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अनुच्छेद 370 पर चिदंबरम के बयान को भाजपा ने बताया भड़काऊ

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने आरोप लगाया है कि भाजपा ने जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा इसलिए समाप्त किया क्योंकि वह मुस्लिम बहुल राज्य है। उनके इस बयान की निंदा करते हुए भाजपा ने कहा कि यह ‘भड़काऊ और गैरजिम्मेदाराना’ है। पूर्व गृह मंत्री ने यह आरोप भी लगाया कि यदि जम्मू कश्मीर हिंदू बहुल राज्य होता, तो भाजपा यह फैसला नहीं करती। 

चिदंबरम ने कहा कि देश के 70 साल के इतिहास में ऐसा उदाहरण कभी नहीं देखने को मिला, जिसमें किसी राज्य को केंद्र शासित प्रदेश में तब्दील कर दिया गया हो। उन्होंने कहा, ‘‘आज, जम्मू कश्मीर को एक नगर पालिका में तब्दील कर दिया गया है...अनुच्छेद 371 के तहत अन्य राज्यों के लिए भी विशेष प्रावधान हैं, फिर जम्मू कश्मीर के साथ ही ऐसा क्यों किया गया...ऐसा धार्मिक कारणों को लेकर किया गया।’’ पूर्व वित्त मंत्री ने रविवार को चेन्नई में एक सार्वजनिक समारोह में कहा, ‘‘यदि जम्मू कश्मीर हिंदू बहुल राज्य होता,तो भाजपा ऐसा नहीं करती। उन्होंने ऐसा किया क्योंकि यह क्षेत्र मुस्लिम बहुल है।’’ 

कानून मंत्री और भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने चिदंबरम पर बहुत गैर जिम्मेदाराना और भड़काऊ बयान देने का आरोप लगाया, वहीं भाजपा नेता एवं केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी तथा मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस कश्मीर मुद्दे को सांप्रदायिक रंग दे रही है। पिछले सप्ताह केंद्र द्वारा लिये गये फैसले का बचाव करते हुए नकवी ने कहा कि सरकार ने कांग्रेस द्वारा दशकों पहले की गयी बड़ी भूल को सुधारा है। 

नकवी ने कहा, ‘‘उन्होंने जो कहा है वह इस मुद्दे को सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास है जबकि यह फैसला राष्ट्रीय हित में है।’’ चौहान ने चिदंबरम के बयान पर कहा, ''यह कांग्रेस की छोटी मानसिकता का परिचायक है कि वह इस मुद्दे को हिंदू-मुस्लिम के नजरिए से देख रही है।'' प्रसाद ने कहा कि अनुच्छेद-370 को हटाया जाना जम्मू कश्मीर और देश हित में है। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने चिदंबरम के बयान की आलोचना करते हुए कांग्रेस पर लंबे समय तक सत्ता में रहते हुए भी जम्मू कश्मीर में अल्पसंख्यकों तथा अन्य समुदायों के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया।

बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि चिदंबरम का बयान दुर्भाग्यपूर्ण है और यह सरकार के खिलाफ मुसलमानों को भड़काने के लिए दिया गया है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘दुर्भाग्य से पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और दिग्विजय सिंह इस मुद्दे पर मुस्लिम समुदाय को सरकार के खिलाफ उकसाने की कोशिश कर रहे हैं।’’ चिदंबरम ने कल यह दावा भी किया था कि जम्मू कश्मीर में हालात अस्थिर हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘...वे (भाजपा) दावा करते हैं कि कश्मीर में स्थिति स्थिर है। क्या ऐसा है? यदि भारतीय मीडिया संस्थान जम्मू कश्मीर में अशांति को कवर नहीं कर रहे हैं तो क्या इसका यह मतलब है कि स्थिति स्थिर है ? ’’ चिदंबरम ने सात राज्यों में शासन कर रही सात क्षेत्रीय पार्टियों की भी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने (इन दलों ने) डर से राज्यसभा में भाजपा के (अनुच्छेद 370 पर) कदम के खिलाफ सहयोग नहीं किया। 

पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, ‘‘मैं जानता हूं कि लोकसभा में हमारे पास बहुमत नहीं है लेकिन यदि सात पार्टियों (अन्नाद्रमुक, वाईएसआर कांग्रेस, टीआरएस, बीजद, आप, तृणमूल कांग्रेस, जदयू) ने सहयोग किया होता तो राज्यसभा में विपक्ष बहुमत में होता। यह कुछ परेशान करने वाली चीज है।’’ उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस ने वाकआउट किया, लेकिन इससे क्या फर्क पड़ा। 

कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आठ अगस्त को राष्ट्र को संबोधित करते हुए जम्मू कश्मीर में लागू नहीं होने वाले कानूनों पर चुनिंदा तरीके से अपनी बात रखने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘‘मैं 90 दूसरे कानून गिना सकता हूं जो जम्मू कश्मीर पर लागू होते हैं।’’ चिदंबरम ने यह दावा भी किया कि जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल के बीच कभी विरोधाभास नहीं था। उन्होंने कहा, ‘‘पटेल कभी संघ पदाधिकारी नहीं रहे। भाजपा के पास कोई नेता नहीं है, वे हमारे नेता को चुरा रहे हैं। कोई फर्क नहीं पड़ता, इतिहास नहीं भूलता कि कौन किसका है।’’