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संपादकीय

ये है मोदी सरकार का रोड मैप

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उदाहरण के तौर पर एक देश, एक चुनाव, आतंक के खिलाफ जंग, तीन तलाक विधेयक लाना और सामाजिक सुरक्षा के तहत किसानों, जवानों के साथ-साथ हर भारतीय को मजबूत बनाना इत्यादि सरकार की कुछ ऐसी प्राथमिकताएं हैं जिन्हें सरकार 2024 तक उपलब्धि के रूप में अर्जित करना चाहती है। कुल मिलाकर संसद के केन्द्रीय कक्ष से राष्ट्रपति का यह अभिभाषण एक न्यू इंडिया की तस्वीर खींच रहा है। 

जिस सर्जिकल एयर स्ट्रीक के दम पर भाजपा ने एक ही झटके में 300 से ज्यादा सीटें अपने दम पर पा लीं, उस सुरक्षा को प्राथमिकता से जोड़कर राष्ट्रपति ने पाकिस्तानी आतंकवादी मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित करने की बात कहकर सरकार की कर्त्तव्य परायणता लोगों के सामने प्रस्तुत की। इसके साथ ही जब तीन तलाक व हलाला का जिक्र किया गया तो इसका मतलब यह हुआ कि देश की बहू-बेटियों के सम्मान के लिए यह सरकार हमेशा फ्रंट पर रहेगी। यह बात अलग है कि सरकार राज्यसभा में अटके इस विधेयक को पास कराकर यही संदेश दे रही है कि बहू-बेटियों को समान अधिकार दिलाना भी सरकारों का फर्ज है। इसमें कोई शक नहीं कि मोदी सरकार देश में विकास के लिए वचनबद्ध है और वह एकदम ईमानदार है। उसके काम में पारदर्शिता है। 

लोग उस पर भरोसा करते हैं। इसलिए सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर नारा भी दिया है- सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास। सरकार भविष्य की योजनाओं को सामने रखकर लोगों तक अपनी पहुंच बनाने में सफल रही है। इसीलिये राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने जब संसद के दोनों सदनों को संयुक्त रूप से अपने अभिभाषण के जरिये संबोधित किया तो उन्होंने सरकार का रोड मैप भी देश के सामने रख दिया। राष्ट्रपति ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार बहुत कुछ करना चा​हती है। उसकी प्राथमिकताएं एकदम तैयार हैं और लोगों को भरोसा करना है तथा इस सरकार को काम करने की छूट दी जानी चाहिए। 

किसानों का मामला हो या पेंशन से जुड़े मामलेे हों, सरकार ने अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए बड़े-बड़े काम का वायदा किया है। इतना ही नहीं खुद राष्ट्रपति ने घर-घर पानी पहंुचाने की बात कहकर जल समस्या दूर करने की बात कही है तो वहीं छोटे व्यापारियों और उद्योगपतियों की समस्याओं को दूर करने की बात कही है। शिक्षा के मामले में एक बेहतर नीति तथा रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ सरकार ने स्किल इंडिया का उल्लेख भी किया। हमारा मानना है कि अच्छी नीतियां और अच्छी नीयत सरकार ने दिखाई है लेकिन जो कुछ कहा है इन्हें बड़ी चुनौतियों के रूप में देखा जाना चाहिए। सोशल मीडिया पर लोग कुछ ऐसी टिप्पणियां भी कर रहे हैं जो उनकी आशंकाएं हैं। लोग भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ जंग की बात कहकर अपने सवाल उठा रहे हैं। 

काफी हद तक लोग सही हैं क्योंकि उन्हें जीवन में सहजता चाहिए। एक देश-एक चुनाव को लेकर कांग्रेस पहले ही आक्रामक है और राहुल गांधी तथा उनकी टीम खुलेआम कह रही है कि सरकार देश में केवल एक पार्टी चाहती है। हालांकि एक देश-एक चुनाव की पहल को लेकर प्रधानमंत्री द्वारा बुलाई गई बैठक में कांग्रेस, सपा, बसपा और भाकपा तथा माकपा ने हिस्सा नहीं ​लिया। उन्होंने अपना विरोध जता दिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि देश में साम्प्रदायिक सद्भाव और मजहब को लेकर तृणमूल कांग्रेस और भाजपा ने बंगाल में जो जंग छेड़ी है वह हर किसी के सामने है जिसमें अब तक 15 कार्यकर्त्ता मारे जा चुके हैं, रह-रह कर यह आग और सुलग रही है। 

एक बात पक्की है कि सरकार ने यह संदेश दे दिया है कि वह बहुत कुछ करना चाहती है, यह अच्छी बात है परन्तु हमारा मानना यह है कि जितनी भी योजनाएं और अन्य बातें कही गई हैं उन सबका जमीनी स्तर पर अमल सुनिश्चित किया जाना चाहिए, इससे हर वर्ग का सरकार के प्रति विश्वास और भी बढ़ेगा। आर्थिक मोर्चे पर हर वर्ग का ध्यान रखना एक बड़ी चुनौती है। देश के खजाने में ज्यादा से ज्यादा टैक्स कलैक्शन के माध्यम से धन भरना एक जरूरी बात है। अहम बात यह है कि मुद्रास्फीति और महंगाई पर भी लगाम कसना एक बड़ी चुनौती है। हालांकि विपक्ष पूरी तरह से एकजुट नहीं है और रह-रह कर वह हमले करता रहता है। 

राजनैतिक तौर पर विपक्ष का एक न  होना भाजपा के लिए एक शुभ संकेत है लेकिन यह भी जरूरी है कि एक स्वस्थ लोकतंत्र में विपक्ष की भावनाओं का सम्मान जरूर किया जाना चाहिए। यद्यपि 2014 में भाजपा ने बड़ी शान से अपनी सरकार बनाई और 2019 में इसी नींव पर एक नई सफलता की इमारत खड़ी कर दी, परन्तु  लोकतंत्र में किसी चीज को स्थायी मान लेना एक बड़ी भूल साबित हो सकता है। फिलहाल देशवासियों का सरकार के प्रति विश्वास बना हुआ है तभी तो सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास जैसी बातें सरकार की ओर से की जा रही हैं जिसका सम्मान किया जाना चाहिए। एक दिन में तो कुछ नहीं हो सकता।

 सरकार बहुत कुछ करना चाहती है, लोगों को इंतजार है और भरोसा भी है तभी तो लोग सरकार की हर बात को ध्यान से सुन रहे हैं और तवज्जों दे रहे हैं।  एक सुन्दर भविष्य की तस्वीर मोदी सरकार ने देश के समक्ष रख दी है। हम यही कहेंगे कि साम्प्रदायिक सद्भाव भी जरूरी है क्योंकि हमारे लोकतंत्र में साम्प्रदायिकता के नाम पर सामाजिक नारे देकर जहर घोला जाता रहा है और उम्मीद की जानी चाहिए कि मोदी सरकार लोगों का दिल जीतने में सफल होगी और सुशासन की एक ऐसी नजीर स्थापित करेगी जो भारत की असली पहचान है जिसमें अमन, चैन, विकास और विश्वास सब कुछ भरा हुआ है।