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Winter Session: राज्यसभा में महिला आरक्षण, बाल कल्याण सहित 21 विधेयक हुए पेश, जानें कौन से हैं ये बिल

राज्यसभा में शुक्रवार को कार्यस्थलों पर महिलाओं को आरक्षण देने, पश्चिमी ओडिशा में उच्च न्यायालय की पीठ बनाने, अनाथ बालकों के कल्याण सहित विभिन्न प्रावधानों वाले कुल 21 निजी विधेयक पेश किए गए। शुक्रवार को सदन में भोजनावकाश के बाद गैर सरकारी कामकाज शुरू होने पर वाईएसआर कांग्रेस के वी विजयसाई रेड्डी ने निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा कानून में संशोधन के लिए एक निजी संशोधन विधेयक पेश किया। 

इसके अलावा उन्होंने संविधान (संशोधन) विधेयक 2020 (नये अनुच्छेद 21ए का अंत:स्थापन) और भारतीय दंड संहिता (संशोधन) विधेयक भी पेश किया। भाजपा के वाई एस चौधरी ने संविधान (संशोधन) विधेयक 2020 (नये अनुच्छेद 12क और 12ख का अंत:स्थापन) पेश किया। बीजू जनता दल के प्रसन्न आचार्य ने ओडिशा उच्च न्यायालय (पश्चिमी ओडिशा में स्थायी न्याय पीठ की स्थापना) विधेयक पेश किया। इसमें ओडिशा के पश्चिमी क्षेत्र में उच्च न्यायालय की पीठ की स्थापना का प्रस्ताव किया गया है। 

एमडीएमके सदस्य वाइको ने जहां संविधान (संशोधन) विधेयक 2020 (अनुच्छेद 248 का लोप और सातवीं अनुसूची का संशोधन) पेश किया, वहीं भाजपा के विकास महात्मे ने संविधान (संशोधन) विधेयक 2020 (सातवी अनुसूची का संशोधन) पेश किया। द्रमुक के पी विल्सन ने संविधान (संशोधन) विधेयक 2020 (अनुच्छेद 130 के स्थान पर नये अनुच्छेद का प्रतिस्थापन) और आयुर्विज्ञान शिक्षा विधि (संशोधन) विधेयक पेश किए।

बीजद के डा. सस्मित पात्रा ने भारतीय दंड संहिता (संशोधन) विधेयक और अधिवक्ता (संशोधन) विधेयक पेश किए। द्रमुक के तिरूचि शिवा ने महिला (कार्यस्थल में आरक्षण) विधेयक 2021 पेश किया जिसमें कार्यस्थल पर महिलाओं को आरक्षण देने का प्रावधान है। इसके बाद भाजपा सदस्य के जे अल्फोंस आसन की अनुमति से संविधान (संशोधन) विधेयक 2021 (उद्देशिका का संशोधन) पेश करने के लिए खड़े हुए। 

इसका विरोध करते हुए राष्ट्रीय जनता दल के मनोज झा ने कहा कि इस विधेयक को सदन में पेश करने की अनुमति कैसे दी जा सकती है क्योंकि यह संविधान की प्रस्तावना में संशोधन के प्रावधान वाला विधेयक है। इस पर उपसभापति हरिवंश ने कहा कि नियमों के तहत इस विधेयक को सदन में रखा जा सकता है किंतु इसे पेश करने या नहीं करने की अनुमति देने का काम सदन का है। इसके बाद संसदीय कार्य राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने प्रस्ताव रखा कि इस विधेयक को पेश करने के बारे में व्यवस्था देने का काम आसन के लिए आगे किसी समय पर छोड़ दिया जाए। 

उनके इस प्रस्ताव को पूरे सदन ने मान लिया और अल्फोंस का विधेयक पेश नहीं हो पाया। इसके बाद कांग्रेस के के टीएस तुलसी ने तीन, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की फौजिया खान ने दो तथा कांग्रेस के नीरज डांगी, भाजपा के हरनाथ सिंह यादव एवं मनोनीत डा. नरेंद्र जाधव ने एक-एक गैर सरकारी विधेयक पेश किया।