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बीसीआई ने न्यायमूर्ति संजीव खन्ना को SC के न्यायाधीश पद पर पदोन्नत करने का विरोध किया

बार काउन्सिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश संजीव खन्ना को कई अन्य न्यायाधीशों की अनदेखी करके सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत करने की सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश का बुधवार को विरोध किया। उसने कॉलेजियम के फैसले को ‘मनमाना’ बताया। बीसीआई ने कहा कि प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाले पांच सदस्यीय कॉलेजियम के फैसले को बार और आम लोगों ने ‘अनुचित’ पाया।

बीसीआई के कॉलेजियम के फैसले का विरोध करने के लिए बयान जारी करने से पहले न्यायमूर्ति संजय किशन कौल ने सीजेआई और कॉलेजियम के अन्य सदस्यों--न्यायमूर्ति ए के सीकरी, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति एन वी रमण और न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा को पत्र लिखकर राजस्थान और दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों क्रमश: प्रदीप नंदराजोग और राजेंद्र मेनन की वरिष्ठता की अनदेखी किये जाने का मुद्दा उठाया।

सूत्रों ने बताया कि न्यायमूर्ति कौल की राय थी कि अगर दोनों मुख्य न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत नहीं किया गया तो बाहर गलत संकेत जाएगा। दोनों न्यायाधीश वरिष्ठता क्रम में न्यायमूर्ति खन्ना से ऊपर हैं। न्यायमूर्ति खन्ना अखिल भारतीय आधार पर हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की संयुक् वरिष्ठता सूची में 33 वें स्थान पर आते हैं।

दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति कैलाश गंभीर ने भी 14 जनवरी को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर कॉलेजियम द्वारा कई न्यायाधीशों की वरिष्ठता की अनदेखी किये जाने पर चिंता जताई थी। बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने एक बयान में कहा कि देश के कई वरिष्ठ न्यायाधीशों और मुख्य न्यायाधीशों की वरिष्ठता की अनदेखी को लोग बर्दाश्त नहीं कर सकते और न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराजोग और न्यायमूर्ति राजेंद्र मेनन के नाम की सिफारिश वापस लिये जाने को ‘मनमानी’ के तौर पर देखा गया।

मिश्रा ने कहा, ‘‘वे सत्यनिष्ठा और न्यायिक योग्यता वाले लोग हैं। कोई भी व्यक्ति किसी भी आधार पर उन पर अंगुली नहीं उठा सकता। 10 जनवरी 2019 के फैसले से निश्चित तौर पर ऐसे न्यायाधीश और कई अन्य योग्य वरिष्ठ न्यायाधीश और हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों का अपमान होगा और उनका मनोबल गिरेगा।’’

बार निकाय ने कहा कि वह ‘‘भारतीय बार की जबर्दस्त नाराजगी और प्रतिक्रिया’’ को देख रहा है और बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम जनता की टिप्पणियों पर नजर रख रहा है ‘‘जो दर्शाता है कि हालिया अतीत में हमारी कॉलेजियम व्यवस्था के प्रति लोगों के भरोसे में अचानक से कमी आई है।’’ बीसीआई इन मुद्दों को उठाने में लगी हुई है, वहीं उसने कहा कि दिल्ली बार काउन्सिल ने भी कॉलेजियम के फैसले के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया है।

बयान में कहा गया है कि कई अन्य राज्य बार काउन्सिलों, हाई कोर्ट बार एसोसिएशन और देश के अन्य बार एसोसिएशनों ने बीसीआई को पत्र लिखकर उससे इस मुद्दे को सरकार और कॉलेजियम के न्यायाधीशों के समक्ष उठाने का दबाव बनाया है। बयान में कहा गया है, ‘‘हमें न्यायमूर्ति खन्ना से कोई शिकायत नहीं है, लेकिन वह अपनी बारी की प्रतीक्षा कर सकते हैं।

देश के कई मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों की मेधा और वरिष्ठता की अनदेखी करके उन्हें पदोन्नत करने की कोई जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए।’’ बीसीआई ने कहा, ‘‘बार कॉलेजियम और सरकार से अनुरोध करेगा कि इस तरह वरिष्ठों की अनदेखी को बढ़ावा नहीं दें। वरिष्ठता के सिद्धांत की पूरी तरह अनदेखी करके नियुक्ति किये जाने को लेकर समाज के सभी हिस्सों से तीखी प्रतिक्रिया आई है।’’ न्यायमूर्ति खन्ना के साथ कॉलेजियम ने न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी को शीर्ष अदालत के न्यायाधीश के तौर पर पदोन्नत करने की सिफारिश की है।