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रण क्षेत्र से मोदी की ललकार

‘‘बहुत उड़ा चुके कबूतर शांति के

अब चलो कुछ नए शस्त्र बनाएं

बात करता है पड़ोसी जिसमें

उसे उसी भाषा में समझाएं

सुनामी सा आया आतंक

लेकर हाथों में स्टेनगन

किये शहीद अनगिनत पर

हिम्मत हमारी ना डिगा पाए

नहीं हौंसले ये टूटेंगे, नहीं बर्बाद यों होंगे

अगर वो रात फिर आई तो सरहदें हम बदल देंगे।’’

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस बार की दीपावली जैसलमेर में सेना और सीमा सुरक्षा बल के जवानों के साथ मनाई। प्रधानमंत्री का कार्यक्रम लोंगेवाला में था। लोंगेवाला पोस्ट सी​मा सुरक्षा बल के लिए रणनीतिक रूप से बहुत अहम है। भारत और पाकिस्तान  के बीच सीमाओं पर दनादन और एलओसी पर लद्दाख में भारत और चीन के मध्य तनातनी के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रण क्षेत्र में टैंक पर सवार होकर पाकिस्तान आैर चीन को दो टूक चेतावनी भी दी कि भारत की रणनीति साफ है, स्पष्ट है। आज का भारत समझने और समझाने की नीति पर​ विश्वास करता है लेकिन अगर हमें आजमाने की कोशिश होती है तो जवाब भी उतना ही प्रचंड मिलेगा। हम दुश्मन को घर में घुसकर मारते हैं। उन्होंने चीन का नाम लिए बिना उसकी ​​विस्तारवादी सोच पर करारा प्रहार किया। प्रधानमंत्री के शब्दों में उनके मनोबल की शक्ति का परिचय हमेशा ही दिया है, लेकिन रण क्षेत्र में उनकी मौजूदगी के अर्थ गहरे हैं।

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारतीय सशस्त्र सेनाओं को एक उभरते लोकतंत्र के एक शानदार संस्थान के रूप में विकसित होते देख हर भारतीय को गर्व होता है। सेना ऐसी संस्था है, जिसे सरकार ही नहीं ​बल्कि पूरे देश का अगाध विश्वास और स्नेह हासिल है। जब-जब भी देश की सीमाओं पर संकट आया तो हमारे जांबाजों ने अपने प्राणों की आहुति देकर रक्षा की। युद्ध हो या प्राकृतिक आपदा, बर्फीली पहा​ड़ियों पर रहें या फिर तपती दुपहरी में रेगिस्तान में, जवानों ने हमेशा हर मोर्चे पर डटकर काम किया है। मेरे मन में विदुर नीति की ये पंक्तियां घूम रही हैं कि ‘‘या तो रण क्षेत्र में राष्ट्र के मूल्यों की रक्षा के लिए लड़ता शहीद या समाधि की स्थिति में पहुंचा परमहंस, ये दो ही लोग सारे कर्मों के बंधन को भेद कर सीधे गौलोक धाम को प्राप्त होते हैं।’’

सेना के बल पर ही राष्ट्र का स्वाभिमान जीवित है। दीपावली या अन्य त्यौहारों पर परिवार से दूर सेना के जवान मोर्चे पर तैनात रहते हैं। जो त्याग, तपस्या जवान करते हैं, उससे देश में एक विश्वास पैदा होता है। प्रधानमंत्री हर वर्ष दीपावली सैनिकों के बीच इसलिए मानते हैं ताकि उन्हें भरोसा दिलाया जा सके कि 130 करोड़ देशवासी उनके साथ मजबूती से खड़े हैं। उन्हें जवानों की अपराजेयता पर गर्व है। प्रधानमंत्री की जवानों के बीच उपस्थिित जवानों के मनोबल को दोगुणा कर देती है और उनका जोश और हाई हो जाता है।

2014 में पहली बार प्रधानमंत्री बनने पर नरेन्द्र मोदी दीपावली मनाने सियाचिन पहुंचे थे। 2015 में भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पंजाब में सैनिकों के साथ दीपावली मनाई थी। इस दौरान उन्होंने 1965 युद्ध के वार मैमोरियल जाकर पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया था।

वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री मोदी ने दीपावली हिमाचल प्रदेश मेंचीन से सटी भारतीय सीमा पर तैनात जवानों के साथ मनाई थी। इसके लिए वह कुन्नूर के समडी पहुंचे थे। उन्होंने वहां आईटीबीपी के जवानों को अपने हाथ से मिठाई खिलाई थी। वर्ष 2017 में उन्होंने जम्मू-कश्मीर के गुरेज सैक्टर में तैनात बीएसएफ जवानों के साथ अपनी दीपावली मनाई थी। वर्ष 2018 में जवानों संग दीपावली मनाने के लिए वह उत्तराखंड के हर्षिल पहुंच गए थे। 2019 में प्रधानमंत्री ने एलओसी के राजौरी सैक्टर में दीपावली मनाई थी।

इसमें कोई संदेह नहीं कि नरेन्द्र मोदी के शासनकाल में सेना बहुत मजबूत हुई है। राफेल विमानों से लेकर हर आधुनिकतम शस्त्र सेना को मिले हैं। मिसाइलें बनाने में तो भारत अब स्वयं सक्षम हो चुका है। दुनिया समझने लगी है कि भारत अपने हितों की कीमत पर रत्ती भर भी समझौता करने वाला नहीं है। पुलवामा हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट स्थित आतंकवादी कैम्प पर एयर अटैक किया। डोकलाम के बाद लद्दाख में भी चीन के सामने भारत डट कर खड़ा है। सेना के शौर्य और मजबूती से ही भारत वैश्विक मंचों पर प्रखरता से अपनी बात कहने में सक्षम हुआ है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सेना द्वारा सौ से ज्यादा हथियारों और साजो-सामान को विदेश से नहीं मंगवाने के फैसले की सराहना की। प्रधानमंत्री हथियारों के मामले में आत्मनिर्भरता के प्रबल पक्षधर हैं। उन्होंने सेना को हमेशा ताकत दी है, हमेशा उनके बलिदान को नमन किया है। 

राष्ट्र ने भी दीपावली की रात सैनिकों के नाम दीये जला कर अपनी भावनाएं प्रकट कीं। पूरा देश जानता है कि राष्ट्र के स्वाभिमान, राष्ट्र की अस्मिता, राष्ट्र की विरासत पर हमला करने वालों को सेना मुंहतोड़ जवाब देगी। सेना में सरहदें बदल देने की क्षमता है। सैनिकों की चरण रज किसी मंदिर की विभूति से कम पवित्र नहीं। प्रधानमंत्री की पाकिस्तान और चीन को ललकार के साथ समूचे राष्ट्र में नए जोश का संचार हुआ है। राष्ट्र एक ही बात चाहता हैः

‘‘प​र्वतपति को आमूल डोलना होगा

शंकर को ध्वंसक नयन खोलना होगा

असि पर अशोक का मुंड तोलना होगा

गौतम को जय-जय कर बोलना होगा।

है जहां कहीं भी तेज हमें पाना है

रण में समग्र भारत को ले जाना है।’’