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संपादकीय

It’s My Life (40)

किरण चोपड़ा ने बचपन और छात्र जीवन में एक सपना देखा था कि बड़े होकर वह अपना ज़्यादातर समय बुजुर्गों की सेवा और सहायता में लगाएंगी। जिन लोगों ने अपना सारा जीवन घर परिवार और समाज को दिशा देने, ऊंचा उठाने, खुशहाल बनाने में होम कर दिया कि वे उम्र की संध्या-बेला में हताश-निराश, असहाय, अकेले न रह जाएं, जिन बच्चों की सफलता और उन्नति के लिए अपना सब कुछ दाव पर लगा दिया, उन्हीं के द्वारा वे उपेक्षित न कर दिए जाएं। किरण जी ने संकल्प किया कि वह बुजुर्गों को हंसते-हंसते जीना सिखाएंगी, उनमें आत्मविश्वास, मज़बूती और हौसला पैदा करेंगी। उनमें वह इस भावना का संचार करेंगी कि वे कह सकें कि हम किसी से कम नहीं।

वरिष्ठ नागरिक केसरी क्लब स्थापित करने की कहानी भी बड़ी भावनात्मक और दर्दपूर्ण है। वर्ष 2003 में मैं और किरण अपने तीनों बच्चों आदित्य, आकाश और अर्जुन के साथ इंग्लैंड और अमेरिका घूमने गए। अमेरिका में मेरी एक बुआ और उनका परिवार न्यूयार्क स्टेट में रहते हैं। उनके तीन बच्चे हैं। हम सभी परिवार के लोग घूम-फिर रहे थे कि अचानक एक दिन किरण ने नई फरमाईश रख दी। उसने मेरी बुआ जो कि एक ‘Old Home’, अमेरिका में जहां वृद्धों को रखा जाता है उस स्थान को Old Home कहा जाता है, वहां अकाऊंट और इंश्योरेंस विभाग में नौकरी करती थी, से प्रार्थना की ​कि हम भी अमेरिका का Old Home देखना चाहते हैं। 

किरण के विचार तो शुरू से ही वृद्धजनों की सेवा करने के बारे में बने रहते थे। किरण ने थोड़े समय ही सही जो सेवा मेरे दादाजी की जालन्धर में और मेरे पिताजी जब दिल्ली आते थे तो उनकी सेवा की थी। उससे मैं भी बहुत प्र​भावित हुआ था और किरण की वृद्धों के प्रति सेवाभाव की इस जन्मजात प्रवृति ने मेरे अन्दर भी वृद्धों के प्रति सेवाभाव बढ़ा दिया था। बहरहाल मैं और किरण अपनी बुआ के लड़के के साथ अमेरिकी Old Home देखने गए। वहां का नजारा देखकर मैं और किरण सहम से गए। व्हील चेयरों पर पड़े 80 से 100 साल तक की उम्र के अमेरिकी वृद्धों के मुंह से लार टपक रही थी। इधर-उधर कपड़ों पर खाना खाते समय दाग पड़े थे। 

नर्स उनका मुंह साफ करती थी और वहीं बैठे-बैठे उन्हें पेशाब आदि करवाया जा रहा था। इस दृश्य ने मुझे और किरण को हिला दिया। मैं किरण से बोला अगर अमेरिका जैसे समृद्ध और पैसे वाले देश में जहां ये वृद्ध इंश्योरेंस के बल पर Old Home में आते हैं, उनकी यह हालत है तो हमारे भारत वर्ष जैसे गरीब मुल्क में जहां गरीबी ही गरीबी है, जहां युवा बच्चे अपने बुजुर्गों से उनकी सम्पत्तियां और पैसे अपने नाम करवा कर उन्हें घर से बाहर फैंक देते हैं, उन भारतीय असहाय और गरीब वृद्धाें की क्या हालत होती होगी? किरण की आंखों से अविरल आंसुओं की धारा बहने लगी।

फिर मैंने पंकज से पूछा ‘भाई ये वृद्ध लोग यहां इस ‘Old Home’ में क्या इस हालत में रहते हैं? पंकज का जवाब था ‘Brother they have come to these Old Home all over USA and now they are waiting for their death’ यानि पूरे अमेरिका में बने इन वृद्ध घरों में ये लोग आते हैं और इसी तरह इसी हालत में रहते हैं क्योंकि अपनी मौत का इंतजार कर रहे हैं। मैंने और किरण ने यह फैसला किया कि हम भारत में वृद्धों के लिए काम करेंगे लेकिन वृद्ध आश्रम नहीं बल्कि जब तक वो जीवित रहें उन्हें जीवन जीने का सम्पूर्ण आनंद मिले।

किरण ने मुझे एक बार बताया था कि स्वर्गवासी स्वामी गीतानन्द जी महाराज जो कि हमारे परिवार से बेहद प्रेम करते थे, उन्होंने लालाजी के नाम पर हरिद्वार में एक गऊशाला बनाई है जहां 24 घंटे लंगर चलता है। इसी तरह दिल्ली के राजेन्द्र नगर में एक वृद्ध आश्रम भी बनाया है। उनके जीवन के आखिरी पलों में जब मैं और किरण स्वामी जी से मिलने गए तो उन्होंने मुझे तो यह दायित्व दिया कि उनके बाद उनके द्वारा बनाई गई सभी गऊशालाओं, मंदिरों और आश्रमों को संभालने का कार्य मैं करूं और किरण से कहा कि तुम केवल मेरे द्वारा न्यू राजेन्द्र नगर के इस वृद्ध आश्रम की देखरेख करो। किरण अब भी कई बार स्वामी गीतानन्द जी के इस वृद्ध आश्रम में बुजुर्गों को मिलने जाती है। एक दिन किरण राजेन्द्र नगर के वृद्ध आश्रम से वापिस आई तो दिल खराब था। 

मैंने पूछा क्या हुआ तो किरण बोली- मैं वहां वृद्धों से मिली तो उन्होंने बताया कि किरणजी जिस दिन आप हमें देखने और मिलने आती हो तो उस दिन हमें खाना भी अच्छा मिलता है, आश्रम की सफाई भी होती है और हमें खीर खाने को मिलती है लेकिन बाकी दिन हमारा यहां कोई ख्याल नहीं रखता। किरण का दिल इन बातों से बेहद दुखी था। शायद इसीलिए वृद्ध आश्रम के ख्याल को छोड़कर हमने ‘वरिष्ठ नागरिक केसरी क्लब’ की स्थापना की। वृद्ध लोगों का क्लब जहां वे स्वच्छंद जीवन बिता सकें और उनके जीवन का अंतिम सफर आनंदमय हो। हमने तय किया कि बुजुर्गों को वृद्धाश्रम जाने की अंतिम बेचारगी से मुक्त करेंगे और उन्हें घर, बच्चों और परिवार में समूचे वजूद के साथ रहने की प्रेरणा से भर देंगे। इसके लिए बच्चों को भी अपनापन, रिश्तों का अहसास और मान-सम्मान देना होगा।

इसी संकल्प को पूरा करने के लिए हमने 15 वर्ष पूर्व ‘वरिष्ठ नागरिक केसरी क्लब’ की स्थापना की और बुजुर्गों के लिए समर्पित भाव से एक सार्थक अभियान चलाया जो बहुत ही सफल अभियान साबित हुआ। श्रीमती किरण चोपड़ा का सपना जिसने ‘वरिष्ठ नागरिक केसरी क्लब’ के रूप में आकार लिया और जिसे ‘वृद्ध केसरी रोमेश चन्द्र ट्रस्ट’ के रूप में स्थापित किया गया। यह अमर शहीद लाला जगत नारायण तथा अमर शहीद रोमेश चन्द्र जी की याद में स्थापित किया गया। वरिष्ठ नागरिक केसरी क्लब का उद्देश्य था कि सेवानिवृत वृद्धजनों के अन्दर आत्मविश्वास व अपनापन की भावना आए तथा वे अपने आप को अकेला तथा निराश न महसूस करें। 

उनके लिए एक ऐसा मंच जहां एक ही उम्र यानि 60 साल से 90 तक के लोग अपने विचारों का आदान-प्रदान करते हैं, वे अपने समय को खुशी से व्यतीत करें। इसके नाम के अन्त में ‘क्लब’ इसलिए जोड़ा गया ताकि यहां आने वाले वृद्धजनों में आत्मीयता तथा प्यार की भावना पनपे और वो इस उम्र में अपनी मृत्यु का इंतजार न करें। वे किसी से भी अपने आपको तुच्छ न समझें। किरण चोपड़ा जी ने यह क्लब बिना किसी भेदभाव, अमीर, गरीब, धर्म से ऊपर उठकर चलाया है। उनका मानना है कि सारी उम्र अपने परिवार, समाज, देश की सेवा के लिए इन्होंने अपना जीवन लगाया है तो उम्र के इस पड़ाव पर वे अपने आपको असहाय, अकेला न महसूस करें। 

किरण जी के अनुसार बच्चों और लड़कियों के लिए सब आगे आकर काम करते हैं परन्तु बुजुर्गों के लिए लोगों का दिल नहीं, न सहायता करने में आगे आते हैं क्योंकि वह बुजुर्ग आज हैं, कल नहीं। किरण जी युवकों को अहसास दिलाती हैं जहां तुम आज हो वहां कल तुम्हारे बुजुर्ग थे और जहां आज बुजुर्ग हैं वहां कल आप होंगे। उन्होंने बुजुर्गों के अनुभवों के साथ आशीर्वाद, जीवन संध्या, जिन्दगी का सफर, आज और कल, अनुभव और इंग्लिश में Blessings पुस्तकें लिखी हैं जो देश-विदेशों में चर्चित हैं। लोग अपनी फोटो के साथ दान राशि भेजते हैं औरTrust 80G के अधीन है। 24 घंटे हैल्पलाईन 9810107375 चलती है।

उन्होंने दुनिया में पहली बार गोद लेने की प्रथा बुजुर्गों में शुरू ​की कि जो बच्चे महंगाई या किसी कारण माता-पिता को वृद्ध आश्रम में रखना चाहते हैं उन्हें कहा जाता है कि हम उन्हें Adopt करते हैं, उनके खाने और दवाइयों का खर्चा हम देंगे जिससे बुजुर्ग अपने घरों में अपने बच्चों के साथ रह सकें। बहुत से घर जुड़ गये हैं। जरूरतमंद बुजुर्गों को हर महीने की 6 तारीख को आर्थिक सहायता और हैल्थ कैंप लगाये जाते हैं और अच्छे घरों के बुजुर्ग जो अकेले रह गये या सर्विस से रिटायर हो गये या जिनके बच्चे विदेशों में सैटल्ड हैं या बेटियां ही हैं और ब्याह कर चली गईं उनके लिए बहुत सी गति​विधियां कराई जाती हैं जैसे एक्टिंग, डांसिंग, फैशन शो, धार्मिक, सामाजिक कार्यक्रम, शायरी आदि। 

बुजुर्गों का फैशन शो अपने आप में एक अनूठा प्रयोग था जो कि बेहद सफल साबित हुआ। 23 ब्रांचों में अलग-अलग गतिविधियां होती हैं जहां उनमें आत्मविश्वास भरा जाता है कि आप किसी से कम नहीं हो। आप मर्यादा में रहकर लाइफ काे इन्जवाॅय करो। लाखों बुजुर्ग सदस्य हैं और सदस्यता निःशुल्क है। फैशन शो, धार्मिक स्थानाें और विदेशों की सैर कराई जाती है। मंशा यह है कि आओ चलेें उनके साथ जिन्होंने हमें अंगुली पकड़ कर चलना सिखाया है- 

कदमों की धूल नहीं माथे की शान हैं


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