दिल्ली धमाके : डीडीएलएसए को पीडि़तों के मुआवजे का दावा करने का इंतजार

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नई दिल्ली : दिल्ली में वर्ष 2005 में दीवाली की पूर्व संध्या पर हुये सिलसिलेवार बम धमाकों में मारे गये लोगों के परिजन और घायल मुआवजा लेने के लिये दिल्ली जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीडीएलएसए) के पास नहीं आ रहे जिससे उसके सामने अजीब स्थिति खड़ी हो गयी है।

धमाकों के एक दशक बाद 280 पीडि़तों की सूची प्राधिकरण के समक्ष तैयार है। मुश्किल अब यह है कि प्राधिकरण इनमें से कई का पता नहीं जानता जिससे धन की कमी नहीं होने के बावजूद उन्हें मुआवजा देने में वह सक्षम नहीं है।

डीडीएलएसए की सचिव शिवानी चौहान ने बताया, ”दिल्ली पुलिस के जरिये पिछले महीने वारंट भेजे गये थे लेकिन राहत लेने के लिये अब तक सिर्फ 50 लोग ही आये। कई पते अधूरे हैं, कुछ पीडि़तों ने अपना घर बदल लिया जबकि कुछ अन्य अज्ञात हैं।” ये धमाके 29 अक्टूबर 2005 को लगभग एक ही वक्त पर सरोजनी नगर, पहाडग़ंज और कालकाजी में हुये। इसमें 67 लोगों की जान चली गयी थी जबकि 225 अन्य घायल हो गये थे।

जांचकर्ताओं का मानना है कि इसके पीछे आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का हाथ था। प्रस्तावित बजट के बारे में पूछे जाने पर चौहान ने कहा, ”इस काम के लिये धन की कोई कमी नहीं है।

– भाषा

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