है कोई मोदी का तोड़!


दुनिया के नक्शे पर इस समय भारत की सियासत की चर्चा है। यह किसी नकारात्मक रूप में नहीं बल्कि सकारात्मक पहलू के साथ भारत का जिक्र ताकतवर देश कर रहे हैं। यह सब इसलिए संभव है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वर्किंग स्टाइल न केवल जमीन से जुड़ा हुआ है बल्कि वह जो कुछ सोचते और करते हैं वह राष्ट्रीयता से जुड़ा हुआ है। राष्ट्रीयता का मतलब देश के लोगों का हित और विकास, मतलब नागरिकों को अहसास हो कि सरकार जो कर रही है वह हमारे लिए है। इस सबके बावजूद प्रधानमंत्री मोदी अपने कैबिनेट की भी परख करते रहते हैं। इसी कड़ी में उन्होंने पिछले दिनों एक फेरबदल किया जिसके तहत उन्होंने बड़ी चतुराई से कुछ मंत्रियों को हटाकर संगठन में शामिल करने का मन बनाया है तो कुछ को नई जिम्मेवारियां भी दी हैं। इस काम को अंजाम देने के बाद मोदी चीन चले गए ताकि वहां ब्रिक्स सम्मेलन में पिछले दिनों से फन उठा रहे ड्रेगन की खबर ली जा सके।

बात खबर लेने की हो रही है तो कैबिनेट की चर्चा पहले करते हैं और इसमें सबसे अहम है वह रक्षा मंत्रालय जिसकी जिम्मेदारी उन्होंने निर्मला सीतारमण को दी है। इस मामले में मोदी का नजरिया सबसे अलग है। वह परफार्मेंस और परिणाम को तबज्जो देते हैं। उन्होंने एक जूनियर मंत्री को देश का भारी भरकम महकमा देकर यह संदेश दिया कि जिस व्यक्ति में क्षमता-योग्यता है वह देश के लिए बड़े काम कर सकता है। यह बात अलग है कि काम छोटा या बड़ा नहीं होता। पर फिर भी मोदी का दृष्टिकोण स्पष्ट है कि काम करने की ललक होनी चाहिए।

भाजपा की टीम में जिस प्रकार से अमित शाह ने मोर्चा बांध रखा है और जिस कड़ी में खुद पीएम मोदी अपने सहयोगियों अरुण जेटली, राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज, एन.एस.ए. अजीत डोभाल काम कर रहे हैं तो सचमुच आंतरिक, बाह्यï और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हर चीज फिट बैठती है, इसी का नाम राष्ट्रीयता है जिसे मोदी कर्तव्य परायणता के साथ निभाते हैं। दरअसल भाजपा ने 2019 के चुनावों को लेकर अपना मिशन &50 पहले से ही तैयार कर रखा है। दो साल पहले से ही अगर लोकसभा चुनावों की तैयारी हो रही है तो इसे क्या कहेंगे? इसे एक अच्छा नेतृत्व और अ’छी योजना कह सकते हैं, जो विपक्ष के पास नहीं है। योजना वही बनाता है, मिशन वही रखता है जो कुछ करना चाहता है। सचमुच सरकार बहुत कुछ करना चाहती है इसीलिए लोग उससे उम्मीद कर रहे हैं। यही मोदी सरकार का संदेश है।

यह पार्टी का अंदरूनी मामला है कि किसको क्या बनाया जाये और किससे क्या लिया जाए लेकिन एक बात बड़ी पक्की है कि उन्होंने विभागों का जिस तरह से बंटवारा किया है वह बिल्कुल सही और सटीक है। इसे न केवल देशवासी स्वीकार करेंगे बल्कि पार्टी का थिंक टैंक भी मानता है।

दरअसल पीएम ने साफ कह रखा है कि राष्ट्रीय विकास तभी होगा जब एक स्थिर सरकार हो। मोदी सरकार को आए अभी तीन वर्ष हुए हैं और तीन वर्ष में उसने वह सब कुछ कर दिखाया जिसका लोग इंतजार कर रहे थे। एक भी मंत्री पर किसी किस्म के भ्रष्टाचार का आरोप नहीं, यह सफलता तो है बल्कि एक विश्वास है जो लोगों के दिलों में है। लोगों ने नोटबंदी को स्वीकार किया, जीएसटी को स्वीकार किया तो इसका मतलब यही है कि सरकार जो कर रही है वह उनके हित में ही कर रही है। जिस भ्रष्टाचार को लेकर भारत दुनिया में बदनाम था उस भ्रष्टाचार को लेकर मोदी अब किसी को बख्श नहीं रहे। जिस कालेधन की और कालेधन के मालिकों की चर्चा स्विस बैंकों तक होती थी उसे लेकर मोदी ने अपने मैनिफेस्टो में कालेधन के चोरों से निपटने का वायदा किया। लोग जानते हैं और मान रहे हैं कि मोदी ने वायदा निभाया है इसीलिए लोगों का विश्वास बढ़ता जा रहा है।

सबसे बड़ी बात नागरिकों की सुरक्षा और सुरक्षा नीति की है। हमारे देश ने आतंकवाद को लेकर सबसे बड़ी मार झेली है और इस आतंकवाद ने पूरी दुनिया के बड़े देशों तक को अपनी जद में लिया है। यह अहसास प्रधानमंत्री ने अपनी विदेश यात्राओं के दौरान कराया तभी तो पूरी दुनिया मोदी के साथ है और आतंकवाद के मुद्दे पर न सिर्फ पाकिस्तान बेनकाब हुआ है बल्कि उसके आका चीन को भी मुंह की खानी पड़ी है। यह सब कुछ अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर हुआ है। आगे भी ऐसा ही होगा, यह बात लोग मानते हैं।

अब एक ओर विपक्ष की बात करते हैं जो कि इस समय नेतृत्वविहीनता की स्थिति में है। देश में अब कंप्यूटर और टैक्रोलॉजी का युग है। मोदी ने देश को डिजीटल स्वरूप दिया है और मेक इन इंडिया का आह्वान किया है, ऐसे में विपक्ष चाहे वह कांग्रेस हो या अन्य दल, उन्हें कुछ सूझ ही नहीं रहा कि क्या किया जाए। थोथे आरोप लगाकर राजनीति नहीं चल सकती। इस मामले में मोदी धड़ल्ले से चल रहे हैं। दरअसल इसकी वजह है। विपक्ष के पास कोई नीति नहीं जबकि भाजपा की नीयत और नीति दोनों साफ हैं।

यद्यपि आरएसएस रणनीति बनाने का काम करती है परंतु सरसंघ चालक मोहन भागवत जो काम करते हैं, वे भी न केवल राष्ट्रीयता से जुड़े हैं बल्कि उनमें संस्कार भी नजर आते हैं और यह सब सरकार के कामकाज में परिलक्षित होते हैं। इसी का नाम मोदी सरकार है जो इस वक्त धड़ल्ले से चल रही है। अगले चुनाव और उससे अगले चुनाव तक भी मोदी सरकार बुलेट ट्रेन की तरह आगे बढ़ेगी और लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरती रहेगी, ऐसा हम नहीं लोग कहते हैं।