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संपादकीय

नारी नारायणी है... सीतारमण ने किया साबित

‘गरीब को बल, युवा को बेहतर कल’ वाला बजट पेश कर भारत की महान शख्सियत निर्मला सीतारमण ने यह साबित कर दिया कि आज की महिला किसी से कम नहीं और वह भारतीय संस्कारों और मर्यादा में रहकर सब कुछ कर सकती है। वह भारत की दूसरी महिला बनीं जिसने संसद में बजट पेश किया। जिस समय वह बजट पेश कर रही थीं तो मेरा मानना है कि टीवी के आगे बैठी हर भारतीय महिला, बेटी गर्व महसूस कर रही थी और सबका फख्र से सिर ऊंचा था। इसके लिए मोदी जी को भी धन्यवाद देती हूं जिन्होंने 78 महिलाओं को न केवल संसद में आने का अवसर दिया बल्कि उनको ऊंचा पुरुषों के समान ओहदा भी दिया। 

अगर अश्विनी जी बीमार न होते तो शायद मैं भी इन महिलाओं का एक हिस्सा होती परन्तु मेरे लिए इस समय पति सेवा ही मेरा लक्ष्य था समाज सेवा तो शुरू से करनी आ रही हूं करती रहूंगी और इन सभी एमपी महिलाओं में मैं अपना ही रूप देखकर प्रसन्न होती हूं। इनमें विशेष रूप से टीएमसी सांसद नुसरत जहां का रूप देखकर मुझे भविष्य में महिलाओं की धर्मनिरपेक्षता के प्रति सम्मान का भाव बहुत सराहनीय लगा और मैं महिला होने के नाते गर्व भी महसूस करती हूं। जिस तरह से सीतारमण ने बजट पेश किया वह भी भारतीय परम्परा का प्रतीक था। हम अक्सर कोई भी शुभ काम करते हैं या शगुन देते हैं तो लाल कपड़े में लपेट कर मौली बांधकर देते हैं।

अब तक बजट ब्रीफकेस में पेश हो रहा था जो अंग्रेजों की परम्परा रही है। यह नहीं कि पहले जिन्होंने बजट पेेश किया वह भारतीय परम्परा को निभाना नहीं जानते थे परन्तु किसी ने इतना बारीकी से सोचा ही नहीं होगा। कहते हैं ईश्वर ने महिला को 6th Sense (छठी इंद्री) दी है कि वह बहुत आगे की सोचती है। इस तरह बजट लाल कपड़े में परम्परागत ‘बही-खाते’ की याद दिला रहा था और खुद भी सीतारमण ने शगुनों वाले कलर की साड़ी पहन रखी थी। सबसे बड़ी बात सीतारमण अपने गुरु अरुण जेटली जी को समक्ष रखकर बोल रही थीं। अक्सर देखा जाता है गद्दी पर आकर बड़े-बड़े भूल जाते हैं परन्तु सीतारमण ने अपने गुरु को याद रखा और स्पष्ट कहा कि उन्होंने अरुण जेतली जी से बहुत कुछ सीखा है वरना ऊंचे पद पर पहुंच कर लोग अपने पुराने मित्रों को भूल जाते हैं और सीतारमण जी ने यह बात याद रखी तथा यह हर किसी के लिए बहुत प्रेरणादायी बात है। अपने गुरु और पुराने मित्रों का सम्मान करना ही चाहिए। 

मैं आम गृहिणी और समाज-सेविका होने के नाते घर के बजट को तो भली-भांति जानती हूं परन्तु देशभर के बजट की इतनी समझ नहीं परन्तु सब लोगों की राय सुनकर यही समझा है कि यह बजट आशा और उम्मीदों से भरा है। इसमें गरीब, किसान, दलित, पीड़ित, शोषित, वंचित को सशक्त करने के लिए चौतरफा कदम उठाए गए हैं। अगले 5 वर्षों में यही सशक्तिकरण देश के विकास का पावर हाउस बनेगा। बजट से मध्यम वर्ग को प्रगति और देश में विकास को रफ्तार मिलेगी। बस थोड़ा सा हम जैसे मध्यम वर्ग को आयकर में कम राहत मिली है क्योंकि बजट बनाते हुए अक्सर मध्यम वर्ग पिस जाता है। गरीबों के उत्थान और अमीरों के लिए बजट में बहुत कुछ आता है। फिर भी यह बजट भविष्य के सपनों की तस्वीर दिखाई दे रहा है। 

हमारा युवा वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर, जो मुझे बहुत प्रिय है, के अनुसार बजट एक समृद्ध भारत की परिकल्पना है। मोदी जी के अनुसार इस बजट से तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा भारत। सीतारमण ने 2 घंटे से ज्यादा लम्बे अपने भाषण में कई जगहों पर महिलाओं और उनसे जुड़े मुद्दों का जिक्र किया। उन्होंने महिलाओं को आर्थिक तौर पर मजबूती देने के लिए कई कदम उठाए और घोषणाएं कीं। कई लोगों को यह बजट बिल्कुल नहीं भाया। हमने अपने ऑफिस में काम करने वाले और सम्पादकीय विभाग के भी विचार लिए, सबकी अपनी-अपनी राय है। कइयों ने कहा-कुछ नहीं...। आम लोगों से बात की तो कइयों ने कहा-पुराने वादों, घोषणाओं को नए कलेवर में पेश किया गया। लोकतंत्र है, सबकी राय का स्वागत है। परन्तु मैं एक महिला होने के नाते दावे से कह सकती हूं कि एक महिला का आत्मविश्वास से भरा निराले अन्दाज का बजट भाषण सारी भाषाओं का मिश्रण था और उन्होंने मशहूर शायर मंजूर हाशमी का शे’रः

‘‘यकीन हो तो कोई रास्ता निकलता है,

हवा की ओट लेकर भी चिराग जलता है।’’

देश की सभी महिलाओं को गर्व है। आज बेटियां किसी से कम नहीं, बेटियों से ही है जमाना।