पाकिस्तान अब भी सुधर जाये वरना….

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पिछले दिनों अमेरिकी फौजों ने जिस तरह अफगानिस्तान को अपने आतंकवादियों को छिपाने के लिए इस्तेमाल कर रहे दुनिया के सबसे बड़े आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट की गुफाओं पर अब तक का सबसे बड़ा लगभग 10 हजार किलो वजनी बम गिराया तो हर कोई सकते में आ गया। हालांकि इसमें हैरानी की कोई बात नहीं है क्योंकि आतंकवादियों का हश्र ऐसा ही होना चाहिए। दुनियाभर में आतंकवाद अगर फैल रहा है तो उसका कारण काफी हद तक हमारे पड़ोस में पाकिस्तान की शह पर मानवता का खून करने वाले कई वे आतंकवादी संगठन हैं जो कल तक किसी से नहीं डरते थे। कमजोर राजनीतिक सिस्टम औैर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बड़े देशों में विचारधारा को लेकर टकराव की वजह से आतंकवादी सिर उठाने लगे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूरी दुनिया को आतंकवाद के खिलाफ अब एकजुट होकर खड़ा कर दिया है। आज पूरी दुनिया आतंकवाद के खात्मे के लिए फैसला ले चुकी है और सही मायनों में नाग की तरह फन उठाकर आईएस पर जिस तरह से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने यह एक्शन करवाया है तो इसका भरपूर स्वागत किया जा रहा है। इसके साथ ही एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर लोगों की निगाहें फोकस हो गई हैं कि क्या जिस तरह से पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों को लेकर कश्मीर घाटी में सक्रिय हो रहा है तो अब उसके खिलाफ फिर से सर्जिकल स्ट्राइक हो सकती है या नहीं? यह चर्चा इसलिए की जा रही है क्योंकि आज पीएम मोदी के पास एनएसए अजीत डोभाल जैसे रणनीतिकार हैं जिन्होंने पाकिस्तान पर पूरी तरह से शिकंजा कस रखा है।
पाकिस्तान के खिलाफ सितंबर 2016 में जिस तरह से भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक किया था तो शुरू में लोग थोड़ा हैरान हुए लेकिन धीरे-धीरे उनकी हैरानगी उस विश्वास में बदल गई जिसके लिए श्री मोदी जी पाकिस्तान को घेरने की रणनीति बना रहे थे। वैसे इससे पहले म्यांमार में घुसकर बागी आतंकवादियों को नेस्तनाबूद करने के काम को भारतीय सेना पहले ही अंजाम दे चुकी थी। यह कमाल भी महान रणनीतिकार अजीत डोभाल का ही है जिन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के आदेश पर सेना के साथ लगातार संपर्क में रहकर इन कामों को अंजाम दिया। सही वक्त पर सही एक्शन अगर ले लिया जाए तो किसी देश की सुरक्षा की दीवार को कोई बेध नहीं सकता। ऐसा विश्वास डोभाल के प्रति व्यक्त किया जा सकता है। सामरिक मामलों में अनेक सुरक्षा विशेषज्ञ भी उनकी कार्यशैली का लोहा मानते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि अपनी इसी योग्यता के दम पर श्री डोभाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहली पसंद बने रहते हैं।
इसीलिए कहा जा रहा है कि अब पड़ोस में पाकिस्तान हो या कोई भी देश, भारत के सुरक्षा मामलों में दखल की कोशिश उसे महंगी पड़ सकती है। घाटी में पत्थरबाजों के घिनौने खेल के पीछे भी पाकिस्तान ही शामिल है तो लोग अब अपेक्षा करने लगे हैं कि इन पत्थरबाजों के आकाओं को काबू करना होगा जो कि पीओके से जुड़े हैं। पीओके एक बार पहले आतंकवादियों का हश्र देख चुका है। पाकिस्तान को सबक मिल चुका है। ऐसे में अगर उसके पुराने फौजी हुक्मरान परवेज मुशर्रफ जो मर्जी चिल्लाते रहें कौन परवाह करता है। एक टीवी चैनल पर पाकिस्तान से बाहर हुए मुशर्रफ साहब दहाड़ रहे थे कि कोई सर्जिकल स्ट्राइक भारत ने पीओके में नहीं की, जबकि उनके मुल्क की फौज के आला अफसरों ने अपने संदेश एक-दूसरे से शेयर करते हुए इस स्ट्राइक पर चिंता जाहिर की थी। लोगों ने परवेज मुशर्रफ के इस झूठ को सोशल साइट्स पर जमकर कोसा है।
यद्यपि भारतीय सेना को भारत-पाकिस्तान बार्डर पार आतंकी शिविरों के बारे में पूरी जानकारी है। पीओके और आसपास के इलाकों के बारे में पहले भी हमारी सेना कह चुकी है कि आतंकी शिविरों को नेस्तनाबूद करने में हमें सिर्फ 10 मिनट का समय दिया जाए। सब कुछ मलियामेट कर दिया जाएगा। मोदी को हमारी सेना के पराक्रम पर पूरा भरोसा है, तभी तो उन्होंने डोभाल के साथ हर काम को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए जिम्मेदारी सौंप रखी है। तकनीकी रूप से श्री डोभाल अपने मिशन को अब उस मुकाम पर लेकर जा रहे हैं जिसका सबको इंतजार है।
कश्मीर में गड़बड़ी कर रहे पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ सकती है क्योंकि राजनीतिक दृष्टिकोण से कुछ मजबूरियां मोदी भी समझ रहे हैं लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महबूबा सरकार से भी फीडबैक लिया जा रहा है। राजनीतिक दृष्टिïकोण से श्री मोदी जहां गृहमंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज से बातचीत करते रहते हैं वहीं हर मौके पर वह एनएसए डोभाल से भी पाकिस्तान को काबू करने के मिशन को लेकर संपर्क जोड़े रखते हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान का दुनिया के सामने बेनकाब होना नवाज शरीफ का कश्मीर के मामले पर अलग-थलग पडऩा और पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक यह सब काम तो छोटे ट्रेलर थे और चर्चा यह है कि श्री डोभाल के पास इस मामले में सफलता की पूरी फिल्म है जिसे वह कभी भी प्रदर्शित कर सकते हैं। देशवासियों को अगर पाकिस्तानी आतंकवादी प्रमोटरों के खिलाफ एक और सर्जिकल स्ट्राइक देखने को मिल जाए तो ज्यादा हैरानी नहीं होनी चाहिए।

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