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Center VS Kejriwal Government: तीखी हुई दिल्ली पर नियंत्रण की लड़ाई! समझिए क्या है पूरा माजरा

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली पर नियंत्रण की जंग केंद्र की मोदी सरकार और दिल्ली की आम आदमी पार्टी (आप) के बीच और अधिक गंभीर हो गया है। केंद्र बनाम दिल्ली सरकार की लड़ाई पर देश की शीर्ष अदालत, सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने कहा कि अधिकारियों के तबादलों और पोस्टिंग पर उनका नियंत्रण होना चाहिए, क्योंकि दिल्ली देश की राजधानी है और पूरी दुनिया भारत को दिल्ली की नजर से ही देखती है।  

दिल्ली सरकार ने केंद्र के रुख पर जताई आपत्ति  

इस पर दिल्ली सरकार ने केंद्र के रुख पर आपत्ति जताई है। सुप्रीम कोर्ट सिविल सर्विसेज पर नियंत्रण को लेकर केंद्र के खिलाफ दिल्ली सरकार की याचिका पर सुनवाई कर रही है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, "चूंकि दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी है, इसलिए यह आवश्यक है कि केंद्र के पास लोक सेवकों की नियुक्तियों और तबादलों का अधिकार हो। दिल्ली राष्ट्र का चेहरा है। दुनिया भारत को दिल्ली के माध्यम से देखती है।"   


यह किसी विशेष राजनीतिक दल के बारे में नहीं  

केंद्र ने तर्क दिया, "दिल्ली के कानूनों के बारे में आवश्यक विशेषता इस बात से निर्देशित है कि इस देश की महान राजधानी को कैसे प्रशासित किया जाएगा। यह किसी विशेष राजनीतिक दल के बारे में नहीं है।" केंद्र की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने 239 AA की व्याख्या करते हुए बालकृष्णन समिति की रिपोर्ट का भी जिक्र किया। कहा दिल्ली क्लास सी राज्य है। 

दुनिया के लिए दिल्ली को देखना यानी भारत को देखना है। बालकृष्ण रिपोर्ट की भी इस सिलसिले में बड़ी अहमियत है।  चूंकि यह राष्ट्रीय राजधानी है, इसलिए यह आवश्यक है कि केंद्र के पास अपने प्रशासन पर विशेष अधिकार हों और महत्वपूर्ण मुद्दों पर नियंत्रण हो।  

केंद्र के सुझाव के मुताबिक मामले को बड़ी पीठ को भेजने की जरूरत नहीं 

केंद्र ने कहा कि मामले को पांच न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ को भेजा जाना चाहिए। दिल्ली सरकार की तरफ से इस सुझाव का कड़ा विरोध किया गया। दिल्ली सरकार के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, "केंद्र के सुझाव के मुताबिक मामले को बड़ी पीठ को भेजने की जरूरत नहीं है।" सिंघवी ने कहा, "पिछली दो-तीन सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार इस मामले को संविधान पीठ को भेजने के लिए बहस कर रही है। बालकृष्णन समिति की रिपोर्ट पर चर्चा करने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि इसे खारिज कर दिया गया था।"  

गौरतलब है कि दिल्ली की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार लंबे समय से केंद्र पर राजधानी को नियंत्रित करने और चुनी हुई सरकार के फैसलों में बाधा डालने के लिए उपराज्यपाल का इस्तेमाल करने का आरोप लगाती रही है। केंद्र ने पहले सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि दिल्ली सरकार को सिर्फ जमीन, पुलिस और सार्वजनिक व्यवस्था के अलावा अन्य विषयों पर कानून पारित करने से रोका जा सकता है।