करनाल : बात फरवरी 2015 की है। जब अश्विनी चोपड़ा सांसद बने ही थे तो उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से एक आदेश जारी हुआ था कि वह करनाल जिले में एक ऐसे गांव को गोद ले जिसे संवारने की जरूरत हो। सांसद अश्विनी चोपड़ा ने अधिकारियों से पूछा कि किस गांव की हालत बद से बदतर है। सांसद बनते ही लोग भी अश्विनी कुमार चोपड़ा के पास पहुंच गए और अपने-अपने गांवों की बदहाली का रोना शुरू कर दिया लेकिन सांसद अश्विनी चोपड़ा यह चाहते थे कि वह वास्तव में उस गांव को चुनेंगे जिसकी हालत वास्तव में बदतर होगी। ऐसे में उनके सामने जब गांव मोहिदीनपुर का नाम सामने आया तो वह गांव का दौरा करने निकल पड़े।

सांसद बनने के बाद अश्विनी चोपड़ा जब गांव में पहुंचे तो गांव की हालत देखकर उनका दिल भी रो उठा। गांव में गंदगी की बयार बह रही थी। लोग बीमारियों से घिरे हुए थे। गांव में पीने लायक पानी की हालत यह थी कि एक ही ट्यूबवैल था और वह भी खराब पड़ा था। सांसद ने जब गांव मोहिदीनपुर में कदम रखा तो गांव में मौजूद एक हजार घरों में रहने वाले लोगों को एक आस बंध गई कि अब उनके गांव की हालत सुधरने वाली है। सांसद को अपने गांव में आया देख लोग खुश हो रहे थे क्योंकि उन्हें मालूम था कि अब उनके दिन सुधरने वाले हैं। लोगों ने सांसद को बताया कि उनके गांव में नेता बहुत ही कम आते हैं।

वोट मांगने के बाद कोई भी पूछने नहीं आता इसलिए उनका गांव लगातार पिछड़ता जा रहा है। गांव की हालत सांसद अश्विनी कुमार के दिल के ऊपर उभरकर आ गई और उन्होंने फैसला कर लिया कि अब वह इस गांव को स्वच्छ भारत का सबसे अच्छा गांव बनाएंगे। उन्होंने ताबड़तोड़ गांव के दौरे किए और एक के बाद एक लाखों रुपए की ग्रांट देते चले गए। लाखों रुपए की ग्रांट पहले एक करोड़ में बदल गई और फिर एक करोड़ वाली ग्रांट अढ़ाई करोड़ रुपए का आंकड़ा पार कर गई। बीते चार सालों में गांव में तेजी से विकास कार्य हुए। आखिरकार सांसद अश्विनी चोपड़ा द्वारा दी गई करोड़ों की ग्रांट के बल पर करनाल जिले का गांव मोहिदीनपुर देश के ऐसे स्थान पर पहुंच गया जहां ग्रामीणों को कतई विश्वास नहीं हो रहा था।

स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांव देश के तीन टॉप स्थान पर पहुंच गया। आज गांव की हालत यह है कि पहले जो लोग बीमारियों से घिरे रहते थे आज वह स्वस्थ नजर आते हैं। लोगों के पैसे बीमारियों पर पहले ज्यादा खर्च होते थे क्योंकि गांव में चारों तरफ गंदगी थी लेकिन अब न केवल गांव की सड़कें नालियां और गलियां पक्की हुई हैं, बल्कि बीमारियां फैलाने वाले जोहड़ को भी गांव में स्थापित किया गया है। अब गांव की गंदगी नए जोहड़ में गिरती है जिससे गांव मोहिदीनपुर के सरपंच रामसिंह ने बताया कि करनाल को ऐसा सांसद मिलना मुश्किल है। वह तो 100 में से 100 नम्बर सांसद को दे रहे हैं। लगातार बीमारियां कम हुई हैं। कमाल की बात यह है कि गांव के लोग सांसद को नेता नहीं मानते बल्कि उन्हें अपना देवता मानते हैं।

– हरीश चावला