सिरसा : हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी में संगठनात्मक कमजोरी और नेताओं में गुटबंदी राज्य में होने वाले लोकसभा चुनाव में पार्टी के लिये एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है और हाईकमान इससे जल्द निपटने के लिये दिल्ली में हर रोज पार्टी के प्रदेश के नेताओं के साथ मत्थापच्ची कर रहा है।

हाईकमान ने इस गुटबंदी को समाप्त करने तथा लोकसभा चुनावों के लिये सम्भावित उम्मीदवारों के नामों पर विचार करने कल 15 सदस्यों की समन्वय समिति का गठन किया था लेकिन इसे लेकर प्रदेश पार्टी में ऐसा कोई तूफान उठा कि इस समिति को कुछ समय बाद ही रद्द कर दिया गया।

इस घटनाक्रम से पार्टी में न केवल अंदरूनी कलह होने की बात उबर कर सामने आ गई है बल्कि प्रदेश में प्रदेश के बड़े नेताओं के एक मंच पर आने सम्भावनाओं पर भी सवालिया निशान लग गया है। हालांकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर ने कल यहां एक संवाददाता सम्मेलन में दावा किया था कि पार्टी के प्रदेश नेताओं में अब कोई मन और मतभेद नहीं है।

लेकिन हाईकमान द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में समन्वय समिति का गठन किये जाने से पार्टी नेताओं में ऐसी खलबली मची कि डा. तंवर समेत पार्टी में कथित विरोधी धड़े के सभी नेता अपने कार्यक्रम रद्द पर दिल्ली पहुंच गये। उधर श्री हुड्डा के नेतृत्व में समन्वय समिति के गठन के ऐलान के बाद उनके समर्थकों की बांछे खिल उठीं और वे अभी बधाईयां दे ही रहे थे कि तंवर गुट ने समिति का गठन रद्द होने की सूचना फ्लैश कर इस पर पानी फेर दिया।