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लोकसभा में दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना संशोधन विधेयक 2021 हुआ पेश, जानें विपक्ष का क्या रहा रूझाव

संसद का शीतकालिन सत्र 29 नवंबर को शुरू हुआ और 23 दिसंबर तक चलने की उम्मीद है।इस बीच लोकसभा में शुक्रवार को दिल्ली विशेष पुलिस स्थापन संशोधन विधेयक 2021 पेश किया गया जिसमें सार्वजनिक हित में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक के कार्यकाल को एक बार में एक वर्ष बढ़ाया जा सकता है और पांच वर्ष की अवधि तक उसे विस्तार दिया जा सकता है। लोकसभा में कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन एवं प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह ने यह विधेयक पेश किया ।

 गौरव गोगोई का बयान (कांग्रेस)

विधेयक को पेश किये जाने का विरोध करते हुए कांग्रेस के गौरव गोगोई ने कहा कि लोक हित की बात करते हुए सीबीआई के निदेशक का कार्यकाल पांच वर्ष बढ़ाने का इस विधेयक में प्रस्ताव किया गया है लेकिन इसमें लोक हित क्या है ?उन्होंने कहा कि इस प्रकार से कार्यकाल को विस्तार दिये जाने से व्यक्तिगत निष्ठा को बढ़ावा मिलेगा और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की जा सकेगी। गोगोई ने कहा, ‘‘ऐसे में इस विधेयक को पेश किये जाने का हम विरोध करते हैं।’’

 शशि थरूर का बयान (कांग्रेस)

कांग्रेस के ही शशि थरूर ने विधेयक पेश किये जाने का विरोध करते हुए कहा कि यह विधेयक अध्यादेश के स्थान पर लाया गया है और इस प्रकार चुनिंदा तरीके से आध्यादेश लाने का रास्ता ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि यह उच्चतम न्यायालय के आदेशों की अवहेलना भी है जिसमें दुर्लभ मामलों में ही कार्यकाल बढ़ाने का बात कही गई है।

 सौगत राय का बयान (कांग्रेस)

 तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय ने कहा कि सीबीआई के बारे में कहा जाता है कि यह ‘‘पिंजरे में कैद तोता’’ बन गया है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक लोकतंत्र के खिलाफ है और सीबीआई का दुरूपयोग विपक्ष के लोगों को परेशान करने के लिये किया जायेगा।

अधीर रंजन चौधरी  का बयान (कांग्रेस)

कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि यह दुर्भावनापूर्ण मंशा से लाया गया विधेयक है। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘यह सरकार अध्यादेश का मार्ग अपना रही है और तानाशाही को बढ़ावा देना चाहती है।’’ उन्होंने कहा कि जो अधिकारी इनकी (सरकार की) बात सुनेगा, उसका कार्यकाल बढ़ाया जायेगा, यह उचित नहीं है।

अन्य  दल 

आरएससी के एन के प्रेमचंद्रन ने भी विधेयक पेश करने का विरोध किया। इस पर कार्मिक, लोक शिकायत राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह ने कहा कि पूर्व के कानून में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के निदेशक के कार्यकाल के संबंध में केवल न्यूनतम सीमा तय थी और उस कानून में कार्यकाल को लेकर कोई सीमा तय नहीं की गई थी, हमने इसकी सीमा पांच वर्ष तय कर दी है। मंत्री ने कहा कि अध्यादेश की जरूरत इसलिये पड़ी क्योंकि पिछले सत्र में व्यवधान के कारण कामकाज में बाधा आई।

विधेयक के प्रस्तावों में कहा गया है कि ‘‘इसके तहत दिल्ली पुलिस विशेष पुलिस स्थापन अधिनियम 1946 में लोकहित में इसकी धारा 4 की उपधारा 1 के अधीन समिति की सिफारिश के आधार पर एक बार में एक वर्ष की अवधि के लिये विस्तार किया जायेगा लेकिन पांच वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद ऐसा कोई सेवा विस्तार नहीं दिया जाएगा।’’ सीबीआई के निदेशक का चयन प्रधानमंत्री, भारत के प्रधान न्यायाधीश और लोकसभा में विपक्ष के नेता की एक समिति की सिफारिश के आधार पर होता है।