया गया है। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बार-बार किसानों की आय दोगुनी करने का अपना संकल्प दोहराते रहे हैं। दरअसल आज के दौर में कृषि क्षेत्र घाटे का सौदा बन चुका है। केन्द्र सरकारों द्वारा लगातार पैकेज देने और ऋण माफ करने के बावजूद किसानों की आत्महत्याओं का सिलसिला रुक नहीं पा रहा है। कभी सूखा तो कभी अतिवृष्टि और कभी बेमौसमी वर्षा, नुक्सान हमेशा किसान का होता है। प्राकृतिक आपदाओं में भी खड़ी फसल तबाह हो जाती है। इस कारण किसानों की मासिक आमदनी बहुत कम रहती है। इसमें कोई संदेह नहीं कि खेती-बाड़ी नाजुक दौर में है। 

हर बार पैकेज दे दिया जाता रहा। अक्सर यह मान लिया जाता है कि संकट के समय पैकेज पर्याप्त होता है लेकिन कोई भी महसूस नहीं करता। हर बार का संकट किसान की आर्थिक शक्ति को कुछ वर्ष पीछे धकेल देता है। जब तक किसान की मासिक आमदनी नहीं बढ़ाई जाती तब तक किसानों के खुशहाल होने की कल्पना भी नहीं की जा सकती। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार द्वारा सभी किसानों को हर वर्ष 6 हजार रुपए देना उनकी आमदनी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। नरेन्द्र मोदी सरकार ने किसानों को उपज के वाजिब दाम दिलाने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ौतरी भी की थी लेकिन किसानों को हमेशा शिकायत रहती है कि उन्हें उनकी उपज के वाजिब दाम नहीं मिलते। 

एक सरकारी क्लर्क को कम से कम 15-20 हजार वेतन मिलता है लेकिन किसानों की औसत मासिक आय निर्धारित न्यूनतम वेतन से भी कम है। मोदी सरकार की योजना से किसानों को कम से कम इस बात की राहत है कि मौसमी चक्र में परिवर्तन के चलते होने वाले नुक्सान के बाद उनके पास बीज और खाद के लिए पैसों की कमी नहीं रहेगी। सबसे बड़ा सवाल यह है कि किसानों की आय को बढ़ाने के लिए कौन-कौन से उपाय किए जाएं। जब देश में हरित क्रांति हुई थी तो पंजाब ऐसा राज्य रहा जिसने कृषि क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 

पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों, उस दौर के राजनीतिज्ञों की दूरदर्शिता और किसानों की मेहनत रंग लाई थी। भारत के लोगों ने अपनी खेती को और बाजारों को अपनी ही लगन से विकसित किया है। उनके पास वे सारी खूबियां और ताकत है जो सरकंडों में रस भरकर गन्ना पैदा कर सकती है और चावलों में विभिन्न सुगन्ध भरकर उन्हें बढ़िया बासमती बना सकती है। जरूरत है हमें नई-नई प्रौद्योगिकी अपनाने की। अब तो हमें मौसम की सटीक जानकारी मिल जाती है। समस्या यह है कि किसान परम्परागत ढंग से उसी की खेती करते हैं जिनके न्यूनतम समर्थन मूल्य तय होते हैं।

देश में जल संकट को देखकर उन्हें अब ऐसी फसलें उगानी चाहिए जो कम पानी से और जल्दी हो जाती हैं। इसके लिए कई दक्षिण भारतीय राज्यों के मॉडल को अपनाया जा सकता है। मौसमी चक्र में परिवर्तन को देखते हुए वह अपना फसली चक्र बदल सकते हैं। जब देश में दालों का संकट काफी बढ़ गया था तब वित्तमंत्री के रूप में प्रणव मुखर्जी ने किसानों के लिए विशेष रियायतें देने का ऐलान किया था। पूर्वी राज्यों में कृषि उत्पादन बढ़ाने की योजना की शुरूआत की गई थी। उसके बाद देश में दालों का इतना उत्पादन बढ़ा कि आयात की जरूरत ही बहुत कम रह गई। 

भारत की प्रगति का राज गांव के किसान की तरक्की में छिपा हुआ है। किसानों के बड़े नेता चौधरी चरण सिंह कहा करते थे कि यह देश तब तरक्की करेगा जब किसान का बेटा इंजीनियर, डाक्टर, उद्यमी और आईएएस बनेगा मगर ऐसा तभी होगा जब किसान की आमदनी बढ़ेगी। आमदनी तभी बढ़ेगी जब एक तरफ आधुनिक तकनीक से वह अपनी पैदावार बढ़ाए, उन्हें वाजिब कीमत ​मिले, साथ ही कृषि से जुड़े खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा दिया जाए। पशुपालन, डेयरी, पोल्ट्री फार्म उद्योग को भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। किसानों को भी खेती के साथ इससे जुड़े हुए व्यवसायों को अपनाना चाहिए।

पहले सरकारी कृषि अनुदानों का उपयोग किसानों से ज्यादा गैर किसान करते थे अब तो धन सीधे किसानों के बैंक खातों में पहुंच जाता है। भारत में ऐसे कई लघु उद्योग हैं जिनसे किसान जुड़ सकते हैं। कृषि मंत्रालय और देशभर में संचालित कृषि केन्द्रों को खेती पर गुणवत्ता वाली माॅनिटरिंग रखनी होगी और समय-समय पर किसानों को परामर्श देना होगा। भारत की उर्वरायुक्त भूमि में अच्छी उपज कर हम हरेक फसलों का निर्यात बहुतायत में कर सकते हैं। प्रधानमंत्री किसान निधि योजना एक तरह से यूनिवर्सल बेसिक इन्कम स्कीम की तरह है जिसका प्रयोग सफल रहा है। 

नरेन्द्र मोदी सरकार-2 ने किसानों को राहत देकर यह संकेत दे दिया है कि वह कृषि को फायदे के व्यवसाय में बदलने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगी। किसान की आय बढ़ेगी तो वह बाजार में खरीदारी करेगा, खरीदारी करेगा तो उत्पादन बढ़ेगा। बाजार फले-फूलेगा तो अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। मानसून की कमी के चलते देश में जल संकट चुनौती बनकर खड़ा है, ऐसी स्थिति में कृषि मंत्रालय काे अभी से ही तैयार रहना होगा।