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आतंक षड्यंत्र अभी जारी है

अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के बाद 30 नवम्बर, 2021 के बीच जम्मू-कश्मीर में 366 आतंकवादी मारे जा चुके हैं। आतंकवादी सरगनाओं की उम्र अब केवल कुछ महीने ही बची है। सुरक्षा जवानों, पुलिसकर्मियों और अप्रवासी मजदूरों की हत्याएं करने वाले आतंकवादियों का सफाया किया जा चुका है। आतंकवादियों ने कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाकर एक बार फिर से हिन्दुओं के पलायन का षड्यंत्र रचा था लेकिन सुरक्षा बलों ने ढूंढ-ढूंढ कर आतंकवादियों को मार ​गिराया । अब एक तरफ जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल करने की कोशिश की जा रही है।  आज न सिर्फ आतंकी गतिविधियों से प्रभावी ढंग से निपटा जा रहा है बल्कि लोगों की तस्वीर के साथ-साथ तकदीर बदलने के प्रयास किए जा रहे हैं। 

गृहमंत्री अमित शाह की दृढ़ राजनीतिक इच्छा शक्ति के चलते कश्मीर में काफी बदलाव आ रहा है। तीन दशक में पहली बार कश्मीर के सभी जिले  पर्यटकों के ​लिए  खोले गए। पहले पर्यटक श्रीनगर, बड़गांव, बारामूला और अनंतनाग ही जा पाते थे। इस बार कुपवाड़ा के तंगधार, बंगस, बांदीपुरा का गुरेज, पुलवामा का शिकारगाह जैसे पर्यटन स्थलों ने सैलानियों का स्वागत किया। इस वर्ष गुलमर्ग जैसे हिल स्टेशन के होटल सौ फीसदी तक बुक रहे। पर्यटकों की आमद का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि श्रीगर एयरपोर्ट से रोज 40 से अधिक उड़ानें अप-डाउन हो रही हैं। जम्मू-कश्मीर के जिन युवाओं के हाथों में पत्थर होते थे, आज उनके हाथों में कलम और रोजगार का इंतजार कर रहे हैं। केन्द्र द्वारा ऐसी  योजनाएं शुरू की गई हैं जिनका लाभ युवाओं को ​मिले  ताकि वे जीवन में एक प्रगतिशील रास्ता चुन सकें।

यह सब पाकिस्तान सम​र्थित आतंकवादी संगठनों को बर्दाश्त नहीं हो रहा और  वह पूरी तरह बौखला चुके हैं। श्रीनगर के जेवन इलाके में भारतीय ​रिजर्व पुलिस बल की बस पर अंधाधुंध फायरिंग किया जाना उनकी बौखलाहट का परिणाम है। इस हमले में एक एएसआई समेत 3 जवान शहीद हो गए जबकि 12 जवान घायल हो गए। बस में नौवीं बटालियन के जवान सवार थे जो ड्यूटी देकर लौट रहे थे। इस घटना से एक दिन पहले सीमापार से घुसपैठ करने वालों के दल में शामिल एक महिला आतंकी को सुरक्षा बलों ने मार गिराया था। इसके दो दिन पहले बांदीपोरा में आतंकियों ने सुरक्षा बलों पर ग्रनेड हमला किया था, जिसमें दो जवान शहीद हो गए थे।

पुलिस की बस पर हमला करने की साजिश किसी कमजोर संगठन का काम नहीं माना जा सकता। यह हमला एक तरह से पुलवामा जैसे नरसंहार को दोहराना ही था। दूसरी तरफ सीमा पार से घुसपैठ की कोशिशें इस बात की ओर संकेत करती हैं कि पाकिस्तान की जमीन से कश्मीर में फिर से अशांति फैलाने के षड्यंत्र जारी हैं। घाटी में आतंकी घटनाएं थोड़े-थोड़े अंतराल पर हो रही हैं जो इस बात की ओर इशारा करती हैं कि आतंकवादी संगठन किसी बड़ी वारदात की ताक में हैं। आतंकवादियों को पनाह देने के मामले में स्थानीय लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है। आतंकवादियों को वित्त पोषण करने वालों की धरपकड़ भी हो रही है। मगर जिस  तरह से श्रीनगर और उसके आसपास आतंकवाद सिर उठा रहा है उससे चिंता बढ़नी स्वाभाविक है। जवानों की शहादत हमारे लिए बहुत दुखद है। पाकिस्तान की जमीन पर तैयार किए जा रहे आतंकवादी कश्मीर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को छिन्न-भिन्न करने का प्रयास करेंगे। इस मिथ्या धारणा का अब कोई स्थान नहीं रह गया कि जहालन और गरीबी मुस्लिम युवाओं को आतंकवाद की ओर मोड़ रही है। वास्तव​ में मजहबी कट्टरता और धर्मांधता है जो जिहादी आतंकवाद को खाद-पानी दे रही है। यह किसी से ​छिपा हुआ नहीं है कि कई तरह के आतंकी समूह और उनके समर्थक सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं। हाल ही में केरल और बंगाल में गिरफ्तार आतंकी सोशल मीडिया के जरिये ही पाकिस्तान स्थित अपने आकाओं से जुड़े थे। वास्तव में कट्टरपंथी विचारधारा के चलते ही देश में आतंकियों की जमीन तैयार हो रही है।

हमारा अब तक अनुभव बताता है कि सूर्य चाहे शीतल हो जाए, नदियां चाहे अपनी दिशाएं बदल दें, हिमालय चाहे ऊषण हो जाए परन्तु पाकिस्तान कभी सीधे रास्ते पर नहीं आ सकता। शांति वार्ताएं, विश्वास बहाली के उपाय, समझौता एक्सप्रैस और मैत्री बस सब बेकार ही  हुआ। प्रश्न यह है कि विश्व को अगर विनाश से बचाना है तो एक मुल्क को ठीक उसी तरह से घेर कर विनष्ट करना होगा जिस तरह भयानक भेडि़ये को जो नरभक्षी हो जाता है, उसे घेर कर समाप्त किया जाए ताे यह विश्व  मंगल का कार्य होगा। दुनिया को जमीनी सच को पहचानना ही होगा। भारत को भी कश्मीर में ऐसी रणनीति अपनानी होगी कि आतंकवादी किसी भी तरह की अस्थिरता पैदा न कर सकें। नुक्सान आतंकवादियों को हो, हमारे जवानों का खून न बहे, देश की ​किसी  बेटी का सुहाग न उजड़े, उसका क्रन्दन हमें सुनाई न दे। कश्मीर आतंकवादियों का मरघट बने तभी वहां अमन होगा। हमें कश्मीर पर हर षड्यंत्र को विफल करना होगा।