हम उस देश के वासी हैं जहां देशभक्ति की गंगा बहती है…


kiran ji

हमें बहुत गर्व है हम हिन्दोस्तानी हैं, भारतीय हैं, जिनमें देशभक्ति, संस्कार भारतीय परम्पराएं कूट-कूटकर भरी हुई हैं। हमारा भारत देश अनेकताओं में एकता से भरा हुआ है। हमारे में कितना भी मतभेद हो परन्तु जब देश की बात आती है तो सारे मतभेद भुलाकर हम एक आवाज में बात करते हैं चाहे वह क्रिकेट मैच हो, सभी जातियों, धर्मों के लोग भारत की टीम के लिए प्रार्थना करते हैं, हवन करते हैं, तरह-तरह के जोश के गीत बनते हैं, लोग भारत की टीम की टी-शर्ट, कैप पहनते हैं। प्ले ग्राउंड में मुंह पर गालों पर तिरंगा बनाकर बैठे होते हैं। क्या देशभक्ति और अपनी भारतीय टीम के लिए जुनून होता है और जब टीम जीतती है, कैसे जश्न मनाए जाते हैं, कैसे लड्डू-मिठाइयां बांटी जाती हैं, रोशनी की जाती है, पटाखे फोड़े जाते हैं, भंगड़े-डांस किए जाते हैं और वहीं अगर हार जाएं तो ऐसे अफसोस भी मनाया जाता है जैसे कोई सगा-सम्बन्धी (रिश्तेदार) मर गया हो।

यही नहीं अभी-अभी चीन के एक्शन से हर भारतीय की जुबान पर यही है कि ‘मेड इन चाइना’ की बनी वस्तुओं का बहिष्कार करें। मैं बहुत से व्हाट्सएप से जुड़ी हूं। अश्विनी जी के निर्वाचन क्षेत्र से बहुत से ग्रुप से जुड़ी हूं। चाहे युवा हों, महिलाएं हों या पुरुष, सबके ग्रुप में एक ही मैसेज चल रहा है। करनाल की समाजसेविका रजनी शर्मा हर ग्रुप में यह संदेश भेज रही हैं कि राखी पर न तो विदेशी राखियां खरीदो, न गिफ्ट खरीदो। इससे अच्छा भारतीय धागा बांधो क्योंकि भारतीय धागों का पैसा भारतीयों पर खर्च होगा। चीन की वस्तुएं खरीदेंगे तो वह चीन में जाएगा और वह हमारे अगेंस्ट ही इसे इस्तेमाल करेंगे। यही नहीं कल मुम्बई के स्कूल की प्रिंसिपल एसोसिएशन ने भी यही फैसला लिया और स्कूल के बच्चों को संदेश दिया कि न तो वह चाइनीज खिलौने लेंगे, न बैग, न टिफिन बाक्स, न पानी की बोतल लेंगे क्योंकि यह सारा पैसा चाइना को जाएगा और यह शुरूआत बच्चों से ही होनी चाहिए अगर हम चाइना को सबक सिखाना चाहते हैं क्योंकि अकेले मुम्बई में ही स्कूली बच्चों के सामान का लगभग 100 करोड़ का व्यापार होता है।

यही नहीं अभी जब अमरनाथ यात्रियों पर हमला हुआ तो वह देशभक्तों और प्रभुभक्तों की आस्था को हिला नहीं सके। बहुत से लोगों ने कहा कि चाहे जितने भी हमले हो जाएं, हम बार-बार जाते रहेंगे। आतंकी कुछ भी कर लें, हम डरेंगे नहीं। यही नहीं ड्राइवर सलीम शेख, जिसने अपनी सूझबूझ से 50 जानें बचाईं, उसने बताया कि जैसे ही उसे हमले का अहसास हुआ उसने बस की गति तेज कर दी और पहली कोशिश थी बस को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की। उसने बस नहीं रोकी। यह है हिन्दोस्तानी मुस्लिम की देशभक्ति और न तो अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले रुके न वहां सेवा देने वाले, न लंगर लगाने वाले डरे, बढ़-चढ़कर आगे बढ़ रहे हैं। मैं हाथ जोड़कर प्रभु से हर अमरनाथ यात्री की सुरक्षा की प्रार्थना करती हूं क्योंकि मेरी भी बहुत आस्था जुड़ी है। मैं शिवभक्त हूं, सावन के महीने में व्रत रखती हूं और वह दिन कभी नहीं भूलती जब मैंने अश्विनी जी, सासू मां और अमर शहीद रोमेश चन्द्र (ससुर) जी के साथ अमरनाथ यात्रा की थी। कितनी कठिन है परन्तु जब मन में ठान लो, सभी असम्भव चीजें भी सम्भव हो जाती हैं। कठिन यात्रा भी सुखद हो जाती है। अब तो बर्फानी बाबा को मिलने-दर्शन करने का भक्तों में भक्ति और देशभक्ति का जुनून है। वाकई हम उस देश के वासी हैं जिस देश में देशभक्ति की गंगा बहती है। आओ मिलकर चाइना की वस्तुओं का बहिष्कार करें और मिल-जुलकर हर उस बात का सामना करें जो हमारे देश को कमजोर करने की कोशिश करे।