पाकिस्तान : डगमगाती नाव : कांपते मस्तूल


minna

नावें डगमगा रहीं, कांप रहे मस्तूल,
मांझी फिर भी कह रहे, मौसम है अनुकूल।
पाकिस्तान के हालात पर हम फिलहाल यही प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकते हैं। पाकिस्तान भले ही कुछ भी कहे लेकिन वह सकते में है। यकीन मानिये इससे पहले पाकिस्तान इतना कभी नहीं सकपकाया था। उसकी अब के पहले घिग्गी कभी नहीं बंधी थी। वह अब मेमने की तरह मिमिया रहा है। आतंकी फंडिंग पर नजर रखने वाली एजैंसी फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाल दिया है। एफएटीएफ ने पाकिस्तान को आतंकवाद रोकने के लिए तीन माह का समय दिया था लेकिन पाकिस्तान को तो जेहाद पसन्द है। यह कार्रवाई वैश्विक स्तर पर की गई है इसलिए अब अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं और बैंकों को पाक में बिजनेस करना मुश्किल हो जाएगा। पाकिस्तान को गम्भीर आर्थिक संकट झेलना होगा। उसकी अर्थव्यवस्था तो पहले से ही पटरी से उतर चुकी है। अमेरिका ने भी सहायता पहले ही रोक दी है।

एफएटीएफ के इस सख्त कदम से आर्थिक मोर्चों पर पाकिस्तान के हालात और खस्ता होने के आसार हैं। पहले कहा जा रहा था कि चीन, तुर्की और सउदी अरब ने पाक को ग्रे लिस्ट में शामिल करने को लेकर अमेरिकी नेतृत्व में किए जा रहे प्रयासों को विफल कर दिया है आैर पाकिस्तान ने तो अपने उन दोस्तों का शुक्रिया भी अदा कर दिया था जिससे पाकिस्तान को निगरानी सूची में डालने से बचाया जा सका लेकिन पाकिस्तान का दावा पहले की तरह झूठ निकला। खास बात यह है कि पाकिस्तान के गहरे दोस्त चीन ने भी अपनी आपत्तियां वापस ले लीं और उसने साथ देना छोड़ दिया। केवल तुर्की ने पाक का साथ दिया। एफएटीएफ के 37 सदस्य हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि चीन समेत 36 देशों ने आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई न करने के लिए पाकिस्तान को दंडित करने का समर्थन किया। अब अन्य देश वहां निवेश करने से बचेंगे। पाकिस्तान सरकार द्वारा दो आतंकी संगठनों व इनके द्वारा चलाए जा रहे चैरिटी को प्रतिबंधित करने का दावा भी झूठा साबित हुआ है।

पाकिस्तान में जेयूडी आैर एफआईएफ के सभी चैरिटी संस्थान पहले की तरह चल रहे हैं। यह चैरिटी लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद द्वारा चलाए जा रहे हैं जिसे संयुक्त राष्ट्र ने आतंकी करार दिया है। सवाल यह भी है कि जो सरकार अपने संगठन तो चला नहीं पा रही है फिर वह जेयूडी आैर एफआईएफ के सभी स्कूलों, अस्पतालों और मदरसों को कैसे चला पाएगी? इसलिए संगठनों का केवल बाहर से ही नाम बदला है। चीन के बारे में पाकिस्तान हमेशा कहता रहा है कि उससे दोस्ती हिमालय से भी ऊंची है। उसे तो उम्मीद थी कि सउदी अरब भी उसका साथ देगा क्योंकि उसके कहने पर ही हाल ही में उसने एक हजार सैनिक उसकी लड़ाई लड़ने के लिए भेज दिए थे लेकिन अमेरिका के सख्त तेवरों के आगे वह भी पीछे हट गया। अजहर मसूद को संयुक्त राष्ट्र की आतंकवादियों की सूची में शामिल करने के भारतीय प्रयासों को अड़ंगा लगाकर चीन पहले ही काफी बदनाम हो चुका है। चीन की छवि भी आतंकवाद काे प्रश्रय देने वाले देशों के मददगार के तौर पर बन रही है। आखिर वह कब तक पाक का साथ देगा, उसे भी अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी को मुंह दिखाना है अन्यथा वह भी अलग-थलग पड़ सकता है। 70 वर्ष पहले सच्चे भारतीय मुस्लिम और स्वतंत्रता सेनानी मौलाना आजाद ने देश विभाजन से पहले चट्टान नामक मैगजीन में पत्रकार शोरिश कश्मीरी को एक इंटरव्यू दिया था। जो बातें पाकिस्तान के भविष्य को लेकर मौलाना साहब ने कही थीं, पाकिस्तान आज ठीक उसी रास्ते पर चल रहा है।

उन्होंने कहा था कि मक्कार और भ्रष्ट सियासतदान खुद ही सेना के लिए मार्शल लॉ का रास्ता बनाएंगे आैर नेता और बिजनेसमैन पाकिस्तान की जीडीपी का सत्यानाश कर देंगे, इसको बेच खाएंगे, पिछड़ा तबका विद्रोह करेगा आैर यह देश कठपुतली बना रहेगा। हो भी यही रहा है, उसके नेता भ्रष्टाचार के मामलों में फंसे हुए हैं, देश में आधा-अधूरा लोकतंत्र है। जो भी सत्ता में आया, चाहे वह जरदारी हो या कोई और, उसने देश की सम्पत्ति को लूट खाया। पाकिस्तान अब चीन और अरब देशों की कठपुतली बना हुआ है, कभी वह अमेरिका की कठपुतली था। उसने अपनी अर्थव्यवस्था कटोरा हाथ में पकड़ कर चलाई है। कभी उसने भीख का कटोरा अमेरिका, कभी अरब जगत तो अब चीन के आगे रखा हुआ है।

ची​न की विवशता यह है कि उसने पाकिस्तान में जबर्दस्त निवेश कर रखा है। अगर पाकिस्तान में राजनीतिक उठापटक होती है तो उसे अरबों रुपए का नुक्सान झेलना पड़ेगा। उसकी पाक-चीन आर्थिक गलियारा प​रियोजना का पीओके के लोग विरोध कर रहे हैं।पाकिस्तान में चीन का विरोध जोर पकड़ रहा है। पाकिस्तान समझता है कि चीन को उसने अपने जाल में फांस ​दिया है लेकिन उसे यह नहीं मालूम कि चीन ने उसके कब्जे वाली जमीन ही उससे हथिया ली है। पाक चाहकर भी वह जमीन चीन से खाली नहीं करवा सकता। किसी भी देश के टुकड़े-टुकड़े करने हों तो पहला काम उसकी अर्थव्यवस्था को तोड़ना होता है। वैश्विक सहमति से पाक पर आर्थिक प्रतिबंध लगाना ही इस देश का एकमात्र इलाज होगा। प्रतिबंद भी ऐसे कड़े होने चाहिएं कि पाकिस्तान का आतंकवाद दम तोड़ दे। पाकिस्तान का नाम सरजमीं से गायब करना जरूरी है। दुनियाभर के लिए यह बहुत बड़ा सबक होगा कि जो सबका बुरा सोचता है, उसका कोई भी अपना नहीं होता। आतंकवाद के समूल नाश के लिए वैश्विक शक्तियों को एकजुट होना ही होगा।