भारत के बारे में कहा गया है कि यह एक अमीर देश है परंतु इसके निवासी गरीब हैं। यहां का लोकतंत्र सारी दुनिया में सबसे बड़ा है और हम दुनिया की सबसे बड़ी विकासशील अर्थव्यवस्था वाले राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ रहे हैं। इसी अर्थव्यवस्था में हमारे यहां लोगों को घरों का सपना दिखाने वाले उद्योगपति किस तरह लूट लेते हैं और कितना लूट चुके हैं और कब तक लूटते रहेंगे, इस तथ्य को भी एक विशेषता के रूप में शामिल कर लेना चाहिए। चौंकाने वाला सच यही है कि देश में किस तरह बिल्डर लॉबी ने आम जनता को लूटा है। गांव से लेकर शहरों तक किस प्रकार खाली पड़ी जमीन पर सीमेंट के शहर बनते चले जा रहे हैं।

आम्रपाली एक ऐसा ही बिल्डर ग्रुप है जिसने लोगों को घर बनाने का सपना दिखाया, उनसे एकमुश्त राशि लेकर 2-4 साल बाद घर बनाकर देने का वादा किया और फिर सारा पैसा हड़प लिया। गरीब और मध्यम वर्गीय लोगों के अलावा सम्पन्न लोगों से पैसा इकट्ठा किया। इस धन को अपने बाप की जागीर समझकर इस्तेमाल करना शुरू किया। फाइव स्टार बना लिया, खून चूसने के लिए स्कूल बना लिए, सैकड़ों लक्जरी कारें खरीद लीं और कई प्रॉपर्टियां इसी तरह इकट्ठे करते हुए अपने लूट के बाजार को चमकाए रखा। इसीलिए पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने इस ग्रुप के फाइव स्टार होटल, 86 से ज्यादा लक्जरी कारें जब्त करने का जो फरमान जारी किया है इस फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए।

सोशल साइट्स पर लोग एक-दूसरे से कह रहे हैं कि स्वर्ग और नरक सब यहीं है। जो जैसा करेगा वो वैसा भरेगा। हमारे देश में काले धन का शोर बहुत ज्यादा मचा हुआ है। स्विट्जरलैंड तक के बैंकों में भारतीय लोगों का काला धन जमा होने का शोर पूरे देश में है परंतु हमारा मानना है कि एक बार दिल्ली से बाहर कदम रखते ही पड़ोसी शहर अपनी पहचान खोकर 15-15, 20-20 मंजिलों के अपार्टमेंटों के रूप में खड़े हैं। इन अपार्टमेंट्स को बनाने वाले ज्यादातर बिल्डर ग्रुप आज भी अनेक केसों का सामना अदालतों में कर रहे हैं।

आम्रपाली ग्रुप तो एक वह लुटेरा था जिसने लोगों का शत-प्रतिशत पैसा घर के सपने दिखाने के धंधे के जरिए लूटा। इसीलिए वह नपा गया जबकि बाकी लोग भी जो अन्य बिल्डरों के सपने दिखाने के धंधे में फंसे हुए हैं, आज भी अपने घर लेने की दरकार में हैं। उन्होंने पूरे पैसे दे रखे हैं पर उन्हें कब्जा नहीं मिल रहा है। हम तो यही कहेंगे कि जिन लोगों को कब्जा नहीं मिला या जो आम्रपाली की तरह अन्य बिल्डरों के सताए हुए हैं वो तुरंत सुप्रीम कोर्ट जाएं। हमारी गारंटी है कि वहां उन्हें तुरंत इन्साफ मिलेगा।

हमारा यह मानना है कि आज भी कई और बड़े-बड़े ग्रुप हैं जिनमें जेपी बिल्डर एक बहुत बड़ा नाम है। लोगों काे घर अगर पैसा देने के बावजूद नहीं मिलते तो ये लोग बड़ी चतुराई से मकान बनाने में असमर्थता जताकर खुद को दीवालिया घोषित करवाने की प्रक्रिया में लाकर बचना चाहते हैं। इसी कड़ी में सुपरटेक ने जिस तरह से नियमों को रौंद कर लोगों से पैसा बटोरा और इमारतें खड़ी कीं, इन लोगों के खिलाफ जिस तरह सुप्रीम कोर्ट लगा हुआ है हम चाहते हैं कि जल्दी से जल्दी केसों का निस्तारण करके लोगों को उनका पैसा वापस कराया जाना चाहिए। लोगों को यकीन है कि सुप्रीम कोर्ट उनके साथ न्याय जरूर कराएगा।

अभी तो दो दर्जन से ज्यादा बड़े बिल्डर हैं जिनके यूपी, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड इत्यादि में बहुद्देश्यीय निर्माण चल रहे हैं, जिनमें लोगों का पैसा फंसा हुआ है। जितनी जल्दी हो सके इन बिल्डरों के खिलाफ भी एक्शन लिया जाना चाहिए। ये वो बिल्डर हैं जिन्होंने कई बैंकों से अपनी सैटिंग के दम पर अरबों-खरबों के लोन भी ले रखे हैं। पता लगाया जाना चाहिए कि यह लोन लौटाया जा रहा है या नहीं। माफ करना पीएनबी जैसे बैंक घोटाले भी तब सामने आते हैं जब लोग रकम चुकाना बंद कर देते हैं। इस मामले में समय आ गया है कि दीवालियापन की प्रक्रिया शुरू करने के इच्छुक कौन-कौन से बिल्डर हैं अगर वो अपनी स्कीम में कामयाब हो जाते हैं तो इससे उन लोगों को बहुत दिक्कत होगी जिन लोगों ने अपना पैसा इनके पास घर बनाने के लिए दे रखा है।

लोगों को सपने दिखाने और उनका पैसा दुगना-तिगुना करने वालों की भी इस देश में कोई कमी नहीं है। सत्यम का केस भी किसी से छिपा नहीं है। जो लोगों को लूटते हैं उन्हें न सिर्फ सजा दिलाई जानी चाहिए बल्कि उन्होंने लोगों का पैसा कहां-कहां और कैसे-कैसे ठिकाने लगा दिया वह रकम भी वापिस लाई जानी चाहिए ताकि कोई घर बनाने के हसीन सपने दिखाकर किसी को लूट न सके। सुप्रीम कोर्ट की जितनी तारीफ की जाए वह कम है। कई और घोटालों में भी जिस तरह से अब सजा मिलने का दौर शुरू हुआ है, लोगों का न्यायिक व्यवस्था के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है। कागज-पत्रों में अपने आपको मजबूत बनाकर, अखबारों और टीवी में बड़े-बड़े विज्ञापन प्रदर्शित कर लूटने वाले बिल्डर बेनकाब किए जाने चाहिएं। आम्रपाली, सुपरटेक और जेपी जिस तरह से बेनकाब हुए हैं इन्हें एक नजीर माना जाना चाहिए।