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देश

दिग्विजय सिंह ने राज्यसभा में बीजेपी पर लगाया सांप्रदायिकता फैलाने का आरोप

राज्यसभा में मंगलवार को कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष ने बीजेपी पर देश में सांप्रदायिकता फैलाने का आरोप लगाते हुए चुनावी सुधार किए जाने की मांग की वहीं सत्ता पक्ष ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश का विश्व में दबदबा बढ़ा है। विपक्ष ने चुनाव आयोग की नियुक्ति के लिए कालेजियम गठित करने तथा चुनाव ईवीएम के जरिए कागजी मतपत्रों से कराने की भी मांग की। 

विपक्ष ने फेसबुक जैसे सोशल मीडिया मंचों की भूमिका को लेकर भी सवाल किया और चुनाव में सभी दलों को समान अवसर दिए जाने पर बल दिया। राष्ट्रपति अभिभाषण पर पेश धन्यवाद प्रस्ताव पर उच्च सदन में हुई चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस सदस्य दिग्विजय सिंह ने बीजेपी पर सांप्रदायिकता फैलाने का आरोप लगाया। दिग्विजय सिंह ने कहा कि देश में सांप्रदायिकता का जहर कूट कूट कर भर दिया गया है जिसे हटाना आसान नहीं होगा।


उन्होंने कहा कि सांप्रदायिकता का असर यह है कि लोकसभा तक में धार्मिक नारे लग रहे हैं। उन्होंने झारखंड में हाल ही में भीड़ की हिंसा की घटना का जिक्र करते हुए सवाल किया कि उस समय सरकार और पुलिस कहां थी। दिग्विजय सिंह ने अर्थव्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि यह चरमरा गयी है और संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव डाला जा रहा है। 

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति अभिभाषण में बेरोजगारी के बारे में कोई चर्चा नहीं की गयी है जो 45 साल में सबसे ज्यादा स्तर पर है। सिंह ने सरकार की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि ओएनजीसी, एचएएल जैसी कंपनियों भी प्रभावित हुई हैं और एचएएल को वेतन बांटने के लिए कर्ज लेना पड़ा। 

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उन्होंने कहा कि सरकार ने वादा किया था कि कश्मीर पंडितों को ससम्मान वापस भेजेंगे। सरकार को बताना चाहिए कि कितने लोगों को वहां वापस भेजा गया। उन्होंने पुलवामा हमले का जिक्र करते हुए दावा किया कि उस मामले में खुफिया नाकामी थी क्योंकि राज्य पुलिस इसके बारे में पहले ही आगाह किया था। 

उन्होंने धन्यवाद प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि 2014 में ‘‘सबका साथ सबका विकास’’ की बात की थी जो 2019 में परिवर्तित होकर ‘‘सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास’’ हो गया। दिग्विजय सिंह ने कहा कि इसकी जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने सवाल किया कि लेकिन लोगों का विश्वास कैसे प्राप्त होगा। 

उन्होंने कहा, ‘‘जो व्यक्ति दंगों को लेकर.... माफी मांगने को तैयार नहीं थे, टोपी पहनने को तैयार नहीं थे, प्रधानमंत्री रहते हुए राष्ट्रपति जी के रोजा इफ्तार में जाने को तैयार नहीं थे...।’’ वह आज अपने पहले संबोधन में अल्पसंख्यकों का विश्वास जीतने की बात करते हैं। कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि यह परिवर्तन वाकई में है या कोई जुमला है।

दिग्विजय सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री जो कह कर रहे हैं, वो कर के दिखाएं। अगर वास्तव में परिवर्तन हुआ है तो वह बधाई देते हैं। इससे पूर्व बीजेपी के विनय पी सस्त्रबुद्धे ने कहा कि आज 25 जून के ही दिन (1975 में) देश में आपातकाल लागू किया गया था। उस समय पूरा देश कारावास में बदल गया था। कुछ लोगों को महीनों जेल में रखा गया और कइयों को अपना बलिदान भी देना पड़ा।