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बच्चों के लिए ‘सुरक्षा कवच’

कोवैक्सीन कोरोना टीके को बच्चों के लिए आपातकालीन उपयोग की मंजूरी मिलना राहत की खबर है। यद्यपि अभी डीसीजीआई के विशेषज्ञों ने विस्तृत विचार-विमर्श के बाद इसके उपयोग की सिफारिश की है। इस कोवैक्सीन को भारत बायोटेक और आईसीएमआर ने मिलकर बनाया है। इस वैक्सीन को डीसीजीआई की मंजूरी भी जल्द मिलने की उम्मीद है और इस संबंध में विस्तृत गाइड लाइन्स का इंतजार किया जा रहा है।

18 वर्ष की आयु से अधिक उम्र के लोगों के लिए वैक्सीनेशन अभियान 16 जनवरी को चरणबद्ध ढंग से शुरू किया गया था। देश में अब तक लगाई गई कोविड-19 रोधी टीकों की कुल खुराक की संख्या मंगलवार तक 96 करोड़ पार कर चुकी है और कुछ दिनों में यह संख्या सौ करोड़ तक जा पहुंचेगी। पहले स्वास्थ्य कर्मियों को प्राथमिकता दी गई। कोरोना योद्धाओं का वैक्सीनेेशन करने के बाद 18 से 45 वर्ष के आयु वर्ग के लिए टीकाकरण शुरू किया गया। हमने एक दिन में एक कराेड़ टीके लगाने का कीर्तिमान भी बनाया है।

कोरोना वायरस की दूसरी लहर मंद पड़ने के बाद बड़ी कक्षाओं के लिए तो स्कूल खुल चुके हैं, अब सवाल सबके सामने है कि पहली से आठवीं तक के स्कूल कब खोले जाएं। कई राज्यों ने स्कूल तो खोल दिए लेकिन अभिभावक छोटे बच्चों  को स्कूल भेजने का जोखिम उठाने को तैयार नहीं। अभिभावकों में बच्चों की महामारी की सुरक्षा को लेकर पूरा विश्वास नहीं है। यद्यपि स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा है कि जहां अभी को​िवड की पॉजिटिवटी रेट 5 फीसदी से कम है उन इलाकों के स्कूलों को खोलने पर विचार किया जा सकता है। भारत बायोटेक के अलावा जाइडस कैडिला ने भी 12 से 18 वर्ष आयु वर्ग के लिए अपने डीएनए आधारित कोविड टीके का ट्रायल समाप्त कर लिया है लेकिन कीमत को लेकर पेंच फंसा हुआ है। यूरोप में 12 से 17 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए माडर्ना के इस्तेमाल की अनुमति तो जुलाई माह में ही दी जा चुकी है। 

अमेरिकी वैक्सीन निर्माता माडर्ना और फाइजर भारत को टीकों की सप्लाई करने से पहले एक इंडेम्निटी क्लॉज पर जोर दे रहे हैं। ऐसी स्थिति में विशेषज्ञों की समिति ने बच्चों के लिए कोवैक्सीन को ही बेहतर विकल्प माना है। ट्रायल्स में बच्चों को भी बड़ों की तरह दो वैक्सीन लगाई गईं और देखा गया कि इसमें बच्चों को किसी भी तरह के नुक्सान की कोई खबर नहीं आई।

दुनिया भर में अभी बच्चों को लगने वाले वैक्सीन पर रिसर्च जारी है लेकिन इस बीच क्यूबा दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया है जहां दो वर्ष से ऊपर के बच्चों को पिछले माह से वैक्सीन देना शुरू कर दिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस कम्युनिस्ट देश में बच्चे को​ विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्वीकृति पा चुकी वैक्सीन नहीं, बल्कि देश में तैयार किया गया टीका दिया गया है। लगभग 1.12 करोड़ की जनसंख्या वाले इसे कैरीबियाई देश में सरकार स्कूल खोलने से पहले ही सभी बच्चों को टीका लगाना चाहती है। कुछ और देशों में अभी 12 साल से ज्यादा उम्र के बच्चों को ही टीका लगाया जा रहा है लेकिन चिली में 6 से 12 वर्ष के बच्चों के लिए चीन की साइनोवैक वैक्सीन को मंजूरी दी गई है।

देश में 18 वर्ष से कम करीब 44 करोड़ बच्चे हैं। पिछले दो वर्ष के अनुभव से पता चलता है कि बच्चों में संक्रमण या गम्भीर बीमारी पर मृत्यु की सम्भावना न के बराबर होती है। फिर भी कोई भी सरकार बच्चों को लेकर जोखिम नहीं उठा सकती। क्योंकि महामारी मंद जरूर हुई है लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है। हालांकि बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए जितनी जल्दी प्राथमिक स्कूल खोल सकें, यह अच्छा ही होगा लेकिन कोई भी फैसला लेने से पहले टीकों के प्रभाव का आकलन जरूरी होता है। इसलिए स्वास्थ्य मंत्रालय बच्चों के टीके को लेकर सतर्कता बरत रहा है।

अगला मोर्चा अब बच्चों के लिए लगाया जाएगा। बच्चों को टीका लगाने की जरूरत इसलिए भी है कि क्योंकि उन्हें भी इसका संक्रमण हुआ है। दूसरी लहर के दौरान बड़ी संख्या में बच्चे संक्रमित हुए, हालांकि उन्होंने इम्युनिटी प्राप्त कर ली लेकिन डर ​​फिर भी बना हुआ है। जिन बच्चों को कोई कोरोना संक्रमण नहीं हुआ और उन्हें यह वैक्सीन लग जाती है तो उनके लिए भी यह कोरोना के खिलाफ सबसे सुरक्षित तरीका होगा। अभी बच्चों की वैक्सीन पर्याप्त मात्रा में नहीं होगी इसलिए बच्चों की वैक्सीन भी चरणबद्ध से लगाए जाने के लिए दिशा-निर्देश तय ​किए जा रहे हैं। इसके लिए प्राथमिकता उन बच्चों को दी जाएगी जो पहले से ही अन्य बीमारियों से ग्रस्त हैं। जैसे-जैसे बच्चों का वैक्सीनेशन होता रहेगा। अभिभावकों का आत्मविश्वास भी बढ़ता जाएगा। अगर कोई तीसरी लहर आती भी है तो बच्चों को वैक्सीन लगी होने से उनके आसपास के सभी लोगों को प्रोटेक्शन मिल जाएगी। ​शिक्षा का सर्किल तभी पूरा होगा जब पहली कक्षा से 12वीं कक्षा तक के स्कूल पूरी तरह खुल जाएं। पहले ही शिक्षा में काफी नुक्सान हो चुका है, इसलिए बच्चों को ‘सुरक्षा कवच’ प्रदान करना बहुत जरूरी है। अभिभावकों को भी स्वयं अपने बच्चे को वैक्सीनेशन के लिए तैयार रहना चाहिए।

आदित्य नारायण चोपड़ा

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