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संपादकीय

मॉडल बनता मोहल्ला क्लीनिक

दिल्ली की सातों लोकसभा सीटों के परिणाम कुछ भी रहें लेकिन दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार द्वारा चलाई गई स्वास्थ्य योजना झारखंड से लेकर जम्मू-कश्मीर तक लोकप्रिय हो रही है। झारखंड सरकार ने शहरों की झुग्गी-बस्तियों में दिल्ली के मोहल्ला क्लीनिक की तर्ज पर क्लीनिक स्थापित करने की घोषणा की है जहां मरीजों का मुफ्त उपचार एवं डायगनोज सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। वहीं तेलंगाना, कर्नाटक और जम्मू-कश्मीर ने भी आप सरकार की फ्लैगशिप योजना को अपनाने में रुचि दिखाई है। दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार की मोहल्ला क्लीनिक योजना एक मॉडल बन गई है जिसे दूसरे राज्य भी ​अपनाने लगे हैं। दिल्ली में अब तक 189 मोहल्ला क्लीनिक स्थापित किए जा चुके हैं और उम्मीद है कि वर्ष के अन्त तक इनकी संख्या 530 हो जाएगी।

हालांकि दिल्ली के मोहल्ला क्लीनिक सही तरीके से संचालित नहीं किए जाने के मामले भी सामने आए हैं। कुछ की हालत काफी खस्ता होने के मामले भी सामने आए हैं लेकिन यह योजना अन्य राज्यों को आक​र्षित कर रही है। इस परियोजना की तारीफ विश्व स्वास्थ्य संगठन भी कर चुका है। संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव वान की मून ने भी इस परियोजना को सराहा था। हालांकि इस पर भी विवाद है। कहा गया था कि विदेशी मेहमानों को दिखाने के लिए एक मोहल्ला क्लीनिक को सजा दिया गया था। किसी भी परियोजना की सफलता और असफलता उसके संचालन पर निर्भर करती है लेकिन गरीबों को मुफ्त में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए यह एक ऐसी परियोजना है, जिसे 5 किलोमीटर के दायरे में स्थापित किया जा रहा है।

स्वास्थ्य क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना जरूरी है। किसी भी देश में स्वास्थ्य का अधिकार जनता का पहला बुनियादी अधिकार होता है। स्वस्थ नागरिक ही एक स्वस्थ व विकसित देश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सदियों से हमारी यह धारणा रही है कि ‘पहला सुख निरोगी काया, दूसरा सुख घर में हो माया तथा जान है तो जहान है।’ भारत स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपने कई पड़ोसी देशों से पीछे हैै। इसका खुलासा शोध एजैंसी लेसेंट ने अपने ‘ग्लोबल बर्डेन ऑफ डिजीज’ नामक अध्ययन में किया गया है। अध्ययन में कहा गया है कि भारत स्वास्थ्य देखभाल, गुणवत्ता व पहुंच के मामले में 195 देशों की सूची में 145वें स्थान पर है। सरकारी अस्पतालों की हालत बहुत खराब है। इनमें इलाज कराने के लिए भी संग्राम लड़ना पड़ता है। ओपीडी की लम्बी कतारों में कई घंटे खड़े रहने के बावजूद गरीब आदमी का नम्बर तो आता ही नहीं। प्राइवेट अस्पताल लूट-खसोट का अड्डा बन चुके हैं।

इन अस्पतालों में उपचार कराने का अर्थ अपने ऊपर कर्ज का बोझ ढोहने जैसा है। लोग अपने घर-जमीन गिरवी रखकर इनका बिल अदा करते हैं। सरकारी अस्पतालों की लचर व्यवस्था के चलते लोग निजी अस्पतालों में जाने को विवश हैं। भारत स्वास्थ्य सेवाओं पर सकल घरेलू उत्पाद यानी डीजीपी का सबसे कम खर्च करने वाले देशों में है। भारत स्वास्थ्य सेवाओं में डीजीपी का महज 1.3 प्रतिशत खर्च करता है। ब्राजील स्वास्थ्य सेवाओं पर 8.3 फीसदी, रूस 7.1 फीसदी खर्च करता है। अन्य देेेश भी स्वास्थ्य पर काफी धन खर्च करते हैं। देश में 14 लाख डाक्टरों की कमी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के आधार पर जहां एक हजार की आबादी पर एक डाक्टर होना चाहिए वहीं भारत में 7 हजार की आबादी पर एक डाक्टर है। डाक्टर ग्रामीण इलाकों में जाकर तो काम ही नहीं करना चाहते। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना शुरू की जो एक अच्छी योजना है और कई राज्यों में इसका लाभ मरीजों ने उठाया है।

नए एम्स अस्पताल भी बने हैं लेकिन गरीबों को मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के मामले में स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में क्रांतिकारी परिवर्तन की जरूरत है। भारत पर अपनी 125 करोड़ आबादी की सेहत का ख्याल रखने की बड़ी जिम्मेदारी है। देश में ऐसी अनेक बीमारियां मौजूद हैं जो गरीबी, ​अशिक्षा, जानकारी की कमी, साफ-सफाई, स्वच्छता एवं सेहत के प्रति उदासीनता की वजह से फैलती हैं। अनेक अस्पतालों के डाक्टर विदेशों में काफी प्रसिद्ध हैं। उनका एक पांव भारत में तो दूसरा विदेश में रहता है लेकिन वह समाज में स्वास्थ्य के प्रति लोगों को जागरूक करने में कोई भूमिका नहीं निभाते। पर्यावरण, प्रदूषण और बदलती जीवनशैली से कई साधारण सी दिखने वाली बीमारियां भी महामारी का रूप ले रही हैं।

देश को बीमारियों से बचाने के लिए लोगों को घर के पास स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए परियोजनाओं का विस्तार किया जाना बहुत जरूरी है। मोहल्ला क्लीनिक जैसी परियोजनाओं से लोगों की स्वास्थ्य केन्द्रों तक पहुंच को आसान बनाया जा सकता है लेकिन ऐसे क्लीनिक अगर खुद ही बीमार हों तो उद्देश्य की प्राप्ति असम्भव है। जो राज्य मोहल्ला क्लीनिक परियोजना को अपना रहे हैं उन्हें इस बात का ध्यान रखना होगा कि ऐसे क्लीनिक सही ढंग से चलाए जाएं। लोगों को गुणवत्ता भरी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। देश में परिवर्तन का दौर चल रहा है इसलिए स्वास्थ्य जगत में भी बदलाव जरूरी है।