भिवानी : जात-पात व धर्म के नाम पर लोगों को लड़वाने वाली भारतीय जनता पार्टी को प्रदेश की जनता चुनाव में करारा जवाब देगी। ये विचार कांग्रेस विधायक दल की नेता किरण चौधरी ने भिवानी विधानसभा क्षेत्र में अपने जनसम्पर्क अभियान के तहत गांव कोंट, उमरावत, सांगा, बड़ाला, कायला, धारेडू, मधमाधवी, झरवाई, पूर्णपुरा व नौरंगाबाद में ग्रामीण सभाओं को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए। श्रीमती चौधरी ने कहा कि भाजपा का चेहरा अब बेनकाब हो चुका है।

झूठे विकास के नारे के साथ सत्ता में आई केंद्र व प्रदेश की भाजपा सरकारों ने विकास करवाने की बजाए विनाश पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने अपने कार्यकाल में केवल जुमलेबाजी व झूठ की राजनीति की है। उन्होंने कहा कि भाजपा की जात-पात की राजनीति भी अब पूरी तरह से लोगों को समझ आ गई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा प्रतिवर्ष युवाओं को 2 करोड़ नौकरियां, लोगों के खाते में 15 लाख रूपए व स्वच्छ प्रशासन सभी जुमले साबित हुए हैं।

देश व प्रदेश में बेरोजगारी बेलगाम है और भ्रष्टाचार अत्यधिक बढ़ गया है। श्रीमती चौधरी ने कहा कि भाजपा ने समाज के सभी वर्गों को छलने का काम किया है। किसान, मजदूर, कर्मचारी, महिलाएं, व्यापारी सभी भाजपा की नीतियों से रूष्ठ है और उन्हें अब चुनाव की इंतजार है ताकि वोट की चोट मारकर वे अपना बदला ले सकेंगे। भाजपा राज में कोई ऐसा नहीं है जिसे ठगा न गया हो और यह पार्टी किसी की सगी नहीं है।

किरण चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री के खोखले भाषण व झूठे आश्वासन भी काम नहीं देंगे क्योंकि जनता को उनकी हकीकत भी पता चल चुकी है। प्रधानमंत्री अपने भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए अब तरह तरह की अनर्गल ब्यानबाजी पर उतर आए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जींद उपचुनाव में भारी मतों के अंतर से जीतेगी। उन्होंने का कि उप चुनाव को लेकर कांग्रेसी कार्यकर्ता एकजुट हैं और गम्भीरता से भाजपा को धूल चटाऐंगे।

उन्होंने कहा कि भाजपाईयों का प्रजातंत्र में कोई विश्वास नहीं है यही कारण है कि बारी-बारी से संविधानिक संस्थाओं चाहे आरबीआई हो या फिर सीबीआई सभी में सरकार अनावश्यक हस्तक्षेप का प्रयास कर रही है। यही कारण है कि इन संस्थाओं के साथ सरकार का टकराव बना हुआ है। किरण चौधरी ने कहा कि प्रदेश में फसल बीमा के नाम पर किसानों को लूटा जा रहा है। जबरन उनके खातों में से पैसे काटे जाते हैं और मुआवजे के नाम पर उन्हें कुछ नहीं दिया जा रहा।

(दीपक खंडेलवाल)