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संपादकीय

मेरे भाई तुम अमर हो...

मुझे नहीं मालूम मेरे भाई तुम कहां गए, परन्तु चारों तरफ देखकर आम और खास लोगों की बातें सुन यही लगता है कि आप कहीं नहीं गए, आप हमारे दिलों में हो। हमारे आसपास हो। आप अपने दोस्तों के दिलो-दिमाग में हो। अगर मैं मुकुल रोहतगी, रायन करंजियावाला, राजीव नैय्यर, बब्बी सहगल, नरेन्द्र बत्रा, शोभना भरतीया, अश्विनी मिन्ना, सुहेल सेठ, ज्योत्सना सूरी, ज्योतिराव सिंधिया, रितु शर्मा को देखूं तो लगता है आप उनके चेहरों पर नजर आ रहे हो। अगर आपके कालेज मेट विजय गोयल, विजय मेहता, रजत शर्मा को देखूं तो उनकी जुबां पर आपका ही नाम है। रजत शर्मा तो आपके गुण गाते नहीं थकते। अगर मैं फोन करूं तो सुरेन्द्र, पदम के मुंह से जेतली रेजिडेंस ही सुनती हूं। भीड़ में खड़ी हो जाऊं तो मुझे सुनाई देता है आप कइयों के माई-बाप थे,  कइयों की जिन्दगियां संवारी। 

अगर वकीलों और जजों के स्वर सुनो तो लगता है सारे देश के वकील और जज आपके द्वारा ही अपॉइंट किए गए हैं। दिल्ली के एमपी की कहानी सुनो तो सबके पीछे आपका हाथ है। आज की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को सुनो तो वह सबसे पहले आपका नाम लेती हैं। आपको गुरु मानती हैं। मोदी जी आपको संकटमोचक मानते हैं, अमित शाह पर्सनल क्षति मानते हैं। सारे जर्नलिस्ट और गोसिप कॉलम राइटर आपको अपना इन्फरमेशन सैंटर मानते हैं। अगर मैं कहीं चांदनी चौक के मशहूर खाने वाले या अमृतसरी कुलचे वालों की बात सुनूं तो आप उनके खाने के प्रशंसक और उनके अच्छे खाने के शौकीन हो, अगर एबीवीपी के छात्रों की बात सुनो तो आप उनके लिए मार्गदर्शक हो, हजारों छात्रों के लिए प्रेरणादायक हो कि मेहनत से कहां से कहां पहुंचा जा सकता है। 

आप एक अच्छे अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ, सामाजिक, बैस्ट एडवोकेट, अच्छे दोस्त और अच्छे भाई हो। आपकी पत्नी की तरफ देखूं तो आपकी अच्छी मित्र और सपोर्टर रही तो उसके दिल में आप धड़क रहे हो, आपके बच्चों सोनाली, रोहन को देखें तो उनमें आपका प्यार और संस्कार झलक रहे हैं। जब मैं एम्स में आपका हाल जानने जाती थी कई आपके मित्र, वकील, जज, राजनीतिज्ञों की भीड़ देखती और उनकी सेवा करती आपकी इकलौती साली निधि, जो आपके खाने का पूरा ख्याल और सब आने-जाने वालों का ख्याल रखती थी, जिसको आपने बहनों से बढ़कर प्यार दिया और आपकी बहनें (मधु, मंजू) जो अपने भाई के लिए कुछ भी करने को तैयार थीं, मिलती थीं तो उनमें आप ही नजर आते हैं।

जब आप अस्पताल में थे तो आपके घर जाकर आंखों में आंसू झलकते थे कि मेरा भाई कहां है, जिसको अच्छे शाल, अच्छे पैन और अच्छे खाने का शाैक है, जो जब बातें करता है एक बड़े भाई, मां, दादी सबको पीछे छोड़ जाता है। मुुझे आज भी याद है जब आपको 2 कृष्णा मेनन मिला तो जब हम आपके घर गए तो मुझे आप सीधा अपनी किचन दिखाने ले गए कि देखो किरण कितनी कम्फरटेबल बड़ी किचन है। यानी आप घर की छोटी बात से लेकर देश की बड़ी बात में दिलचस्पी रखते थे। जब हर साल 28 दिसम्बर को आपकी बर्थडे पार्टी होती थी तो लगता था सारे हिन्दुस्तान की क्रीम चाहे वो बिजनेसमैन हों, राजनीतिज्ञ हों, पत्रकार हों, आपके जन्मदिन पर इकट्ठे होते थे, तब भी आप बीच में आकर पूछते थे किरण तड़के वाली दाल और अमृतसरी कुलचा जरूर ट्राई करना। 

उनकी बात से खाने का जायका बढ़ जाता था। यही नहीं कई बार आप अमृतसर से कुलचे, चने या चांदनी चौक से कुछ मंगवा कर भेजते थे तो आनंद ही कुछ और था। मुझे आपकी एक-एक बात याद आती है कि कैसे आपने अश्विनी को चुनाव लड़वाया, कैसे आपने मदद की, यही नहीं अश्विनी जी को जैसे ही कैंसर डायग्नाेज हुआ क्योंकि हमारे डाक्टर ​​मित्र कॉमन हैं तो एक घंटे के अन्दर-अन्दर आपका और डोली जी का फोन आया, मैं बहुत रो रही थी और आपके एक शब्द ने मुझे हौंसला दिया, ‘‘किरण 60 साल के बाद कुछ न कुछ तो होता है तो इसका डटकर मुकाबला करो, हौंसला रखो, हिम्मत न हारो अश्विनी ठीक हो जाएगा, अभी यह बहुत छोटा है, दिल का बहुत अच्छा है, बहुत शरीफ इंसान है, यह फाइटर है फाइट करेगा, हिम्मत रखो।’’ (मालूम नहीं था कि आप भी इसी बीमारी की चपेट में आ जाओगे)। 

तब कन्फयूजन था कि यहां इलाज करवाना है कि यूएसए। तो आपने ही निर्णय किया कि अमेरिका सलोन केट्टेरिंग में ही जाना है, वहां अमेरिका में डोली और रोहन ने जिस तरह ख्याल रखा, सर्जरी में मेरे साथ रहे यह आपका प्यार ही था जो कभी नहीं भूलूंगी। आदित्य और रोहन के गले लगती हूं तो मुझे कोई फर्क नहीं लगता। यह प्यार और संस्कार और दोस्ती निभाना भी आपने ही बच्चों को ​सिखाया है। मुझे यह भी याद है कि जब हम आपको मिलने गए तो आप बहुत कमजाेर थे, मेरी आंखों से आंसू नहीं रुक रहे थे तो आपने बड़े हौंसले से कहा- देखो मैं अपनी डाइट और सैर सेे अपने आपको फिट रख रहा हूं और निधि मेरी डाइट का बहुत ख्याल रखती है। अश्विनी जी को भी कहाे, बस यह दो चीजों का ध्यान रखना है। मैंने घर आकर अ​श्विनी जी को बताया। 

मुझे नहीं मालूम था मुझे हर पल हौंसला देने वाला भाई जो हमेशा जिन्दगी में चाहे पढ़ाई, राजनीति, दोस्ती हाे सबमें आगे रहा, इसमें भी वो सबसे आगे ​निकल जाएगा। भाई 66 साल की उम्र क्या उम्र होती है जाने की। मैं तो भगवान से भी नाराज हूं। आपके और अश्विनी जी के लिए कई मन्नतें, कई पूजाएं कीं क्यों नहीं सुनी। कम से कम रोहन की शादी तो कर जाते, मेरे से डोली का चेहरा देखा नहीं जाता, जो हर पल मेरा सहारा बनती है, मुझे हौसला देती है, खुद अन्दर से टूट गई, पर अभी अंदर से बहुत हिम्मत करके दूसरों काे सहारा देती है। मुझे यही कह रही थी भगवान को मैंने बहुत कहा कि मेरी और अरुण की उम्र का बार्टर कर लो, मेरी लेकर उनकी बढ़ा दो ताकि साथ रहें और रोहन की शादी देखें, परन्तु नहीं सुनी भगवान ने। 

मैं तो खुद भगवान से नाराज हूं कि उन्होंने पहले अश्विनी जी को बीमारी दी, फिर आपको, फिर आपको ले जाने में इतनी जल्दी की। आपके जाने से मैं तो टूट ही गई। मेरे लिए खौफ पैदा हो गया है। मुझे नहीं समझ आती भगवान से लड़ूं, दुनिया से लड़ूं या बीमारी से लड़ूं। मेरे आंसू थमने का नाम नहीं लेते। आपके घर आपकी फोटो के आगे अगरबत्ती और फूल देखती हूं तो देखा नहीं जाता। ईश्वर यह क्या मजाक, जिस इंसान की सबको बहुत जरूरत थी इतनी जल्दी क्या थी तुम्हें उसे ले जाने की। शायद तुम्हारे पास अच्छे आदमियों की कमी रही होगी। आदित्य के मामा की मिलनी आपने करी थी, अर्जुन-आकाश की कौन करेगा? आपकी बेटी की व्हाट्सएप पर डीपी देखती हूं, तो एक बेटी का अपने पिता का प्यार और बिछोड़ा दिखता है। 

परन्तु मैं एक बात दावे से कह सकती हूं, पूरे विश्वास से कह सकती हूं कि मेरा भाई अरुण जेटली कहीं नहीं गया, वो आज भी हमारे बीच है, हमेशा रहेगा। आपका मुस्कराता चेहरा हर तरफ किसी न किसी रूप में दिखता है। सच पूछो तो सही मायने में अमर होने के अर्थ समझ आए हैं, वो अमर हैं, मेरे भाई तुम अमर हो।