अम्बाला : पूर्व केन्द्रीय मंत्री विनोद शर्मा किसी भी क्षण नई पारी की शुरूआत की घोषणा कर सकते हैं। उनके जन्म दिवस के उपलक्ष्य में 11 फरवरी 2019 को घंूघट पैलेस अम्बाला में विशाल समारोह का आयोजन किया जा रहा है। जबकि 12 फरवरी 2019 को वे अपने परिजनों के साथ अपना जन्म दिन मनाएंगे।

उनके करीबी सूत्रों के अनुसार इस आयोजन के लिए करीब पांच हजार कट्टर समर्थकों का न्यौता दिया गया है। पिछले दो साल से पूर्व केन्द्रीय मंत्री विनोद शर्मा ने अम्बाला शहर विधानसभा क्षेत्र में राजनैतिक गतिविधियां बढ़ा रखी हैं। रक्षा बन्धन और भैयादूज पर हजारों बहनों से राखी बंधवाने के साथ-साथ तिलक लगवाने का सिलसिला उनकी मॉडल टाऊन स्थित कोठी पर निर्बाध रूप से जारी है। इसके अलावा लोगों के सुख-दुख में शामिल होने का सिलसिला भी उन्होंने लगातार जारी रखा है।

इन आयोजनों में 2019 के चुनाव की रूपरेखा के बारे में पूछने पर हमेशा एक ही जवाब मिलता रहा है कि आगामी वैशाखी तक यह सब तय कर दिया जाएगा। राजनैतिक पंडितों का मानना है कि मिशन 2019 की निकटता के चलते वे अपने जन्म दिवस 12 फरवरी 2019 के मौके पर धमाका कर सकते हैं। उनके बारे में एक बात उनके कट्टर समर्थकों में मशहूर है कि समय से पूर्व वे अपने पत्ते अपनी धर्मपत्नी के समक्ष भी नहीं खोलते। उन्हें बेहद गम्भीर और संवेदनशील राजनेता माना जाता है।

पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव की सरकार में केन्द्रीय मंत्री रहे विनोद शर्मा ने 2004 में अम्बाला शहर से विधानसभा का चुनाव 32 हजार से अधिक वोटों के अन्तर से जीता था। तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपिन्द्र सिंह हुड्डा का दाहिना हाथ माने जाने वाले विनोद शर्मा को तब कांग्रेस सरकार ने बिजली एवं कराधान मंत्री बनाया था लेकिन एक चर्चित हत्याकांड में उनके बेटे मनु वशिष्ठ पर आरोप लगने के बाद उन्होंने मंत्रीपद त्याग दिया था फिर भी वे सीएम के संकट मोचक बने रहे।

2009 में वे दोबारा अम्बाला शहर से 35 हजार से अधिक वोटों से जीत गए। 2014 के चुनाव से पूर्व गोहाना रैली में उन्होंने सीएम भूपिन्द्र सिंह हुड्डा से आर्थिक आधार पर सामान्य वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण देने की घोषण भी करवा दी थी और इसके बाद पूरे हरियाणा का दौरा करके जनचेतना जगाई। अपरिहार्य कारणों से तब उन्होंने कांग्रेस को छोड़कर 2014 का चुनाव जनचेतना पार्टी के बैनर तले लड़ा लेकिन मात्र 38 हजार वोट हासिल करके वे चुनाव हार गए।

पूर्व सीएम भूपिन्द्र सिंह हुड्डा से पारिवारिक निकटता के साथ-साथ पूर्व विधानसभा स्पीकर कुलदीप शर्मा से उनकी करीबी रिश्तदारी है। प्रदेश के नवनियुक्त प्रभारी गुलामनबी आजाद से उनकी निकटता जग जाहिर है। एक समय में उनके भाजपा में शामिल होने की खबरें भी आई थी लेकिन हेवीवेट राजनेता होने के कारण आरएसएस और केन्द्रीय भाजपा मंत्री उन्हें शामिल करने का साहस नहीं जुटा पाए।

उनकी निकटता ओमप्रकाश चौटाला परिवार से भी काफी बताई जाती है लेकिन वर्तमान में इनेलो जजपा विवाद के चलते तथा इनेलो बसपा गठबन्धन टूटने और जजपा का आप से उपचुनाव में समझौता होने के चलते प्रदेश का चुनावी गणित उलट-पुलट हो चुका है। पूर्व सीएम भजन लाल बिश्नोई के बेटे कुलदीप बिश्नोई से भी उनका बेहद नजदीकी सम्बन्ध है।

इन सारे सम्बन्धों और प्रदेश के वर्तमान घटनाक्रम के चलते राजनैतिक पंडित एक ही निर्णय पर पहुंच रहे हैं कि वे 2019 में जनचेतना पार्टी का कांग्रेस का विलय करके घर वापिसी की घोषणा कर सकते हैं। वैसे भी उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि कांग्रेसी रही है। पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयालशर्मा से भी उनके परिवार का अत्यन्त करीबी रिश्ता रहा है।

(राजेन्द्र भारद्वाज)