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भारत में कोरोना के आँकड़े #GharBaithoNaIndiaSource : Ministry of Health and Family Welfare

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पुतिन : तानाशाह या महानायक

सोवियत संघ के खुफिया एजैंट रहे ब्लादिमिर पुतिन देश के सबसे ताकतवर इंसान बन गए हैं। ब्लादिमिर पुतिन 2036 तक राष्ट्रपति बने रहेंगे। पिछले डेढ़ दशक से भी ज्यादा समय से रूसी ताकत और सत्ता पुतिन के इर्द-गिर्द घूम रही है, वह दुनिया के ताकतवर लोगों में शुमार होते हैं। विश्व भर में मीडिया में वह छाए रहते हैं। 1980 के दशक में उन्हें जर्मनी के ड्रेसडेन में खुफिया एजैंट के तौर पर नियुक्त किया गया था, लेकिन बर्लिन की दीवार गिरने के बाद वह वापस रूस आ गए थे और तत्कालीन येल्तसिन सरकार में शामिल हो गए थे। इसके बाद वह राजनीति में अपनी जगह बनाते चले गए। 1997 में राष्ट्रपति वोरिस येल्तसिन ने उन्हें अपना डिप्टी चीफ आफ स्टाफ घोषित किया। 1999 में येल्तसिन ने उन्हें रूस के प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया तो उनके समर्थक और विरोधी दोनों इस फैसले के खिलाफ थे लेकिन कोई भी  पुतिन को प्रधानमंत्री बनने से रोक नहीं सका।

येल्तसिन के अचानक इस्तीफा देने के बाद पुतिन कार्यवाहक राष्ट्रपति बने और उन्होंने पहला काम यह किया कि येल्तसिन पर लगे भ्रष्टाचार के सभी आरोपों से उन्हें मुक्त कर दिया। सन् 2000 में वह राष्ट्रपति चुने गए। इसके साथ ही उनकी छवि भी बदल गई। उस समय देश भ्रष्टाचार से परेशान था। पुतिन कानून और व्यवस्था को मानने वाले नेता के रूप में उभरे। पुतिन में लोगों को उम्मीद की किरण दिखाई दी और वह लोगों की कसौटी पर खरे उतरे। उन्होंने रूस को आर्थिक संकट से ​निकाला और लोगों को अच्छे दिन देखने को ​मिले। 2004 में भी लोगों ने उन्हें अपना फिर नेता चुना। अमेरिका की ही तरह रूस में भी राष्ट्रपति तीसरी पारी नहीं खेल सकता था। लिहाजा ​दिमित्री मेदेवदेव देश के राष्ट्रपति बने और उन्होंने पुतिन को प्रधानमंत्री बनाया। दिमित्री मेदेवदेव केवल कागजों में ही राष्ट्रपति थे, जबकि सत्ता की कमान पुतिन के हाथों में ही थी। मेदेवदेव के दौर में ही ही घोषणा हुई थी कि अगले चुनाव में राष्ट्रपति का कार्यकाल चार वर्ष की बजाय 6 वर्ष का होगा।

2012 में पुतिन फिर राष्ट्रपति बने तो उन्होंने मेदेवदेव को प्रधानमंत्री नियुक्त किया। हालांकि उनकी कड़ी आलोचना हुई। देश की अर्थव्यवस्था फिर बिगड़ी, भ्रष्टाचार और मानवाधिकार के उल्लंघन के भी लगातार आरोप लगते रहे। इसके बावजूद पुतिन एक बार फिर 75 फीसदी वोटों के साथ सत्ता में आ गए। अब उन्होंने 27 वर्ष पुराने संविधान को बदलने ​के लिए रूसी संसद में प्रस्ताव पेश किया जिसके समर्थन में 340 सांसदों ने वोट दिया। पुतिन ने भी इस कानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। हालांकि इस कानून को रूस की संवैधानिक अदालत की मुहर लगना बाकी है। इसके बाद रूसी लोग कानून पर वोटिंग करेंगे। रूस में यह संवैधानिक बदलाव कुछ वैसे ही पास किए गए हैं जैसे चीन में किए गए। चीन में संवैधानिक बदलाव के बाद राष्ट्रपति शी जि​नपिंग आजीवन राष्ट्रपति बने रह सकते हैं। जाहिर है कि पुतिन और शी जिनपिंग की मजबूती से ही अमेरिका पर दबाव बढ़ेगा।

अब सवाल यह है कि पुतिन ने भी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तरह तानाशाही का मार्ग अपनाया है लेकिन  दोनों देशों की जनता अपने-अपने नेताओं की समर्थक बनी हुई है। वास्तव में वर्ष 2000 से कभी राष्ट्रपति, कभी प्रधानमंत्री रहे पुतिन ने देश को एकजुट किया है। आर्थिक मोर्चे पर दिक्कतें तो रहीं लेकिन रूस का प्रभाव बढ़ा। वह सोवियत संघ के दौर की तरह शक्तिशाली हुआ। रूस अब मध्य-पूर्व में एक बड़ा खिलाड़ी बन गया है, जिसको नजरंदाज नहीं किया जा सकता। सीरिया को लेकर भी कोई समाधान रूस के बिना सम्भव नहीं। इराक में भी रूस का प्रभाव बढ़ा है। रूस, ईरान और तुर्की की तिकड़ी के साथ इराक भी जुड़ गया है। पुतिन ने अमेरिका की गलतियों का जमकर फायदा उठाया। अमेरिका और चीन में ट्रेड वार की वजह से चीन और रूस के रिश्ते काफी गहरे हुए हैं। रूस रणनीतिक संबंधों के जरिये आर्थिक स्थिति सुधार रहा है। 

दुनिया में सबसे अधिक तेल उत्पादन रूस करता है। वह दुनिया भर के देशों की तेल और हथियारों की जरूरत पूरी कर रहा है। रूस भारत का अभिन्न मित्र रहा है। दरअसल पुतिन ने महान रूस की छवि बनाने के लिए राष्ट्रवाद, सेवा और धर्म को बढ़ावा दिया। उन्होंने जनता को महान रूसी पहचान पर गर्व करना सिखाया। उन्होंने लोगों को भरोसा दिया ​ कि रूस का नेतृत्व मजबूत हाथों में है। वह जनता को आभास दिलाने में सफल रहे कि वे एक लोकतंत्र में रहते हैं। पुतिन की छवि एक ऐसे माचोमैन के रूप में उभरी जो  किसी से नहीं डरता। यूक्रेन में फौजी दखल हो या क्रीमिया को रूस में मिलाने का निर्णय या फिर सीरिया में सरकार विरोधी विद्रोहियों पर बमबारी।

पुतिन ने हर जगह अपनी ताकत दिखाई है। पु​ितन 12 साल और राष्ट्रपति रहे तो वह पूर्व सोवियत तानाशाह जोसफ स्टालिन का भी रिकार्ड तोड़ेंगे। स्टालिन ने 29 वर्ष तक शासन किया था। स्टालिन के तानाशाह होने के बावजूद रूस सुपर पावर बना तो उसके पीछे स्टालिन का बहुत बड़ा हाथ था। पुतिन के कार्यकाल में रूस में बेरोजगारी और गरीबी आधी से ज्यादा कम हुई है। हाे सकता है कि कुछ लोग पुतिन को तानाशाह करार दें लेकिन वह रूस की जनता की नजर में महानायक हैं। उनके व्यक्तिगत जीवन की कई दिलचस्प कहानियां हैं लेकिन लोगों की नजर में वह मसीहा ही बने हुए हैं।