चंडीगढ़ : हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड में निजी स्कूलों के करीब चालीस हजार विद्यार्थियों का एनरोलमेंट नहीं हो पाने के मामले में मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान ले लिया है। साथ ही पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल एलायंस (निसा) की याचिका पर एक्शन लेते हुए सरकार से जवाब मांगा है।

शिक्षा विभाग की लापरवाही से आठवीं कक्षा के बच्चों का एनरोलमेंट नहीं हो पाने से निजी स्कूल संचालकों और अभिभावकों में अफरा-तफरी मची हुई है। निसा के अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा ने बताया कि मानवाधिकार आयोग ने उन्हें फोन कर पूरे मामले की जानकारी मांगी है। आयोग ने भरोसा दिलाया है कि किसी छात्र के भविष्य से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।

जल्द ही शिक्षा विभाग और बोर्ड अधिकारियों से जवाब तलब कर मामले में कोई रास्ता जरूर निकाला जाएगा। हाईकोर्ट में भी इसी महीने सुनवाई होनी है। एमआइएस (मैनेजमेंट इंफोर्मेशन सिस्टम) कोड लेने के बावजूद करीब 500 निजी स्कूलों के आठवीं के छात्रों का एनरोलमेंट नहीं हो पाया है, जबकि 30 नवंबर को अंतिम तिथि भी गुजर गई।

खास बात ये कि इन स्कूलों ने एमआइएस पोर्टल पर सरकार की मंजूरी के बाद ही छात्रों का नामांकन कराया था। शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर दर्शाए गए इन बच्चों का एनरोलमेंट नहीं हो पाने की स्थिति में स्कूल संचालकों को इन्हें दूसरे स्कूलों के रिकॉर्ड में दिखाना पड़ेगा जो कानूनन गलत होगा।

शिक्षा निदेशालय ने आठवीं तक के 403 अस्थायी मान्यता प्राप्त स्कूलों की लिस्ट तो शिक्षा बोर्ड में भेज दी, लेकिन करीब 400 अस्थायी मान्यता प्राप्त स्कूलों के नाम शिक्षा बोर्ड में नहीं भेजे गए। इसके अलावा करीब 396 स्कूलों को एग्जिस्टिंग सूची में शामिल करने के लिए आवेदन किए एक साल होने को है, लेकिन अभी तक उन्हें लिस्ट में शामिल नहीं किया गया।

(राजेश जैन)