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भारत में कोरोना के आँकड़े #GharBaithoNaIndiaSource : Ministry of Health and Family Welfare

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TOP 5 NEWS 08 FEBRUARY : आज की 5 सबसे बड़ी खबरें

1 -  चीन पर अपनी नजर पैनी करेगा भारत, LAC पर सर्विलांस सिस्टम में होंगे बड़े बदलाव

भारत अब ड्रोनों, सेंसरों, टोही विमानों और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के औजारों के जरिए चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की हरकतों पर पहले से ज्यादा पैनी नजर रखने की तैयारी में है। इस कदम के पीछे का बड़ा मकसद ड्रैगन की घुसपैठ की कोशिश को रोकना है। रक्षा मंत्रालय के एक सूत्र ने बताया कि "एलएसी को पाकिस्तान के साथ 778 किलोमीटर लंबी नियंत्रण रेखा (एलओसी) की तरह लगातार मेनटेन नहीं किया जा सकता है। इसलिए, एलएसी के साथ रियल टाइम की जानकारी के लिए मौजूदा निगरानी क्षमताओं को बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता है।" सूत्र ने बताया कि अधिग्रहण और इंडक्शन की योजना हाई-अल्टीट्यूड वाले क्षेत्रों के लिए मिनी ड्रोन और अल्ट्रा-लार्ज-रेंज सर्विसेजलांस कैमरों से लेकर सुदूर-पड़ोसी विमान प्रणालियों के लिए MALE (मीडियम अल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस) और HALE (हाई अल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस) तक है। साथ ही, इजराइल से तीन से चार हेरॉन यूएवी को लीज पर लेने की भी बात चल रही है। 

2 - चमोली ग्लेशियर हादसा : 14 के शव मिले, 150 से ज्यादा अब भी लापता

रविवावर को उत्तराखंड के चमोली में रौठी ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटकर गिर गया। इस सैलाब में कई लोग बह गए, जिनमें से 10 के शव बरामद कर लिए गए हैं और 152 लोग अभी भी लापता हैं। इस आपदा से ऋषि गंगा पावर प्रोजेक्ट और एनटीपीसी प्रोजेक्ट को भारी नुकसान हुआ है। इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे करीब 100 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। हालात को देखते हुए सेना के 100, आईटीबीपी के 315, एनडीआरएफ के 250 जवानों को भी राहत और बचाव कार्य में लगाया गया। इधर, गाजियाबाद से भी एनडीआरएफ के 100 जवान, एयरफोर्स के विशेष विमान से जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंच गए। जिन्हें सोमवार को चमोली रवाना किया जाएगा। एनडीआरएफ के साठ जवानों की एक टुकड़ी पहले ही सड़क मार्ग से चमोली रवाना हो चुकी है। एसडीआरएफ के मुताबिक ग्लेशियर टूटने की घटना रविवार सुबह 10: 50 बजे जोशीमठ से करीब 15 किमी की दूरी पर स्थित रेणी गांव के करीब हुई। ग्लेशियर के टूटने से ऋषिगंगा प्रोजेक्ट क्षतिग्रस्त हो गया। साथ ही श्रीनगर, ऋषिकेश, जोशीमठ में टीमों को अलर्ट स्थिति में रखा गया। 

3 - कृषि कानून : किसान आंदोलन के 75 दिन 

कृषि मंत्री ने बीते शुक्रवार को राज्य सभा में कहा कि मौजूदा आंदोलन सिर्फ ‘एक राज्य’ का मसला है। हालांकि किसानों के प्रदर्शन में देशभर के किसान बड़ी तादाद में जुड़ रहे हैं और हाल में कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियों ने भी इस पर टिप्पणियां की। 26 जनवरी को लाल किले पर हुए उपद्रव के बाद किसान आंदोलन की प्रमाणिकता पर कई सवाल भी कायम हैं, इन सबके बीच पुलिस प्रशासन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सुरक्षा को चाक-चौबंद कर रहा है। आइए जानते हैं 75 दिन के 7 पड़ाव। सरकार से वार्ता विफल होने के बाद किसान संघों ने 23 जनवरी को दिल्ली चलो की अपील की। 26 नवंबर को दिल्ली में मार्च के इरादे से आ रहे किसानों को पुलिस ने सीमा पर ही रोक दिया। जिस पर किसान दिल्ली की सीमाओं पर ही धरना देने बैठ गए जो अब तक जारी है। पंजाब में आंदोलन कर रहे किसानों को केंद्र ने पहली बार 14 अक्तूबर को वार्ता के लिए बुलाया पर कृषि मंत्री के मौजूद न होने से किसान बैठक से उठ गए थे। इसके बाद 22 जनवरी, 2021 को अंतिम बार बैठक हुई। जिसके बाद सरकार ने अगली बैठक की तारीख नहीं दी। बता दें कि दिल्ली की सीमाओं पर जारी किसान आंदोलन को सोमवार को 75 दिन पूरे हो गए।

4 - लाल किला उपद्रव : चंडीगढ़ का शख्स गिरफ्तार, पुलिस ने रखा था 50,000 का ईनाम

दिल्ली पुलिस ने रविवार को बताया कि 26 जनवरी को कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों की ट्रैक्टर रैली में मचे उपद्रव में शामिल चंडीगढ़ के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। ये शख्स कथित रूप से उन प्रदर्शनकारियों के एक समूह का नेतृत्व कर रहा था जिसने गणतंत्र दिवस की ट्रैक्टर रैली के दौरान लाल किले में प्रवेश किया था। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि गिरफ्तार शख्स की पहचान सुखदेव सिंह के रूप में पृहुई है, जो कि किले में हिंसा और बर्बरता में शामिल थे। पिछले हफ्ते, पुलिस ने सिंह की गिरफ्तारी के लिए किसी भी जानकारी के लिए 50,000 रुपये की घोषणा की थी।

5 - Myanmar Coup : सैन्य तख्तापलट के खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर

म्यांमार में एक फरवरी को हुए सैन्य तख्तापलट के विरोध में तथा देश की प्रमुख नेता आंग सान सू की को जल्द से जल्द रिहा करने के समर्थन में हजारों लोगों ने रविवार को देशभर में जोरदार प्रदर्शन किया। हजारों प्रदर्शनकारियों ने यहां प्रदर्शन के दौरान नारे लगाते हुए कहा, 'हम सैन्य तानाशाही नहीं चाहते हैं। हम लोकतंत्र चाहते हैं।' तख्तापलट करने वाले सैन्य अधिकारियों ने इस संबंध में हालांकि अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2007 के बाद म्यांमार में यह अब तक का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन है। तख्तापलट के विरोध में लोगों की भीड़ को प्रदर्शनों में जुटने से रोकने के लिए सेना ने ट्विटर और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को बैन करने के तुरंत बाद इंटरनेट सेवा बंद कर दी थी।