सामाजिक मुद्दों पर आधारित है ‘पाच्र्ड’ : लीना यादव

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पटना ,(वार्ता): बॉलीवुड की जानी मानी निर्देशक लीना यादव का कहना है कि उनकी फिल्म ‘पाच्र्ड’ सामाजिक मुद्दों पर आधारित फिल्म है। गैर सरकारी संगठन ग्रामीण स्नेह फाउंडेशन की ओर से आठ दिवसीय बोधिसत्व फिल्म महोत्सव 2017 का कल यहां शुभारंभ हुआ। महोत्सव के पहले दिन कल लीना यादव की कई अंतर्राष्ट्रीय समारोह में सराही गयी बहुचर्चित फिल्म पाच्र्ड दिखायी गयी।

तीन पत्नी और शब्द जैसी फिल्म निर्देशित कर चुकी लीना यादव की यह फिल्म भारत के ग्रामीण जीवन की पृष्ठभूमि पर बनी है। इसमें चार साधारण महिलाओं को सदियों पुरानी परंपराओं को तोड़ते और उन परंपराओं से मुक्त होते हुये दिखाया गया है। इस फिल्म में दहेज प्रथा, शारीरिक हिंसा, जबरन विवाह, दुष्कर्म और मानसिक उत्पीडऩ जैसे मुद्दों को उठाया गया है।

महोत्सव के दूसरे दिन आज यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में लीना यादव ने फिल्म पाच्र्ड की चर्चा करते हुये कहा, फिल्म केवल महिलाओं पर ही केंद्रित नहीं है बल्कि इसमें उन सामाजिक मुद्दों को भी उठाया गया, जिसका बड़े पैमाने पर लोग सामना करते हैं। यह पुरुषों के बारे में भी है। समाज में दोनों पीड़ति हैं। फिल्म महोत्सव में फिल्म दिखाने संबंधी सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि फिल्म को प्रमोट करने के लिए फिल्म फेस्टिवल बेहद महत्वपूर्ण है। यह फिल्म वर्ष 2015 में सबसे पहले टोरंटो फेस्ट में दिखायी गयी थी, जहां इसे लोगों ने खूब सराहा।

बोधिसत्व फिल्म फेस्टिवल में पाच्र्ड दिखायी गयी है जिससे मैं काफी गौरान्वित महसूस कर रही हूं। फिल्म का टाइटिल अंग्रेजी में रखने संबंधी सवाल के जवाब में लीना यादव ने कहा, फिल्म निर्माण के समय इसका टाइटिल पाच्र्ड रखा गया था और हम उसे बदलने वाले थे लेकिन जब टोरंटो में फिल्म दिखायी गयी और टाइटिल को सराहा गया तो हमने यह निश्चय किया कि पाच्र्ड ही फिल्म का टाइटिल रहेगा। अंग्रेजी में टाइटिल रखने से फिल्म को वैश्विक मंच मिलता है। दर्शक अधिक मिलते हैं। फिल्म की कहानी मैंने लिखी थी और यह मेरे दिल के बेहद करीब है। कहानी को सिनेमा के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की थी जिसे सभी ने बेहद सराहा।

पाच्र्ड में तनिष्ठा चटर्जी ने राधिका आप्टे के साथ मुख्य भूमिका निभायी है। राधिका आप्टे के साथ काम करने के अनुभव करने के बारे में पूछे जाने पर तनिष्ठा ने कहा, राधिका ने फिल्म में बेहतरीन काम किया है। उनके साथ काम करने का अनुभव बेहद शानदार रहा। फिल्म ही नहीं क्रू में भी काफी महिलायें थी और हमने काफी मजे किये। फिल्म फेस्टिवल में पाच्र्ड दिखाये जाने से काफी खुशी मिल रही है। पटना में अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल का आयोजन सराहनीय कदम है। युवाओं के लिए यह एक अच्छे अवसर की तरह है। उन्हें अधिक से अधिक फिल्में देखने को मिलेंगी और उन्हें सीखने का मौका भी मिलेगा।

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