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PM मोदी के साथ सर्वदलीय बैठक का न्योता मिलने के बाद कश्मीर की पार्टियों में मंथन का दौर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 24 जून को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक का न्योता मिलने के बाद जम्मू-कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) और पीडीपी सहित मुख्यधारा की क्षेत्रीय पार्टियों में रविवार को गहन विचार-विमर्श का दौर चला जबकि कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा तत्काल बहाल करने की मांग की।

पार्टियों ने विचार-विमर्श केंद्र के न्योते पर रुख तय करने के लिए पीपुल्स एलायंस फॉर गुपकर डिक्लेरेशन (पीएजीडी) की मंगलवार को होने वाली संयुक्त बैठक से पहले किया। इस गठबंधन में नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, माकपा, अवामी नेशनल कॉन्फ्रेंस, भाकपा और जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट शामिल हैं।

दिन की शुरुआत होने के साथ ही महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीडीपी में राजनीतिक मामलों की समिति की करीब दो घंटे तक बैठक हुई।

पीडीपी के मुख्य प्रवक्ता सैयद सुहैल बुखारी ने बैठक के बाद महबूबा के आवास के बाहर पत्रकारों से कहा, ‘‘पीएसी ने सर्वसम्मति से मामले पर अंतिम फैसला लेने का अधिकार पार्टी अध्यक्ष को दिया है।’’

बुखारी ने कहा कि गुपकर गठबंधन की बैठक मंगलवार को होगी, जहां सदस्य दल मुद्दे पर चर्चा करेंगे और फिर इस पर अंतिम फैसला लेंगे कि प्रधानमंत्री द्वारा बुलाई बैठक में भाग लेना है या नहीं। उन्होंने कहा, ‘‘दो दिनों के बाद पीएजीडी की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी। गठबंधन के सदस्य अपने सुझाव देंगे और उसके बाद बैठक में शामिल होने पर फैसला लिया जाएगा।’’

हालांकि, महबूबा के रिश्तेदार सरताज मदानी को एहतियाती हिरासत से छह महीने बाद रिहा करने को महबूबा की बैठक में उपस्थिति सुनिश्चित करने के कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

प्रधानमंत्री की जम्मू-कश्मीर की सभी राजनीतिक पार्टियों के साथ बैठक को केंद्र द्वारा राजनीतिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाए जाने के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव कराया जाना भी शामिल है।

नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू कश्मीर की मुख्य धारा की राजनीतिक पार्टियों को केंद्र की ओर से मिले वार्ता के निमंत्रण को लेकर रविवार को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ परामर्श की प्रक्रिया शुरू कर दी, जिनमें पार्टी महासचिव अली मोहम्मद सागर और कश्मीर के प्रांतीय अध्यक्ष नसीर असलम वानी शामिल हैं।

चौधरी मोहम्मद रमजान, शेख मुस्तफा कमाल, मियां अल्ताफ, मुबारक गुल, सकीना इटू, खालिद नजीब सुहरावर्दी और दो सांसदों-- मोहम्मद अकबर लोन एवं हसनैन मसूदी ने भी बैठक में हिस्सा लिया।

बैठक के बाद प्रांतीय अध्यक्ष वानी ने कहा, ‘‘ पार्टी अध्यक्ष ने वरिष्ठ नेताओं के साथ परामर्श प्रक्रिया शुरू की है और ये बैठकें कल भी जारी रहेंगी। आज कुछ वरिष्ठ नेताओं के साथ चर्चा की गयी, वह शाम में और कल सुबह कुछ और नेताओं के साथ बैठक करेंगे। मैं समझता हूं कि हम कल तक आपको स्पष्ट तस्वीर बता पायेंगे।’’

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली बैठक के लिए जम्मू-कश्मीर के चार मुख्यमंत्रियों सहित 14 नेताओं को न्योता दिया गया है जिसमें उम्मीद की जा रही कि केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव की रूपरेखा पर चर्चा होगी।

केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने इन नेताओं को बैठक में आमंत्रित करने के लिए आठ पार्टियों- नेकां, पीडीपी, भाजपा, कांग्रेस, जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी, माकपा, पीपुल्स पार्टी और पैंथर्स पार्टी - से फोन पर संपर्क किया। यह बैठक राष्ट्रीय राजधानी में बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री आवास पर अपराह्न तीन बजे होगी।

पांच अगस्त 2019 को केंद्र द्वारा जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के बाद प्रधानमंत्री का जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक पार्टियों से यह पहला सीधा संवाद होगा। हालांकि, वर्ष 2018 से ही राज्य में केंद्रीय शासन है।

दिल्ली में कांग्रेस ने कहा कि केन्द्र को संविधान और लोकतंत्र के हित में, जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग स्वीकार करनी चाहिये।

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने हालांकि यह नहीं बताया कि पार्टी 24 जून को होने वाली बैठक में हिस्सा लेगी या नहीं। सुरजेवाला ने 6 अगस्त 2019 को हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक की ओर ध्यान दिलाया, जिसमें पार्टी ने स्पष्ट रूप से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग की थी।

उन्होंने कहा, ‘‘ हमारा मानना है कि ऐसा नहीं करना लोकतंत्र और संवैधानिक सिद्धांतों पर सीधा हमला है।’’

सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस का मानना है कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के साथ-साथ चुनाव भी कराए जाने चाहिये, ताकि लोग अपने प्रतिनिधियों का चुनाव कर सकें और दिल्ली के शासन की जगह राज्य के कार्यों को आगे बढ़ाने के लिये अपनी विधानसभा हो। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक अधिकारों को पूरी तरह बहाल करने की गारंटी देने का यही एकमात्र मार्ग है।

सुरजेवाला ने कहा, ‘‘ यह अब प्रधानमंत्री और भाजपा पर है कि क्या वह बैठक करती है या कांग्रेस की संविधान और लोकतंत्र और लोगों के हित में मांग को स्वीकार कर जम्मू-कश्मीर के राज्य का दर्जा बहाल करती है।’’

इससे जुड़े घटनाक्रम में जम्मू-कश्मीर पैंथर्स पार्टी (जेकेपीपी) के अध्यक्ष भीम सिंह ने जम्मू में केंद्र की ‘कश्मीर की कथित तुष्टिकरण’ नीति के खिलाफ प्रदर्शन किया। सिंह को भी बैठक में आमंत्रित किया गया है।

पार्टी सर्वदलीय बैठक में घाटी के अधिकतर नेताओं को आमंत्रित करने से नाराज है। सिंह ने कहा कि वह इस न्योते पर चर्चा करने के लिए सोमवार को अपनी पार्टी के नेताओं के साथ बैठक करेंगे और इसमें भाग लेने के संबंध में निर्णय लेंगे। पैंथर्स पार्टी अध्यक्ष ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘मुझे बैठक का न्योता मिला है और कल पार्टी नेताओं से इस बारे में बात करने के बाद फैसला करुंगा।’’

जेकेएनपीपी अध्यक्ष और पूर्व मंत्री हर्षदेव सिंह के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने भाजपा नीत केंद्र सरकार पर ‘कश्मीर तुष्टीकरण नीति’ चलाने का आरोप लगाते हुए यहां पार्टी मुख्यालय के बाहर उसका पुतला जलाया।

हर्षदेव सिंह ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘सरकार ने कश्मीर के सभी दलों को बैठक के लिए बुलाया है लेकिन जम्मू के नेताओं की अनदेखी की है। अल्ताफ बुखारी की हाल ही में बनी अपनी पार्टी और सज्जाद लोन की पीपुल्स कॉन्फ्रेंस को बैठक का न्योता मिला है, जिन्हें अभी तक निर्वाचन आयोग ने मान्यता भी नहीं दी है, लेकिन जम्मू से केवल भीम सिंह को आमंत्रित किया गया है।’’

वहीं, कांग्रेस की जम्मू-कश्मीर इकाई में भी मंथन का दौर जारी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीए मीर ने रविवार को यहां वरिष्ठ सहयोगियों से चर्चा की और केंद्र के न्योते पर उनका रुख जाना।

जम्मू में जारी विज्ञप्ति में बताया कि यह विचार-विमर्श का दौर दो घंटे तक चला और अगले दो दिनों तक कश्मीर के पार्टी नेताओं सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ भी विचार विमर्श का दौर जारी रहेगा, जिसके बाद 24 जून की बैठक में शामिल होने का फैसला लिया जाएगा।

विज्ञप्ति के मुताबिक, न्योते पर विचार-विमर्श के लिए बुलाई गई बैठक में पूर्व मंत्री रमण भल्लान, मुल्ला राम, योगेश साहणे, अब्दुल मजीद वान, पूर्व विधान पार्षद रविंद्र शर्मा और कांता भान, बलवान सिंह, टीएस बाजवा, शाह मोहम्मद चौधरी, मनमोहन सिंह, आोक शर्मा, टी बलबीर सिंह, वेद महाजन और अधिवक्ता के के पंगोत्र शामिल हुए।

विज्ञप्ति में कहा गया, ‘‘नेताओं ने लोगों की राय और महत्वकांक्षा संबंधी जानकारी दी और जिसे मजबूती से केंद्र के समक्ष रखे जाने की जरूरत है, खासतौर पर पर्याप्त संवैधानिक सुरक्षा उपायों के साथ राज्य का दर्जा बहाल करने का मामला।’’