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हरियाणा

विधानसभा सत्र इसी माह

चंडीगढ़ : हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल इंग्लैंड में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव में शामिल होने के लिए जाएंगे। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज के संस्थान की ओर से इंग्लैंड में अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। सात से १२ अगस्त तक यह आयोजन होगा, जिसमें मुख्यमंत्री मनोहर लाल समेत हरियाणा के कई लोग शामिल होंगे। इस आयोजन में शामिल होने के लिए अधिकारियों, नेताओं और स्वामी ज्ञानानंद महाराज के शिष्यों में होड़ मची है। इंग्लैंड यात्रा का तमाम खर्च स्वामी ज्ञानांद जी की संस्था वहन करेगी। 

मुख्यमंत्री मनोहर लाल इंग्लैंड से वापस लौटते ही रथयात्रा पर सवार हो जाएंगे। उनकी रथयात्रा १६ अगस्त से शुरू होगी तथा आठ सितंबर को राज्य स्तरीय रैली की जाएगी। रैली का स्थान अभी तय नहीं है। मुख्यमंत्री की विदेश यात्रा तथा रथयात्रा की वजह से ही विधानसभा के मानसून सत्र की तारीख में बदलाव संभव है। पहले यह सत्र अगस्त के मध्य में होना था, लेकिन अब जुलाई माह के आखिर में होने की संभावना है। 

जुलाई में मानसून सत्र के लिए विधानसभा सचिवालय को तैयारी करने के संकेत दिए गए हैं। प्रदेश में 15 अक्टूबर के आसपास विधानसभा चुनाव है। राज्य सरकार चुनाव से पहले अगस्त में विधानसभा का विशेष सत्र आयोजित करना चाहती थी, लेकिन अगस्त और सितंबर माह में मुख्यमंत्री की व्यस्तताएं बढ़ गई हैं, जिस कारण अब विधानसभा का यह सत्र जुलाई माह के आखिरी सप्ताह में आयोजित किया जाएगा। यह सत्र सिर्फ दो दिन का होगा। अगर विपक्ष ने ज्यादा दबाव बनाया तो सत्र की अवधि बढ़ाकर तीन दिन की जा सकती है। 

कमजोर विपक्ष के कारण अपनी मर्जी से सत्र चलाएगी सरकार

भाजपा सरकार का मानना है कि राज्य में हाल फिलहाल विपक्ष नहीं है। लिहाजा सरकार सत्र का संचालन अपनी मर्जी के हिसाब से कर सकती है। सत्र में प्रश्नोत्तर काल भी रखा गया है। विधायकों से उनके सवाल पूछने की प्रक्रिया शुरू की जाने वाली है। बेहद चुनींदा सवालों को ही प्रश्नोत्तर काल में शामिल किया जा सकता है। चुनाव से ठीक पहले होने वाला यह सत्र कई मायनों में अहम होगा। सरकार चुनाव आचार संहिता लगने से पहले सदन में कई अहम घोषणाएं कर सकती है। सरकार के एजेंडे पर फिलहाल कर्मचारी और किसान हैं। 

बाकी वर्ग के लिए धीरे-धीरे घोषणाएं की जा रही हैं। लिहाजा सत्र में किसान व कर्मचारी सरकार के प्रमुख एजेंडे पर रहेंगे। इन्हीं दोनों मुद्दों पर कांग्रेस और इनेलो सत्तारूढ़ भाजपा की घेराबंदी करने का कोई मौका हाथ से नहीं जाने देंगे। हालांकि अब राज्य में इनेलो के विधायकों की संख्या लगातार कम हो रही है। इनेलो विधायक टूटकर लगातार भाजपा में शामिल हो रहे हैं। 

कांग्रेस और इनेलो सरकार को घेरेंगे या आपस में लड़ेेंगे

हरियाणा में कांग्रेस और इनेलो भले ही गुटबाजी का शिकार हैं, लेकिन इसके बाद भी दोनों विपक्षी दल चुनाव से पहले सरकार की घेराबंदी करने का कोई मौका हाथ से नहीं जाने देंगे। यह पूरी तरह से संभव है कि विभिन्न मुद्दों पर कांग्रेस और इनेलो आपस में टकराते दिखाई दें। 

कांग्रेस हमेशा से इनेलो को भाजपा की बी टीम कहती आई है, जबकि इनेलो का कहना है कि कांग्रेस ने कभी जनहित के मुद्दे पर सरकार की न तो घेराबंदी की और न ही प्रमुख विपक्षी दल इनेलो का साथ दिया है। भाजपा को दोनों दल किसानों व कर्मचारियों के मुद्दे पर घेरेंगे। भाजपा भी दोनों दलों से जवाब मांगती दिखाई देगी।