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हर रोज कठघरा बोलेगा

वैसे तो इस देश में राष्ट्रदोह की कई दास्तानें हैं। देश ने अनेक बाहुबलियों को देखा है, जो धन बल, बाहुबल के जरिये सत्ता में पहुंच गए। राजनीति के अपराधीकरण को लेकर बहुत बहस हो चुकी लेकिन राजनीतिज्ञों का बाहुबलियों से रिश्ता खत्म नहीं हो रहा। उत्तर प्रदेश में अनेक बाहुबलियों को जमीन दिखाई गई, उनकी सम्पत्ति पर बुलडोजर चलाए गए। बिहार-झारखंड में भी बाहुबलियों का लम्बा इतिहास है। कई मुजरिम कठघरों तक आए, कुछ छूट गए, कुछ जेलों तक पहुंचे लेकिन एक ना एक दिन कठघरा बोलता ही है। तब सभी के राज बाहर आ जाते हैं। जिन लोगों का न्यायपालिका पर विश्वास है उन्हें यककी न रहा है 

‘‘कठघरे पर वक्त के पहरे रहे, इसलिए चुप्पी छाई रही

इंसाफ की कुर्सी के भ्रमिक जो कहते थे, वह लिखता था।

यहां ईसा सूली पर झूला, और कातिल-मुजरिम बच निकला,

पर तारीख ने जब इंसाफ किया, उस रोज कठघरा बोलेगा,

इन झूठे और बेइमानों के सब राज पुराने खोलेगा,

इक रोज कठघरा बोलेगा।’’

आज हर रोज कठघरा बोल रहा है। लोकतंत्र का मतलब कभी भी असभ्य बर्बर और बदमाशों का राज नहीं हो सकता। राष्ट्र को सही दिशा में ले जाना बहुत बड़ी बात है। भारत में अगर राजनीति का अपराधीकरण हुआ है तो इसके लिए दोषी राजनीतिक दल ही हैं। इस हमाम में सभी नंगे हैं। कोई ज्यादा ताे कोई कम। वर्षों से यह बात कही जा रही है कि अगर समय रहते राजनीतिक दलों ने खुद को नहीं बदला या परिवर्तन नहीं किया तो हो सकता है कि जनता में आक्रोश फैल जाए। हम अपने लोकतंत्र को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ लोकतंत्र कहते हैं। हम यह भूल जाते हैं कि दूसरे देशों में जो लोकतंत्र परिपक्व हुआ वहां भी सदियां लग गईं, लेकिन वहां की साक्षरता और हमारी साक्षरता में जमीन आसमान का फर्क है। आजादी के अमृतकाल में यह जरूरी है कि लोकतंत्र की मर्यादाओं को बचाने के लिए सत्ता से जुड़े और  सत्ता के करीबी बाहुबलियों, गुंडे, बदमाशों और पर्दे के पीछे रहकर घिनौने अपराध करने वालों को जनता के सामने नग्न किया जाए और पूरे सिस्टम को शुद्ध बनाया जाए।15 अगस्त को लालकिले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हर क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार का उल्लेख करते हुए यह संकेत दे दिए थे कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की मुहिम जारी रहेगी। आज की सियासत में जिस तरह से राजनीतिज्ञों ने अपनी नैतिकता त्याग कर अपराधियों को गले लगाया है उससे स्पष्ट है कि वे ​िहंसा और रक्तपात को अपनी सहमति दे रहे हैं।  एक तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आह्वान है तो दूसरी तरफ अपराधियों के चेहरे। तीसरी त्रास्दी यह है कि इस देश में अपराधियों का खुलेआम महिमामंडन किया जा रहा है।  बुधवार को बिहार-झारखंड से लेकर गुरुग्राम तक केन्द्रीय जांच एजैंसियों के छापों ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। ईडी, सीबीई और आयकर के छापे कोई नए नहीं हैं। इससे पहले भी छापों में किसी के यहां से बेशुमार दौलत, करोड़ों के नोट मशीनें गिनती-गिनती थक जाएं और अरबों रुपए के अवैध सम्पत्तियों के दस्तावेज मिलते रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह रही कि झारखंड अवैध खनन मामले में छापेमारी के दौरान ईडी ने एक राजनीतिज्ञ के करीबी माने गए प्रेम प्रकाश के घर से दो एके-47 राइफल और कुछ कारतूस भी बरामद किए। जांच-पड़ताल के बाद यह बात सामने आई कि बरामद हथियार झारखंड के पुलिस कांस्टेबलों के थे, जिन्होंने यह हथियार प्रेम प्रकाश के घर में रखे हुए थे। यद्यपि दोनों पुलिस कांस्टेबलों को निलम्बित कर दिया गया है और ईडी ने प्रेम प्रकाश को मनी लांड्रिंग कानून के तहत गिरफ्तार किया है। सवाल तो यह है कि झारखंड के पुलिसकर्मियों ने एके-47 जैसे हथियार प्रेम प्रकाश के घर में क्यो रखे। इससे यह बात एक बार फिर प्रमाणित हो जाती है कि अपराधी और बाहुबली ​बिना पुलिस संरक्षण के पनप ही नहीं सकते। विपक्ष भले ही शोर मचाए कि केन्द्रीय जांच एजैंसियां सत्ता के विरोधियों को जानबूझ कर निशाना बना रही हैं या छापों की टाइमिंग को लेकर सवाल उठाते हुए यह आरोप लगाए कि सत्ता पक्ष विपक्ष को डरा  रही है, लेकिन यह भी सच है कि छापों में जो कुछ मिल रहा है उससे देश के सामने सच्चाई आ रही है। रेलवे में नौकरी के बदले जमीन घोटाले में ताबड़तोड़ छापेमारी भले ही लोगों को नई लग रही हो लेकिन यह मामला बहुत पुराना है। जब लालू यादव केन्द्र में रेल मंत्री हुआ करते  थे। जहां तक झारखंड अवैध खनन घोटाले का सवाल है उसमें छापेमारी विधायक पंकज मिश्रा और बाहुबली बच्चू यादव की गिरफ्तारी के बाद उनसे की गई पूछताछ के आधार पर की गई है। अब जिम्मेदारी केन्द्रीय एजैंसियों की है ​कि वह छापेमारी के बाद जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाएं। देश तथा जनता को लूटने वालों को जेल की सलाखों के पीछे बंद करें और उन्हें सजा दिलवाएं। केन्द्रीय जांच एजैंसियां सत्य और साक्ष्य से संचालित हों और छापेमारी को उसके अंजाम तक पहुंचाया जाए। समस्या यह है कि औढ़ी हुई व्यवस्था ने चंद लोगों को इतना ताकतवर बना दिया है कि वे इतने बड़े चोर हो गए हैं की तमाम अपराध करके भी वह इतना हौंसला रखते हैं कि वह देश के नेता बने रहें। घोटालेबाजों, राष्ट्रद्रोहियों, जनता का पैसा लूटकर ​विदेश भेजने वालों की जगह जेल है। जहां से वे कभी सक्रिय राजनीति में न लौट सकें। देश की जनता को भी दुष्ट को दुष्ट कहने की हिम्मत जुटानी होगी।

आदित्य नारायण चोपड़ा

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