BREAKING NEWS

ओमीक्रॉन वेरिएंट: केंद्र ने तीसरी लहर की संभावना पर दिया स्पष्टीकरण, कहा- पहले वाली सावधानियां जरूरी ◾जुबानी जंग के बीच TMC ने किया दावा- 'डीप फ्रीजर' में कांग्रेस, विपक्षी ताकतें चाहती हैं CM ममता करें नेतृत्व ◾राजधानी में हुई ओमीक्रॉन वेरिएंट की एंट्री? दिल्ली के LNJP अस्पताल में भर्ती हुए 12 संदिग्ध मरीज ◾दिल्ली प्रदूष्ण : केंद्र सरकार द्वारा गठित इंफोर्समेंट टास्क फोर्स के गठन को सुप्रीम कोर्ट ने दी मंजूरी ◾प्रदूषण : UP सरकार की दलील पर CJI ने ली चुटकी, बोले-तो आप पाकिस्तान में उद्योग बंद कराना चाहते हैं ◾UP Election: अखिलेश का बड़ा बयान- BJP को हटाएगी जनता, प्रियंका के चुनाव में आने से नहीं कोई नुकसान ◾कांग्रेस को किनारे करने में लगी TMC, नकवी बोले-कारण केवल एक, विपक्ष का चौधरी कौन?◾अखिलेश बोले-बंगाल से ममता की तरह सपा UP से करेगी BJP का सफाया◾Winter Session: पांचवें दिन बदली प्रदर्शन की तस्वीर, BJP ने निकाला पैदल मार्च, विपक्ष अलोकतांत्रिक... ◾'Infinity Forum' के उद्घाटन में बोले PM मोदी-डिजिटल बैंक आज एक वास्तविकता◾TOP 5 NEWS 03 दिसंबर : आज की 5 सबसे बड़ी खबरें◾विशेषज्ञ का दावा- 'ओमीक्रॉन' वेरिएंट से मरने की आशंका कम, जानें किन अहम कदमों को उठाने की जरूरत ◾SC की फटकार के बाद 17 उड़न दस्तों का हुआ गठन, बारिश के बावजूद 'गंभीर' श्रेणी में बनी है वायु गुणवत्ता ◾Today's Corona Update : देश में मंडरा रहा 'ओमिक्रॉन' वैरिएंट का खतरा, 9216 नए मामलों की हुई पुष्टि ◾लोकसभा : CBI-ED निदेशकों के कार्यकाल वाले बिल को आज पेश करेगी सरकार, विपक्ष कर सकता है विरोध ◾'ओमिक्रॉन' के खतरे के बीच दक्षिण अफ्रीका से जयपुर लौटे एक ही परिवार के 4 लोग कोरोना पॉजिटिव◾कोरोना के मुद्दे पर विपक्ष ने किए केंद्र से सवाल, सदन में उठे महामारी के विभिन्न पहलु, जानें सरकार के जवाब ◾World Corona Update : संक्रमण के कुल मामले 26.41 करोड़, 8.07 अरब लोगों का हुआ टीकाकरण ◾कर्नाटक : 'ओमिक्रॉन' के दो मरीज मिलने के बाद मुख्यमंत्री ने बुलाई उच्च स्तरीय बैठक, अधिकारियों के साथ करेंगे चर्चा ◾ दिल्ली : केंद्र सरकार के नीट पीजी पर लिए गए फैसले के खिलाफ डॉक्टरों ने की हड़ताल, ओपीडी सेवा भी रही प्रभावित ◾

अपने जवानों की दुःखद शहादत

स्वतंत्र भारत केे इतिहास में राज्यों के बीच सीमा विवाद और जल विवाद कोई नई बात नहीं, लेकिन जब​ हिंसा की लपटें उठती हैं तो लोग मरते हैं, घर जलते हैं। भारत और चीन के मध्य सीमा पर तनाव के बीच भारत के दो उत्तर पूर्वी राज्यों असम और मिजोरम के बीच सीमा विवाद भड़कने के दौरान ​उपद्रवियों द्वारा की गई फायरिंग में असम पुलिस के 5 जवानों की मौत और 80 लोगों का घायल होना काफी दुखद है। यह कौन सी कटुता है जिसने अपने ही देश के जवानों का खून कर दिया। असम पुलिस के जवानों की शहादत के बाद मिजोरम पुलिस या लोगों द्वारा जश्न मनाए जाने की खबरें और भी चिंता पैदा करने वाली हैं। केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत विस्व सरमा और मिजोरम के मुख्यमंत्री जोराम थांगा से बातचीत से ​सीमा विवाद का समाधान निकालने को कहा।

फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि उत्तर पूर्वी राज्यों के बीच सीमा को लेकर तनाव क्यों बढ़ जाता है। इसमें कोई संदेेह नहीं कि उत्तर पूर्वी राज्यों के लोग अपनी संस्कृति, भाषा और अपनी अलग पहचान बनाए रखने को लेकर काफी संवेदनशील हैं। लेकिन असम और मिजोरम के बीच सीमा विवाद के ऐतिहासिक और संवैधानिक पहलु हैं। अलग-अलग सोच और समझ को लेकर अक्सर राज्य आमने-सामने आ जाते हैं। असम संवैधानिक सीमा के पालन की बात करता है लेकिन असम से अलग हुए दूसरे राज्य मिजोरम, अरुणाचल, नगालैंड और मेघालय ऐतिहासिक सीमाओं के पालन की बात करते हैं। इस सीमा विवाद की शुरूआत ब्रिटिश काल में ही हो चुकी थी, जो आज तक हमारा पीछा नहीं छोड़ रहा। अंग्रेजों ने 1824-26 में एंग्लो-बर्मी युद्ध में असम को पराजित कर पूर्वोत्तर भारत में प्रवेश किया था। युद्ध के बाद अंग्रेजी सरकार ने इस क्षेत्र पर नियंत्रण कर लिया और 1873 में ब्रिटिश सरकार ने बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन अधिनियम के रूप में अपनी पहली प्रशासनिक नीति लागू की थी। इस नीति का मकसद स्वदेश जनजातियों की संस्कृति और पहचान को सुरक्षित करना था। अंग्रेजी सरकार ने इसी नीति के माध्यम से पूर्वोत्तर के प्राकृतिक संसाधनों का जमकर दोहन किया। 

अंग्रेजों की सरकार ने प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए अंदरूनी सीमाओं में बदलाव किया था। असम-मिजोरम सीमा विवाद अंग्रेजों के राज में जारी दो अधिसूचनाओं से उपजा। पहली अधिसूचना 1875 को जारी की गई, जिसने लुशाई हिल्स को कंधार के मैदानी इलाकों से अलग किया। दूसरी अधिसूचना 1933 को जारी की गई जिसने लुसाई हिस्स और मणिपुर के बीच सीमा तय की गई। मिजोरम का मानना है कि सीमा का निर्धारण 1895 की अधिसूचना के आधार पर होना चाहिए। मिजोरम के नेता 1933 की अधिसूचना को स्वीकार ही नहीं करते। 

­असम और ​मेघालय में भी हिंसक झड़पें होती रही हैं। 1979 और 1985 में हुई दो हिंसक घटनाओं में कम से कम सौ लोगों की मौत हुई थी। असम और अरुणाचल में वर्ष 1992 में हिंसक झड़प हुई थी। तभी से दोनों पक्ष एक-दूसरे पर अवैध अतिक्रमण और हिंसा करने के आरोप लगाते रहते हैं। अगस्त 2014 में असम के गोला घाट जिले उरियाधार में नगालैंड सीमा पर जबर्दस्त  हिंसा हुई थी जिसमें 11 से अधिक लोग मारे गए थे।

इनर लाइन परमिट भी असम के साथ कम से कम चार राज्यों के सीमा विवाद का मुख्य कारण है। अरुणाचल, नगालैंड, मिजोरम और मेघालय में इनर लाइन परमिट प्रणाली लागू है। इसके बिना बाहर का कोई भी व्यक्ति इन राज्यों में नहीं पहुंच सकता। लेकिन इन राज्यों के लोग बिना किसी रोक-टोक के असम में आवाजाही कर सकते हैं। मिजोरम-असम सीमा पर तनाव तो जून से ही जारी था, जब असम पुलिस ने गांव से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित एक इलाके पर कब्जा कर लिया था और अतिक्रमण हटा दिया था। तब अज्ञात लोगों ने आईआईडी से पुलिस पर हमला कर दिया था। असम का कहना है कि यह जमीन उसकी है जबकि मिजोरम का कहना है कि असम ने उनके लगभग 509 वर्गमील इलाके पर कब्जा किया हुआ है। असम में भाजपा सरकार है तो मिजोरम में मिजोरम नेशनल फ्रंट की सरकार है। सीमा विवाद में अपने ही देश के 5 पुलिस जवानों की शहादत होना कोई शुभ  संकेत नहीं है। पूर्वोत्तर राज्यों के ​सीमा विवाद का स्थाई समाधान केन्द्र और राज्य सरकारों को निकालना ही होगा, अन्यथा लोगों का खून बहता ही रहेगा। इन राज्यों को अतीत की घटनाओं से मुक्ति पानी ही होगी।