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सरकार की नाकामियों के कारण आज प्रदेश में भयावह हालात उत्पन्न हो गए

अम्बाला : हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद कुमारी शैलजा ने प्रदेश में बंद हो रहे उद्योग धंधों, हजारों लोगों के बेरोजगार होने, किसानों के गन्ने की फसल की खरीद ना होने और धान की फसल का भुगतान ना होने को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि भाजपा सरकार की नाकामियों के कारण आज प्रदेश में भयावह हालात उत्पन्न हो गए हैं। 

ये बातें कुमारी शैलजा ने यहां जारी बयान में कहीं। कुमारी शैलजा ने कहा कि प्रदेश में पिछले 5 वर्षों में नए उद्योग धंधे लाना तो दूर इन 5 वर्षों में कांग्रेस के शासनकाल में जो उद्योग धंधे स्थापित हुए थे वे भी बंद हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश से लगातार उद्योगों के बंद होने की खबरें आ रही हैं। अर्थिक मंदी के कारण इसी  को फरीदाबाद की मौर्य इंडस्ट्रीज पर ताला लग गया जिस कारण हजारों कर्मचारियों इस ठंड में धरना देने को मजबूर हैं। 

उन्होंने कहा कि सरकार की विफल और गलत नीतियों के कारण पूरे प्रदेश में हजारों छोटे-बड़े उद्योगों पर ताला लग चुका है और हजारों लोग बेरोजगार हो गए हैं। कुमारी शैलजा ने प्रदेश के किसानों के गन्ने की फसल की खरीद और धान की फसल का भुगतान ना होने का मुद्दा भी उठाते हुए कहा कि आज प्रदेश के किसान दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं और सरकार इसके समाधान के लिए कोई कदम नहीं उठा रही है। 

गन्ने की फसल की खरीद को लेकर किसानों को साजिशन परेशान किया जा रहा है। पलवल शुगर मिल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि पलवल शुगर मिल में 4 जिलों के किसान अपनी गन्ने की फसल बेचने के लिए आते हैं वहां पर गन्ने की फसल की खरीद बंद है। उन्होंने कहा कि इस मिल में पलवल, फरीदाबाद, नूंह और गुरुग्राम जिले के किसान अपनी फसल बेचने आते हैं लेकिन आज किसान दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है और उन्हें अर्थिक रुप से नुकसान उठाना पड़ रहा है। 

उन्होंने कहा कि इस मिल में इस वर्ष सरकार ने मशीनों पर 12 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, परन्तु यहां मशीनें खराब पड़ी हैं और यह मिल बंद है। उन्होंने यह भी कहा कि पहले धान की खरीद को लेकर किसानों को परेशान किया गया और मंडियों के दरवाजे किसानों के लिए बंद कर दिए गए। अब प्रदेश में कई जगह उनकी धान की फसल का भुगतान नहीं किया जा रहा है। 

कुमारी शैलजा ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार प्रदेश में उद्योग धंधों को बचाने के लिए और फसल खरीद और भुगतान के लिए तुरंत कोई ठोस कदम उठाए। उन्होंने यह भी कहा कि इस विषय की भी जांच होनी चाहिए कि करोड़ों खर्च करने के बाद भी पलवल की शुगर मिल बंद क्यों है।