आज के जमाने में अपने पांव पर खड़ा होना सबसे जरूरी है। इसीलिए माता-पिता अपने बच्चों को महंगी से महंगी स्कूली और कालेज शिक्षा दिलाकर यह कामना करते हैं कि उनके बच्चे अपने पांव पर खड़े होकर अपनी जिन्दगी की गाड़ी को चलाएं। जबकि एक आम व्यापारी भी यही चाहता है कि वो अपना धंधा जमाए ताकि अपने परिवार से जुड़े सदस्यों की जिन्दगी लंबी पीढ़ी तक सही तरीके से चलती रहे। आपको रोजी-रोटी कमाने का अधिकार संविधान ने दिया है तो क्या इसमें कोई अवरोधक बन सकता है?

सीलिंग एक ऐसा ही अवरोधक है जिसने व्यापारियों का कारोबार और आम मजदूर और जमीनी आदमी की रोजी-रोटी तबाह करके रख दी है। व्यापारियों ने अपने खून-पसीने से लाखों रुपया खर्च करके दुकानें बनाई और सीलिंग ने एक ही झटके में इन्हें तबाह कर दिया तो बताओ दिल्ली की शान कैसे बची रहेगी? उनकी दुकान और घर सबकुछ तबाह हो गया।

पिछले दिनों सीलिंग ने दिल्ली में व्यापार के दुनियाभर के बड़े केन्द्रों को हिला कर रख दिया जिसका असर न सिर्फ राजधानी से लेकर देश के कोने-कोने तक बल्कि दुनियाभर के बड़े शहरों पर पड़ सकता है। चांदनी चौक, कश्मीरी गेट, करोल बाग, पहाड़गंज, साउथ एक्सटेंशन, छतरपुर, लाजपत नगर, पटेल नगर, आईएनए मार्किट, आनंद पर्वत क्षेत्र इत्यादि में जिस तरह से बरसों से चल रही दुकानों और कारोबार पर लाल मुहरबंद निशान अर्थान सीलिंग कर दी गई। लिहाजा हर कोई परेशान है।

सोशल साइट पर सबसे ज्यादा भावनाएं दिल्ली के व्यापारी आैर कारोबारी ही शेयर कर रहे हैं जिसमें ये कहा गया है- कमल का फूल हमारी भूल है। सीलिंग को लेकर जिस तरह से मास्टर प्लान 2021 में संशोधन को लेकर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया तो उसे यही जवाब मिला कि दादागिरी बंद करो। पहले अपनी मर्जी से सीलिंग शुरू करते हो और फिर मास्टर प्लान में अमेंडमेंट लाने की बात कहकर चुपचाप निकल जाना चाहते हो कोर्ट इसे बर्दाश्त नहीं करेगी। अनधिकृत निर्माण की बात आपने शुरू की, आपकी एजेंसियों ने कार्रवाई शुरू की और अब मास्टर प्लान की आड़ लेकर कह रहे हो की मास्टर प्लान में संशोधन करने की इजाजत दी जाए। यह नहीं चलेगा।

सुप्रीम कोर्ट तो सुप्रीम है और इस न्याय के मंदिर के बड़े-बड़े देवता रूपी न्यायाधीशों ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि दिल्ली के सीएम अरविन्द केजरीवाल के खिलाफ अपमानजनक भाषा इस्तेमाल की जा रही है तो आप चुप हैं। कल पीएम के खिलाफ अभद्र भाषा इस्तेमाल की जाती है तो क्या आप चुप रहेंगे। अहम बात यह है कि भाजपा सरकार इस मामले पर प्रचंड बहुत के बावजूद अगर सीलिंग को लेकर लोकसभा में कोई बिल तक नहीं पारित करवा सकती तो फिर इतने प्रचंड बहुमत का क्या फायदा? 2019 या 2024 के बड़े-बड़े मेकिंग इंडिया के सपनों पर कौन भरोसा करेगा। देश के निर्माण में या मेकिंग इंडिया की कल्पना देश के दुकानदार, व्यापारी या उद्योगपति के बगैर अधूरी है।

व्यापारी अपने कारोबार की तबाही के विरोध में सड़क पर उतर चुके हैं। दर्जनों बार दिल्ली बंद हो चुकी है। देश को चलाने में अपना भरपूर योगदान देने वाले व्यापारियों के कारोबार तबाह हो चुके हैं और वे सड़कों पर आ चुके हैं। अनेक व्यापारी नेता दिल्ली बंद के दौरान यह कहते रहे कि एक जीएसटी विधेयक लाने के लिए सरकार जो चाहे कर सकती है विपक्ष को भी अपने साथ जोड़ सकती है परन्तु सीलिंग के लिए कुछ नहीं किया। बिल लाना तो दूर व्यापारियों आैर उनके परिवारों को सड़कों पर लाकर आंदोलन के लिए मजबूर कर दिया, इस सरकार को व्यापारी सही वक्त पर जवाब देगा।

अहंकार में चूर सरकार को हम देंगे जवाब आैर हमें जिन्दा लाश ना बनाओ तथा मोदी सरकार होश में आओ, होश में आओ जैसे नारे दिल्ली बंद के दौरान अब आम सुनाई देते हैं। सोशल साइट पर सरकार के खिलाफ लोग अपनी भावनाओं की शेयरिंग से जेहाद छेड़ चुके हैं। ऐसे हालात में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जो आम आदमी के प्रतिनिधि हैं ने जहां-जहां सीलिंग हुई खुद जाकर उसके खिलाफ आवाज बुलंद की तो अब यही केजरीवाल मर्द का बच्चा बनकर सीलिंग के खिलाफ बहुत जल्द भूख हड़ताल शुरू करने वाले हैं। पहली बार एक सीएम केंद्र सरकार के खिलाफ व्यापारियों के समर्थन में सड़क पर उतरने जा रहा है और बड़े-बड़े व्यापार संघ उनका साथ दे रहे हैं।

आने वाले दिनों में दिल्ली में इसी सीलिंग को लेकर हालात विस्फोटक हो सकते हैं। याद रखना इसी केजरीवाल को दिल्ली वालों ने सिर आंखों पर बैठा कर कुल 70 में 67 सीटें दी थी और अयोग्यता की गाज जिस तरह से आप के 21 विधायकों पर गिराई गई यह सबकुछ सहानुभूति के तौर पर केजरीवाल के साथ ही जा रहा है। लोग कह रहे हैं कि यह भाजपा दिल्ली में महज तीन सीटों पर है तो उसका मतलब है लोग उसे स्वीकार नहीं कर रहे।

1993 के बाद से वह सत्ता से दूर है। ऐसे में अगर वह व्यापारियों और व्यापारियों से जुड़े मजदूरों और अन्य कामगरों की रोजी-रोटी को अपने सीलिंग की दुधारू तलवार से तबाह कर रही है तो राष्ट्र को संवारने के उसके सपनों को कौन पूरा करेगा। व्यापारी एकजुट होकर अगर सरकार को टारगेट पर ले रहा है तो इसका जवाब सरकार को खुद ढूंढना होगा वरना सही वक्त पर कार्रवाई न करने से यही जवाब मिलेगा- डाक्टर के आने से पहले ही मरीज दम तोड़ चुका है।