जहां शस्त्र बल नहीं,
वहां शास्त्र पछताते और रोते हैं
ऋषियों को भी तप में सिद्धि ​तभी मिलती है
जब पहरे में स्वयं धनुर्धर राम खड़े होते हैं।
इतिहास साक्षी है कि भारत में जब भी राक्षसी प्रवृत्तियों ने हमारे शास्त्र और संस्कृति को नष्ट करने के लिए अत्याचार किए तो भगवान राम ने शस्त्रों का प्रयोग किया। भगवान कृष्ण ने भी आसुरी शक्तियों को समाप्त किया। मध्यकालीन इतिहास को देखें तो श्री गुरु अर्जुन देव जी की शहादत से ऐसा मोड़ आया, जिस मोड़ ने सिख गुरुओं की परम्परा काे एक नया आयाम दिया। उनके सुपुत्र श्री गुरु हरगोबिन्द साहब सिखों के छठे गुरु हुए, जिन्होंने दो तलवारें धारण कीं।
-एक तलवार थी-मीरी यानी राजसत्ता की प्रतीक,
-दूसरी तलवार थी-पीरी यानी आध्यात्मिक सत्ता की प्रतीक।
गुरु जी ने ऐलान कर दिया कि ‘शास्त्र की रक्षा के लिए शस्त्र जरूरी है, हम अध्यात्म से पीछे नहीं हटेंगे, अध्यात्म हमारी आत्मा है, हमारी प्यास, हमारा मार्गदर्शक है परन्तु इस पर जुल्म भी नहीं सहेंगे। तलवार के ​जवाब में तलवार उठेगी आैर पूरी ऊर्जा से उठेगी। कई लोगों को गुरु जी का यह रूप देखकर आश्चर्य हुआ। कुछ लोग शंकाग्रस्त भी हो गए। गुरु जी ने सिखों को संदेश दियाः
‘‘गुरु घर में अब परम्परागत तरीके से भेंट न लाई जाए। हमें आज उन सिखों की जरूरत है जाे मूल्यों के लिए अपनी जान तक कुर्बान कर सकें। अच्छे से अच्छे हथियार, अच्छी नस्ल के घोड़े आैर युद्ध में काम आने वाले रक्षक उपकरण लाए जाएं। हम दुश्मन की ईंट का जवाब पत्थर से देंगे।’’

सही अर्थों में संत और सिपाही के चरित्र को एक ही व्यक्तित्व में ढालने का श्रेय श्री गुरु हरगोबिन्द साहब को ही जाता है। गुरु जी की फौजों ने मुगलों के छक्के छुड़ा दिए थे। किसी भी राष्ट्र की सुरक्षा के लिए मजबूत सेना का होना बहुत जरूरी है। राष्ट्रीय नेतृत्व का उत्तरदायित्व है कि वह लगातार अपने देश की सेना को नवीनतम हथियारों से लैस करे, उसके पास कभी भी गोला-बारूद की कमी नहीं होने पाए। निश्चित रूप से आज का भारत 1962 वाला भारत नहीं है जब चीन ने हमारी पीठ में छुरा घोंपा था। यह भी सही है कि हमने चार-चार युद्धों में पाकिस्तान को हराया है। देश के किसी भी भूभाग की रक्षा के लिए भारतीय सेना के पास समुचित योजना है और देश की सीमाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। युद्ध का स्वरूप बदल चुका है। हम छद्म युद्ध लगातार झेल रहे हैं। पाकिस्तान और चीन के षड्यंत्र लगातार जारी हैं इसलिए भारतीय सेना की तैयारी भी उसी के हिसाब से होनी चाहिए।

शुक्रवार को ही रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने देवनाली में दक्षिण कोरिया की के-9 वज्र और अमेरिका से आयातित एम-777 लाइट होवित्जर तोपों को सैन्य परम्परा के तहत भारतीय सेना में विधिवत तौर पर शामिल कराया। के-9 वज्र तोपों का निर्माण मेक इन इंडिया के तहत किया जा रहा है आैर यह तोपें रेगिस्तानी इलाकों के लिए तैयार की गई हैं। यह तोपें 30 सैकिंड में तीन गोले दागने और तीन मिनट में 15 गोले दागने में सक्षम हैं जबकि एम-777 की रेंज 30 किलोमीटर तक है। इसे हैलिकाप्टर से या विमान के जरिये वांछित स्थान पर ले जाया जा सकता है। जब तोपें गरजीं आैर उन्होंने अचूक निशाना साधा तो भारतीयों का ​िसर गौरव से ऊंचा हुआ। इससे पहले धनतेरस के दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने परमाणु हथियारों से लैस पनडुब्बी अरिहंत की पहली गश्त पर इस प्रोजैक्ट से जुड़े सभी क्रू मैम्बर्स को बधाई देते हुए कहा था कि हर युग में ऐसे परमाणु हथियार की हर वक्त जरूरत होती है।

आईएनएस अरिहंत को ऐसे इलाकों में तैनात किया जाएगा, जहां से दुश्मन परमाणु हमला करने की धमकी देता है। यह पनडुब्बी समुद्र के किसी भी कोने से शहर को बर्बाद करने की क्षमता वाली मिसाइल छोड़ सकती है। इन मिसाइलों को जल्द डिटेक्ट भी नहीं किया जा सकता। अरिहंत के एटमी हथियारों से लैस होने के बाद भारत जमीन, हवा और जल से परमाणु हमला करने में सक्षम हो गया है। अब तक यह क्षमता सिर्फ अमेरिका और रूस के पास थी। हाल ही में भारत ने अमेरिकी धमकियों की परवाह न करते हुए रूस के साथ एस-400 मिसाइल डिफैंस सिस्टम का समझौता किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रूस के राष्ट्रप​ति ब्लादिमीर पुतिन ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत भारत को सतह से मार करने वाली आधुनिक ट्रायम्फ मिसाइल स्क्वाड्रन रूस से मिलेगी। एस-400 मिसाइल 400 किलोमीटर के दायरे में आने वाली मिसाइलों आैर लड़ाकू विमानों को खत्म करने में सक्षम है।

यह एक डिफैंस सिस्टम की तरह मिसाइल शील्ड की तरह काम करेगा, जो पाकिस्तान और चीन की एटमी क्षमता वाली बैलेस्टिक ​मिसाइलों से भारत को सुरक्षा देगा। यह सिस्टम एक बार में 72 मिसाइलें दाग सकता है। भारत रूस के साथ-साथ अमेरिका, इस्राइल से भी हथियार ले रहा है जिससे भारतीय सेना अधिक शक्तिशाली हो रही है। भारतीय हथियारों की गूंज से पाकिस्तान और चीन तिलमिला उठे हैं। पाक-चीन गठजोड़ भारत के लिए खतरा है। भारतीय सेना के शक्तिशाली होने से हमारे जवानों का मनोबल भी काफी बढ़ा है। हमें अपने जवानों के शौर्य पर गर्व है। उनके बल पर ही राष्ट्र का स्वाभिमान टिका है। उनकी चरण रज हमें किसी भी मन्दिर की भभूति से कम पवित्र नहीं। हर भारतीय को सेना पर विश्वास है। सेना की मजबूती ही राष्ट्र की मजबूती है।