पाक आतंकवादी राष्ट्र घोषित हो


भारत-अमरीका सम्बन्ध नई करवट ले रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में आने के बाद कई बातें ऐसी हुई हैं जो भारत की इच्छाओं के अनुरूप हैं। ट्रंप सरकार नई जरूर है लेकिन अतीतोन्मुखी नहीं है। बुश की सरकार रही हो या बिल क्विंटन की, कहीं न कहीं उनका भारत के प्रति पूर्वाग्रह रहा। भारत अमरीका और अन्य वैश्विक ताकतों से कहता रहा कि उसके पड़ोस में एक अवैध रूप से बना मुल्क बैठा है जहां आतंकवाद की खेती होती है। सीमापार से उसके आतंकवादी घुसपैठ कर न केवल कश्मीर में बल्कि समूचे भारत में कत्लोगारत मचा रहे हैं लेकिन हमारी किसी ने नहीं सुनी। हम बार-बार कहते रहे कि पाक को आतंकवादी राष्ट्र घोषित करो लेकिन हमारी किसी न नहीं सुनीं। अमरीका पर 9/11 के आतंकवादी हमले के बाद दृश्य तो बदला लेकिन तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति जार्ज वाकर बुश को जमीनी सच दिखाई नहीं दिया। यह कैसा अजीब विरोधाभास था कि सदियों के इतिहास में वह कुछ अमरीका में नहीं घटा था, जो 11 सितम्बर 2001 के दिन घटा और साथ ही विश्व का सबसे बड़ा आतंकवादी देश पाकिस्तान अमरीका का सबसे बड़ा हितैषी बन बैठा।

बुश और पाकिस्तान की दोस्ती का रहस्य क्या था? जार्ज बुश ने तुमुलनाद कर डाला ”जहां भी आतंकवाद बढ़ेगा, अमरीका उसे कुचलने में अपनी भूमिका निभाएगा।” उधर अमरीका में यह सब चल रहा था।– इधर अफगानिस्तान में अलकायदा और तालिबान आपस में मिल चुके थे।– हर तरह के अस्त्र-शस्त्र इकट्ठे किए जा चुके थे।– ओसामा बिन लादेन और मौलाना उमर अपने उत्कर्ष पर थे।– इस्लामिक आतंकवाद की जय-जयकार हो रही थी।काश! बुश ने भारत की आवाज सुनी होती। अब अमरीकियों को जाकर अहसास हुआ कि अफगानिस्तान का युद्ध उन्हें कितना महंगा पड़ा। अमरीका पाक के स्टील के कटोरे में करोड़ों डालर डालता रहा और वह उससे आतंकवाद को सींचता रहा। काश! बिल क्विंटन ने गंभीरता से सोचा होता, वह सोचते भी कैसे क्योंकि वह तो मोनिका लेविस्की और अन्य सुन्दरियों के प्रेमपाश से बंधे थे। अमेरिका पाक को आतंकवाद से लडऩे के नाम पर धन और अस्त्र-शस्त्र देता रहा और पाकिस्तान उस पैसे से अफगानिस्तान में आतंकवाद को मजबूत करता रहा। ओबामा के कार्यकाल में इस्लामाबाद की ऐबटाबाद कालोनी में छिपे लादेन को मार तो डाला गया लेकिन पाक के खिलाफ केवल बयानबाजी होती रही। हिलेरी क्विंटन पाक पर लगातार नेमतें बरसाती रहीं, यह जानते हुए भी पाकिस्तान अमेरिकियों को मूर्ख बना रहा है।आतंकवाद पर डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विचार एक हैं।

प्रधानमंत्री की अमेरिका यात्रा से पहले ही अमेरिका ने हिज्बुल मुजाहिदीन के सरगना सैयद सलाहुद्दीन को ग्लोबल आतंकी घोषित कर दिया था। फिर उसके बाद अमेरिकी संसद ने पाकिस्तान को सैन्य मदद पर कठोर शर्तें लगाते हुए पिछले सप्ताह प्रतिनिधि सभा में रक्षा विधेयक में तीन संशोधन किए। इसमें शर्त रखी गई कि वित्तीय मदद पाने के लिए पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में संतोषजनक प्रगति दिखानी होगी। पाक अधिकृत कश्मीर में ठिकाने बनाए बैठे लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद लगातार कश्मीर में हमले कर रहे हैं। विधेयक में यह स्पष्ट कहा गया कि जब तक रक्षा मंत्री यह पुष्टि न कर सकें कि पाकिस्तान अमेरिका के घोषित किसी भी आतंकवादी को सैन्य, वित्तीय मदद अथवा साजो-सामान उपलब्ध नहीं करा रहा तब तक उसे दी जाने वाली वित्तीय मदद रोक दी जाए। अमेरिका पाकिस्तान को हथियारों की बिक्री रोकने वाला प्रस्ताव भी लाने वाला है। अब अमेरिका ने आतंकवाद के मसले पर पाक को विश्व बिरादरी के सामने बेनकाब कर दिया है। अमेरिका ने उसे आतंकियों को सुरक्षित पनाह देने वाले देशों की सूची में डाल दिया है। अमेरिकी कांग्रेस को सौंपी गई विदेश विभाग की रिपोर्ट में कहा गया है कि पाक सेना और सुरक्षा बलों ने पाक के भीतर हमले करने वाले तहरीक-ए-पाकिस्तान जैसे संगठन पर कार्रवाई तो की लेकिन अफगान तालिबान और हक्कानी जैसे आतंकी समूहों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।

हाफिज सईद और मसूद अजहर जैसे आतंकी आज भी आतंकियों को ट्रेनिंग और धन की उगाही में लिप्त हैं। अमेरिका की यह कार्रवाई भारत की कूटनीतिक जीत है। जिस राष्ट्र के सैनिकों और आतंकवादियों का चरित्र भेडिय़े जैसा हो, वह कभी शाकाहारी नहीं हो सकता।पाक चीन से दोस्ती के बल पर अकड़ रहा है। पाक को सीधा करने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। समय आ चुका है कि पाक को खंड-खंड तोडऩे की पूरी तैयारी की जाए। यह जंग पाक और भारत की नहीं बल्कि यह जंग दरिंदगी और इन्सानियत के बीच है। जो दरिंदे इन्सान की जान पर हमला कर रहे हैं, उन्हें जीने का कोई अधिकार नहीं। जंग अगर लाजिमी हुई तो जंग भी होगी, परन्तु जुल्म के सबसे बड़े ताजिर जो हुर्रियत के रूप में हमारी धरती पर बैठे हैं, उन्हें भी उनके गुनाहों की सजा तो मिलनी ही चाहिए। एक न एक दिन तो पाक को बिखरना ही है। घाटी में शांति के लिए अमेरिका के कदम स्वागत योग्य हैं लेकिन जरूरत है कि संयुक्त राष्ट्र संघ पाक को आतंकवादी राष्ट्र घोषित कर उसके खिलाफ वैश्विक प्रतिबंध लगाए। यह उसी दिशा में बढ़ता कदम है।