जीएसटी के चार पूरक बिलों को मंजूरी

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नई दिल्ली  : अप्रत्यक्ष कर क्षेत्र की नई वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली को एक जुलाई से अमल में लाने की दिशा में आगे बढ़ते हुए सरकार ने आज इससे जुड़े चार विधेयकों के मसौदे को मंजूरी दे दी। मंत्रिमंडल की इस मंजूरी के बाद इन विधेयकों को अब इसी सप्ताह संसद में पेश किया जा सकता है। इन पर संसद की मुहर और अलग से तैयार राज्य जीएसटी विधेयक को सभी राज्यों की विधानसभाओं में मंजूरी मिलने के बाद पूरे देश में जीएसटी व्यवस्था को लागू करने की विधायी प्रक्रिया पूरी हो जायेगी।

उल्लेखनीय है कि जीएसटी के लागू होने पर केन्द्रीय स्तर पर लगने वाले उत्पाद शुल्क, सेवा कर और राज्यों में लगने वाला मूल्यवर्धित कर (वैट) सहित कई अन्य कर इसमें समाहित हो जायेंगे। जीएसटी परिषद पहले ही जीएसटी व्यवस्था में चार दरें 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत तय कर चुकी है। लक्जरी कारों, बोतल बंद वातित पेयों और तंबाकू उत्पाद जैसी अहितकर वस्तुओं पर इसके ऊपर अतिरिक्त उपकर भी लगाया जायेगा। किस वस्तु अथवा सेवा पर किस दर से जीएसटी लगेगा, यह काम अगले महीने से शुरू हो जायेगा।

यहां जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है, ”प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में जीएसटी से जुड़े चार विधेयकों-केन्द्रीय जीएसटी विधेयक 2017 (सी-जीएसटी बिल), एकीकृत जीएसटी विधेयक 2017 (आई-जीएसटी बिल), केन्द्र शासित प्रदेश वस्तु एवं सेवा कर विधेयक 2017 (यूटी-जीएसटी बिल) और वस्तु एवं सेवा कर (राज्यों को मुआवजा) विधेयक 2017 (मुआवजा विधेयक) को मंजूरी दे दी गई।” सूत्रों ने बताया, ”इन विधेयकों को धन विधेेयक के तौर पर इसी सप्ताह संसद में पेश किया जायेगा।” उन्होंने कहा इन सभी विधेयकों पर एक साथ चर्चा हो सकती है। मंत्रिमंडल की आज की बैठक में जीएसटी ही एकमात्र एजैंडा था।

सरकारी वक्तव्य में कहा गया है, ”सरकार देश में जीएसटी व्यवस्था जल्द से जल्द लागू करने के लिये प्रतिबद्ध है। जीएसटी परिषद ने एक जुलाई से जीएसटी लागू करने का फैसला किया है।” जीएसटी को हाल के वर्षों में सबसे बड़े कर सुधारों के तौर पर देखा जा रहा है। जीएसटी परिषद ने इस महीने हुई अपनी पिछली दो बैठकों में पूरक विधेयकों पर अपनी सहमति जताई थी। वक्तव्य में कहा गया है, ”केन्द्रीय जीएसटी से केन्द्र सरकार को राज्यों के भीतर वस्तुओं एवं सेवाओं की आपूर्ति पर जीएसटी लगाने और वसूलने अथवा दोनों का अधिकार मिलेगा, वहीं एकीकृत जीएसटी में अंतर्राज्यीय स्तर पर वस्तुओं एवं सेवाओं पर कर लगाने और वसूली करने अथवा दोनों का अधिकार केन्द्र को मिलने का प्रावधान होगा।”

इसी प्रकार केन्द्र शासित प्रदेश जीएसटी विधेयक, जहां विधानसभायें नहीं हैं, में वस्तुओं एवं सेवाओं की आपूर्ति पर कर लगाने का अधिकार केन्द्र को दिया जायेगा। मुआवजा विधेयक के तहत राज्यों को संभावित राजस्व नुकसान की भरपाई के लिये होगा। इस विधेयक में प्रावधान किया जायेगा कि जीएसटी लागू होने के पहले पांच साल के दौरान राज्यों को यदि राजस्व का नुकसान होता है तो केन्द्र उसकी भरपाई करेगा। वित्त मंत्री अरुण जेतली ने 2017-18 के बजट में कहा है कि व्यापार एवं उद्योग को जीएसटी के प्रावधानों को समझाने के लिये देशव्यापी प्रयास किये जायेंगे। जीएसटी लागू होने से देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीएसटी) में अच्छी वृद्धि होने की उम्मीद है। खेतान एण्ड कंपनी के भागीदारी अभिषेक रस्तोगी ने टिप्पणी करते हुए कहा, ”जीएसटी योजना समय के अनुरूप आगे बढ़ रही है और अब एक जुलाई से इसके लागू होने की उम्मीद वास्तविक लगती है”

– एजेंसी

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