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किसानों की मौत के 'जीरो' रिकॉर्ड पर भड़की कांग्रेस, खड़गे बोले-यह किसानों का अपमान

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बुधवार को दावा किया कि सरकार के पास कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान मरने वाले किसानों का कोई डाटा नहीं है। केंद्रीय मंत्री के इस दावे पर किसान नेताओं के साथ मुख्य विपक्ष दल कांग्रेस बुरी तरह भड़क उठा है। कांग्रेस ने केंद्र के इस दावे को किसानों का अपमान बताया है।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कह कि यह किसानों का अपमान है। 3 कृषि कानूनों के विरोध में 700 से अधिक किसानों की जान चली गई। केंद्र कैसे कह सकता है कि उनके पास इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है? यदि सरकार के पास 700 लोगों का रिकॉर्ड नहीं है तो उन्होंने महामारी के दौरान लाखों लोगों का डेटा कैसे एकत्र किया। 

उन्होंने कहा कि "पिछले 2 वर्षों में कोरोना वायरस के कारण 50 लाख से अधिक लोगों की जान चली गई, लेकिन सरकार के अनुसार, वायरस के कारण केवल 4 लाख लोग मारे गए। सरकार जनगणना के आधार पर गिनती करे और मृत किसानों को मुआवज़ा दें।"

केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर पर हमलावर होते हुए कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, तोमर साहब, नाकामी छुपाने के लिए इतना बड़ा झूठ! सच्चाई-2020 में 10677 किसानों ने आत्महत्या की। 4090 किसान वो जिनके खुद के खेत हैं, 639 किसान जो ठेके पर ज़मीन ले खेती करते थे, 5097 वो किसान जो दूसरों के खेतों में काम करते थे। पिछले 7 सालों में 78303 किसान आत्महत्या कर चुके।

मृतक किसानों को 5 करोड़ का मुआवजा दे सरकार

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने मृतक किसानों के लिए मुआवजे की मांग करते हुए कहा कि किसान आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिजनों को केंद्र सरकार को 5 करोड़ रुपए का मुआवजा देना चाहिए। उन्होंने कहा, हमारे किसानों ने 3 कृषि कानूनों को निरस्त करने के लिए एक साल तक कड़ी मेहनत की है, जिसमें 700 से अधिक लोगों की जान चली गई थी।

दरअसल, लोकसभा में केंद्र सरकार से सवाल किया गया कि क्या उनके पास कोई डाटा है कि कितने किसानों की आंदोलन के दौरान मौत हुई है और क्या सरकार आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिजनों को मुआवजा देगी। इस सवाल का लिखत में जवाब देते हुए कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि सरकार के पास कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान मरने वाले किसानों का कोई डाटा नहीं है।