अम्बाला : 6 अगस्त को जम्मू-कश्मीर के गुरेज सैक्टर में आतंकवादी घुसपैठ को रोकते हुए शहीद हुए गांव तेपला निवासी लांस नायक विक्रमजीत सिंह का उसके पैतृक गांव में राजकीय और सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। गांव तेपला व क्षेत्र के हजारों लोगों ने शहीद को अश्रूपूर्ण विदाई दी और भारत माता की जय, पाकिस्तान मुर्दाबाद, जब तक सूरज-चांद रहेगा, विक्रमजीत सिंह तेरा नाम रहेगा व बोले सो निहाल-सतश्री अकाल के जयघोष के बीच शहीद का संस्कार किया गया। सेना व पुलिस की टुकड़ी ने हथियार उल्टे करके, मातमी धुन बजाकर और हवा में गोलिया दागकर शहीद को सलामी दी।

हरियाणा सरकार की ओर से स्वास्थ्य, खेल एवं युवा कार्यक्रम मंत्री अनिल विज ने शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र भेंट करके श्रद्धांजलि दी और परिजनों को सांत्वना दी। उन्होंने इस मौके पर मीडिया को बताया कि सरकार ने 8 अगस्त को ही शहीद की धर्मपत्नी श्रीमती हरजीत कौर, पिता बलजिन्द्र सिंह और माता कमलेश कौर के बैंक खाते में 50 लाख रुपए की आर्थिक सहायता जमा करवा दी है। इस राशि में से 23.34 लाख रूपए शहीद की धर्मपत्नी, 13.33 लाख रुपए पिता बलजिन्द्र सिंह और 13.33 लाख रुपए शहीद की माता कमलेश कौर के बैंक खाते में डाले गए हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि सरकार के निर्णय के तहत शहीद की धर्मपत्नी को सरकारी नौकरी प्रदान की जाएगी और इसके लिए उपायुक्त श्रीमती शरणदीप कौर बराड़ व जिला सैनिक बोर्ड के सचिव को आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश दे दिए गए हैं।

शहीद को श्रद्धांजलि देने वालों में स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के अलावा श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री नायब सिंह सैनी, स्थानीय विधायक श्रीमती संतोष चौहान सारवान, विधायक असीम गोयल, उपायुक्त श्रीमती शरणदीप कौर बराड़, पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार, सेना टू-कोर के जीओसी एस.एस. सिधु, ब्रिगेडियर के.एस. निज्जर, अतिरिक्त उपायुक्त कैप्टन शक्ति सिंह, सैनिक बोर्ड के उपनिदेशक वी.एम. शर्मा मुख्य रूप से शामिल हैं।

नम आंखों से शहीद को राष्ट्रीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई

अम्बाला छावनी से काफिले के रूप में ले जाया गया शहीद का पार्थिव शरीर : शहीद का पार्थिव शरीर बुधवार सांय लगभग 6 बजे एयरफोर्स स्टेशन अम्बाला छावनी पंहुचा था और रात को पार्थिव शरीर सेना अस्पताल के मोर्चरी हाउस में रखा गया था। आज प्रात: 8 बजे फूलों से सजी हुई सेना की गाड़ी व अन्य वाहनों के काफिले के रूप में तिरंगे में लिपटे शहीद के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव ले जाया गया। गांव के प्रवेश मार्ग पर ही हजारों युवा, महिला व पुरूष शहीद के सम्मान के लिए उपस्थित थे और काफिल पंहुचते ही पूरा वातावरण भारत माता की जाय, विक्रमजीत सिंह अमर रहे, पाकिस्तान मुर्दाबाद और बोले सो निहार-सतश्री अकाल के गगनभेदी जयघोषों से गूंज उठा।

शहीद के दादा भी कर चुके हैं सेना में रहकर देश की सेवा : विक्रमजीत सिंह एक साधारण किसान परिवार से सम्बन्धित थे और उनके पिता बलजिन्द्र सिंह ने बड़ी मेहनत और चुनौतियों का सामना करते हुए परिवार का पालन-पोषण किया। शहीद के दादा करतार सिंह सेना में सेवा कर चुके हैं और उन्होंने ने अपने दोनो पौत्रों विक्रमजीत सिंह व मोनू सिंह को सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित किया। विक्रमजीत सिंह 5 वर्ष पूर्व सेना में भर्ती हुए थे और इसी वर्ष 15 जनवरी को यमुनानगर जिला से सम्बन्धित हरप्रीत कौर से उनकी शादी हुई थी। उनके छोटे भाई मोनू सिंह भी सेना में हैं और इस समय असम में तैनात हैं। शहीद की माता कमलेश कौर एक धार्मिक विचारों की महिला हैं और उन्होंने अपने बेटों को बचपन से ही देश सेवा के लिए प्रेरित किया।

(राजेन्द्र भारद्वाज, महेंद्र)