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सर्वदलीय बैठक : कश्मीर और चीन मामले में सरकार को मिला विपक्ष का साथ

नई दिल्ली : राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के मुद्दे पर देश में एक राय बनाने के लिए सरकार ने विपक्षी दलों को साथ लेकर चलने की कोशिश की है। गृह मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा व वित्त मंत्री अरुण जेटली और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की मौजूदगी में विपक्षी दलों को यह स्पष्ट कर दिया गया कि सरकार न तो देश के अंदर मौजूद अलगाववादियों के सामने झुकेगी और न ही चीन से डरेगी।

शुक्रवार को सरकार ने विपक्ष के नेताओं को चीन से गतिरोध व कश्मीर के हालात की जानकारी देने के लिए बैठक बुलाई थी। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल व विदेश सचिव एस. जयशंकर ने सिक्किम-भूटान सीमा (डोकलाम) पर चीन के साथ जारी विवाद पर प्रेजेंटेशन दिया। संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले बुलाई गई बैठक में विपक्षी दलों ने चीन के मुद्दे पर तो सरकार को साथ देने का भरोसा दिया, लेकिन कश्मीर की स्थिति को लेकर चिंता जताई। कश्मीर को लेकर गृह सचिव राजीव गौबा ने ब्योरा दिया।

कूटनीतिक विकल्प तलाशें

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद और आनंद शर्मा ने कहा कि चीन और जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर उन्होंने अपनी शंकाएं सरकार के प्रतिनिधियों के सामने रखीं। सरकार को तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक विकल्प तलाशने की सलाह दी गई है।

आनंद शर्मा ने कहाकि उनकी पार्टी के लिए राष्ट्रहित सर्वोपरि है, लेकिन विपक्ष के रूप में सरकार की नीति की खामियों को संसद में उजाग र करने से भी नहीं चूकेंगे। माकपा महासचिव सीताराम येचुरी के अनुसार सरकार ने सिक्किम विवाद को सुलझाने का भरोसा दिया है। तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ"ब्रॉयन ने कहा कि उनकी पार्टी ने कुछ गंभीर सवाल उठाए। सरकार के पास उन घटनाओं से निपटने को लेकर कोई जवाब नहीं था।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले के मुताबिक बैठक में यह आम सहमति थी कि भारत और चीन विवाद को अस्ताना में हुई बातचीत के मुताबिक सुलझाया जाए। कुछ विपक्षी नेताओं ने कश्मीर की स्थिति को लेकर सवाल उठाया। गृह मंत्रालय का कहना था कि जमीनी हालात अब भी बेकाबू नहीं हैं। 19 प्रमुख नेता मौजूद थेराजनाथ सिंह और सुषमा स्वराज ने विपक्षी नेताओं का आशंकाओं को दूर करने की कोशिश की।

रक्षा मंत्री अरुण जेटली और एनएसए डोभाल भी बैठक में मौजूद थे। विपक्षी नेताओं में दो पूर्व रक्षामंत्रियों शरद पवार और मुलायम सिंह यादव को भी बुलाया गया था। बैठक में विभिन्न दलों के कुल 19 सांसद मौजूद थे। डोभाल जाएंगे चीनशीर्ष मंत्रियों ने विपक्ष के नेताओं को बताया कि एनएसए डोभाल 26-27 जुलाई को चीन जाएंगे और चीन के वार्ताकारों के समक्ष भारत का पक्ष रखेंगे।

हालांकि कांग्रेस समेत कई पार्टियों ने सरकार को यह नसीहत भी दी कि चीन के साथ सीमा पर तनाव घटाने के लिए कूटनीतिक तरीकों के इस्तेमाल पर जोर देना चाहिए। कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि कांग्रेस के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सबसे पहले है। हमने सरकार को कूटनीतिक तरीके के जरिये हालात से निपटने की सलाह दी है।

दरअसल संसद सत्र शुरू होने से पहले इस बैठक को बुलाने का सरकार का मकसद यह था कि विपक्षी पार्टियों को अमरनाथ और खास तौर पर चीन के मुद्दे पर विश्वास में लिया जाए, ताकि संसद में वह इन बेहद संवेदनशील मामलों पर सरकार को नहीं घेरें।