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कोरोना संकट के बीच केंद्र का बड़ा ऐलान, अगले पांच महीने गरीबो को मिलेगा मुफ्त खाद्यान्न

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के चौथे चरण के तहत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के लाभार्थियों को जुलाई से लेकर नवंबर 2021 तक पांच महीने की और अवधि के लिए मुफ्त खाद्यान्न आवंटन को बुधवार को मंजूरी प्रदान कर दी।

देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर के संकट के बीच केंद्र सरकार ने बुधवार को एक बड़ा फैसला लिया। देश में आम जन कोरोना वायरस और बढ़ती महंगाई के कारण बहुत परेशान है, ऐसे में मोदी सरकार ने लोगों की मुश्किलों को थोड़ा कम करते हुुए एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी।
केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के चौथे चरण के तहत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के लाभार्थियों को जुलाई से लेकर नवंबर 2021 तक पांच महीने की और अवधि के लिए मुफ्त खाद्यान्न आवंटन को बुधवार को मंजूरी प्रदान कर दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
सरकारी बयान के अनुसार, एनएफएसए के तहत अंत्योदय अन्न योजना और प्राथमिकता वाले परिवार के तहत कवर किए गए 81.35 करोड़ लाभार्थियों को जुलाई से लेकर नवंबर, 2021 तक के लिए पांच किलो प्रति व्यक्ति प्रति माह की दर से मुफ्त खाद्यान्न मिल सकेगा। इसमें कहा गया है कि 81.35 करोड़ व्यक्तियों को पांच महीने के लिए पांच किलो प्रति व्यक्ति प्रति माह मुफ्त खाद्यान्न की मंजूरी से 64,031 करोड़ रुपये की अनुमानित खाद्य सब्सिडी की जरूरत होगी।
बयान के अनुसार, चूंकि भारत सरकार इस योजना के लिए राज्यों/केन्द्र-शासित प्रदेशों के बिना किसी भी योगदान के पूरे खर्च को वहन कर रही है, भारत सरकार द्वारा परिवहन एवं ढुलाई और एफपीएस डीलरों के लाभांश आदि के लिए लगभग 3,234.85 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च किया जाएगा। इस प्रकार, भारत सरकार द्वारा वहन किया जाने वाला कुल अनुमानित व्यय 67,266.44 करोड़ रुपये होगा।
इसमें कहा गया है कि गेहूं/चावल के रूप में आवंटन के बारे में खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग द्वारा तय किया जाएगा। खाद्यान्न के मामले में कुल निर्गम लगभग 204 लाख मीट्रिक टन हो सकता है। सरकार का कहना है कि इस अतिरिक्त आवंटन से कोरोना वायरस के कारण आए आर्थिक व्यवधान से गरीबों को होने वाली कठिनाइयों में कमी आएगी। अगले पांच महीने में किसी भी गरीब परिवार को व्यवधान की वजह से खाद्यान्न की अनुपलब्धता के कारण कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ेगा।

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